राजस्थान में जीका का कहर, 94 पहुंची प्रभावित लोगों की संख्या

पिछले दिनों जीका वायरस के नियंत्रण और रोकथाम उपायों में राज्य सरकार की मदद के लिए सात सदस्यीय उच्चस्तरीय केंद्रीय टीम जयपुर आई थी.

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सांकेतिक तस्वीर (फाइल फोटो: पीटीआई) सांकेतिक तस्वीर (फाइल फोटो: पीटीआई)

विवेक पाठक

  • नई दिल्ली,
  • 17 अक्टूबर 2018,
  • अपडेटेड 11:10 PM IST

राजस्थान की राजधानी जयपुर में जीका वायरस के संक्रमण के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. बुधवार को 14 नए मामले सामने आने के साथ प्रभावित लोगों की संख्या बढ़कर 94 हो गई.

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव वीनू गुप्ता की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में इस बात की जानकारी दी गई. विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि जीका संक्रमण से पीड़ित मरीजों में से तीन चौथाई मरीजों का स्वास्थ्य उपचार के बाद ठीक है.

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समीक्षा बैठक में संक्रमण को फैलने से रोकने को उपायों पर चर्चा की गई. उन्होंने बताया कि राजपूत हास्टल के 84 छात्रों के खून और पेशाब के नमूने जांच के लिए गए. उनमें से 14 छात्रों को इलाज के लिए पृथक वार्ड में भेजा गया है.

केंद्र ने किया था हस्तक्षेप

गौरतलब है कि सोमवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों से इस बीमारी के फैलने पर अंकुश पाने के लिए मच्छरों के पनपने के कारणों पर रोक लगाने को कहा. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव (स्वास्थ्य) संजीव कुमार ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए राज्यों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में जीका वारयस पर नियंत्रण पाने के लिए राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत दिशानिर्देशों को लागू करने को कहा है.  

जयपुर में जीका संक्रमण के अधिकतर मामले शास्त्री नगर इलाके में पाए गए हैं. इलाके में फॉगिंग और संक्रमण को फैलने से रोकने के लिये लार्वा को नष्ट करने के उपाय किये जा रहे हैं. अब तक शास्त्रीनगर के 96,000 आवासीय मकानों में घर-घर जाकर सर्वेक्षण किया जा चुका है. शास्त्रीनगर और आसपास के इलाकों में मच्छरों का लार्वा पाए जाने पर नष्ट किया गया है.

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विभाग के एक अधिकारी ने सोमवार को बताया कि आवासों में लार्वा पाए जाने पर 44 हजार रुपये जुर्माने के 68 चालान काटे गए है. विभाग ने एक परामर्श भी जारी किया जिसमें प्रभावित क्षेत्र से बाहर रहने वाली गर्भवती महिलाओं से शास्त्री नगर इलाके में नहीं जाने को कहा गया है.

जीका वायरस को लेकर जरूरी जानकारी:

-जीका मच्छर के काटने से फैलता है और व्यस्कों में लकवा या अन्य अक्षमताएं पैदा कर सकता है, यह गर्भ में पल रहे शिशु के दिमागी विकास में भी बाधक बन सकता है.

-जीका वायरस वाला मच्छर सुबह और शाम को ज्यादा सक्रिय होता है यह मच्छर रुके हुए पानी में ही पनपता है. जीका, मच्छर से इंसान में और मां से गर्भस्थ शिशु में फैल सकता है.

-जीका रोग के लक्षण मच्छर के काटने से 2 से 7 दिन के पश्चात या जीका प्रभावित व्यक्ति से असुरक्षित यौन संबंध के बाद प्रकट हो सकते हैं.

-आंखें आना, शरीर पर दाने होना, बुखार होना, बदन दर्द होना और जोड़ों में दर्द होना इसके सामान्य लक्षण हैं.

-यह बीमारी जीका वायरस संक्रमित एडीज मच्छर के काटने से होती है. इस बीमारी में सबसे बड़ा खतरा गर्भवती महिलाओं को होता है, गर्भ ठहरने के दो-तीन माह के भीतर अगर महिला जीका की चपेट में आ जाए तो शिशु के सिर का अपूर्ण विकास होता है.

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-इस बीमारी पर यदि समय रहते अंकुश नहीं पाया गया तो यह हमारी पीढियों को बिगाड़ने वाली साबित हो सकती है. पीड़ित को न्यूरोलॉजिकल और आर्गन फेलियर तक की नौबत आ सकती है. 

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