किसानों के सपोर्ट में पंजाबी सिंगर, जानें- गानों से कैसे भर रहे आंदोलन में जोश

पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री पर खालिस्तान, बंदूक संस्कृति और अफीम के इर्द-गिर्द गाने बनाने के आरोप लगते हैं. लेकिन, इस बार गीतकारों ने किसानों को एकजुट करने के लिए गीत लिखेे हैं.

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प्रदर्शन करते किसान (फाइल फोटो) प्रदर्शन करते किसान (फाइल फोटो)

मनजीत सहगल

  • चंडीगढ़,
  • 01 दिसंबर 2020,
  • अपडेटेड 2:24 PM IST
  • पंजाबी सिंगरों ने महीनों पहले लिखे किसानों के लिए गाने
  • यूट्यूब पर खूब वायरल हो रहे पंजाबी सिगर्स के गाने
  • पिछले 6 दिनों से लगातार प्रदर्शन कर रहे किसान

पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री पर खालिस्तान, बंदूक संस्कृति और अफीम के इर्द-गिर्द गाने बनाने के आरोप लगते हैं. लेकिन, इस बार गीतकारों ने किसानों को एकजुट करने के लिए गीत लिखेे हैं. सत्ता पर निशाना साधने वाले इन गीतों में  किसानों को नए कृषि कानूनों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है. 

 बता दें कि कृषि बिल के खिलाफ किसान पिछले 6 दिनों से लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं. ऐसे में किसानों को एकजुट करने के लिए गीतकारों ने कई गीत लिखे हैं. इन गानों में से कई गाने ऐसे हैं जो सीधे हुक्मरानों को निशाना बना रहे हैं. गीतों में किसानों को नए कृषि कानूनों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रोत्साहित किया है.

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किसानों के विरोध प्रदर्शन ने पंजाब संगीत इंडस्ट्री के परिदृश्य को बदल दिया, पंजाबी गीतकार जो कोरोना वायरस महामारी के कारण एक कठिन दौर से गुजर रहा थे. जो सिर्फ लॉकडाउन के जीवन पर वीडियो बनाकर समय बिता रहे थे, अचानक उन्होंने किसानों पर अखबारों की पेपर क्लिप कट करके म्यूजिक वीडियो में उपयोग करना शुरू कर दिया. 

भूमि खोने का डर, इसी के इर्द-गिर्द बनाए जा रहे गाने
किसान विरोध को प्रोत्साहित करने वाले अधिकांश गीतों में एक ही विषय और सामग्री है. भूमि खोने का डर, हथियारों का महिमामंडन, धमकी और नई दिल्ली के लिए एक खुला चैलेंज. इन्हीं सबके इर्द-गिर्द ये गाने बनाए गए हैं. बता दें कि कई पंजाबी गायकों, अभिनेताओं और फिल्म निर्माताओं ने विरोध प्रदर्शनों में भाग लेकर किसानों को समर्थन देने की घोषणा की, कुछ ने उन्हें एकजुट होने और अपनी जमीन, एमएसपी, धन उधारदाताओं और सामान्य रूप से खेती करने के लिए लड़ने के लिए प्रोत्साहित किया.

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कृषि कानून गीतों का मुख्य निशाना
गीतों का मुख्य निशाना सरकार और नया कृषि-कानून है. सिंगर बाजवा द्वारा गाया गया गीत 'जट्टा तगड़ा हो जा' 19 सितंबर को यूट्यूब पर अपलोड किया गया था. यह अब तक 39 लाख से अधिक बार देखा गया है (3,901,161). गीत में कहा गया है कि सरकारों ने हमेशा किसानों के साथ विश्वासघात किया है. साथ ही गीत में उन्हें एकजुट होने के लिए कहा है. 

अनमोल गगन मान का गाना भी यू ट्यूब पर वायरल
अनमोल गगन मान द्वारा गाया गया गीत 'किसान बनाम राजनीति' को 24 सितंबर को Youtube पर अपलोड किया गया था. इस अब तक 4.27 लाख से अधिक बार देखा गया है. इस गाने में कहा गया है कि जो किसान अपने कंधे पर कुदाल रखता है वह बंदूक भी उठा सकता है. यह चेतावनी देता है कि यदि ऐसा कुछ भी होता है, तो इसके लिए राजनीति जिम्मेदार होगी.

दो दिन बाद, हिम्मत संधू द्वारा गाए गए गीत 'असी वड्डंगे' (हम काट देंगे) को यूट्यूब पर अपलोड किया गया. जिसे अब तक 46 लाख बार देखा गया, यह गीत सरकार को चेतावनी देता है कि हम (किसान) हर उस अजनबी पैर को काट देंगे जो उनके खेत में आएगा. यह गीत मनी लेंडर्स के बारे में भी बताता है और सरकार पर कमीशन एजेंटों की नकारात्मक भूमिका के साथ किसानों को 'खत्म' करने की कोशिश का आरोप लगाता है.

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सिंगर आर नाइत द्वारा गाया गया गाना जिसे 29 सितंबर को Youtube पर अपलोड किया गया. गाना में लिखा गया है कि 'दिल्ली आ पंजाब नाल पंगे ठीक नहीं' इसे 24 लाख से अधिक बार देखा गया है. यह कहता है कि नई दिल्ली पंजाब को उकसाने की कोशिश कर रही है और जब किसान लाठियां उठाते हैं तो उन्हें आतंकवादी करार दिया जाता है. नए वीडियो गाने लगातार जारी किए जा रहे हैं. गायक नए गीतों के साथ सामने आ रहे हैं. 

कंवर ग्रेवाल द्वारा गाया गया गाना 'ऐलान' गीत, जिसे 10 अक्टूबर को यूट्यूब पर अपलोड किया गया था, अब तक 16 मिलियन से अधिक बार देखा जा चुका है। यह किसान मार्च के बारे में बात करता है, जो नई दिल्ली को परेशान करेगा और कहता है कि प्रदर्शनकारियों को 80 साल के किसानों द्वारा आशीर्वाद दिया जाता है, जिनका हौसला आसमान से आता है. इसमें ये भी कहा गया है कि फसलों के बारे में फैसला किसानों को खुद करना होगा, किसी और को नहीं. कंवर ग्रेवाल और हरफ चीमा द्वारा 21 नवंबर को यूट्यूब पर अपलोड किया गया वीडियो गाना 'पेचा' वायरल हो रहे नए गीतों में से एक है. यह किसानों को अपने ट्रैक्टरों के साथ मार्च करने के लिए कहता है. 

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