पहले लेफ्ट का गढ़ जीता और अब कांग्रेस ने रचा सबसे बड़ा चक्रव्यूह... समझें केरलम में कैबिनेट का गणित

केरलम में कांग्रेस की अगुवाई वाले यूडीएफ ने दस साल से सत्ता पर काबिज लेफ्ट के नेतृत्व वाली एलडीएफ को मात देकर सरकार बना ली है. वीडी सतीशन सीएम बने तो साथ में 20 मंत्री बनाए गए हैं, जिनके जरिए कांग्रेस ने जातीय और धार्मिक समीकरण के साथ केरलम का क्षेत्रीय बैलेंस बनाने का दांव चला.

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केरलम में बनी कांग्रेस सरकार ने मंत्रिमंडल के जरिए चला बड़ा दांव (Photo-PTI) केरलम में बनी कांग्रेस सरकार ने मंत्रिमंडल के जरिए चला बड़ा दांव (Photo-PTI)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 18 मई 2026,
  • अपडेटेड 12:28 PM IST

केरलम में एक दशक के लंबे इंतजार के बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने सत्ता में वापसी किया. तिरुवनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में कांग्रेस नेता वीडी सतीशन ने सोमवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. सतीशन के साथ 20 नेताओं को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई. मंत्रिमंडल के जरिए सामाजिक और धार्मिक समीकरण साधने के साथ-साथ क्षेत्रीय बैलेंस बनाने का दांव चला है. 

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वीडी सतीशन के अगुवाई में यूडीएफ सरकार का गठन हो गया है. सीएम सहित 21 सदस्यीय मंत्रिमंडल का गठन किया गया है.  यूडीएफ गठबंधन के सभी दलों को उचित प्रतिनिधित्व दिया गया है . 'इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग' (IUML) को 5 मंत्री पद और 'केरल कांग्रेस' के विभिन्न गुटों (जोसेफ और जैकब गुट) और आरएसपी से एक-एक मंत्री बनाए गए हैं. 

मुख्यमंत्री वीडी सतीशन और कांग्रेस आलाकमान ने केरलम में जो टीम चुनी है, वह सिर्फ मंत्रियों के फेहरिश्त नहीं, बल्कि दक्षिण भारत के इस दुर्ग को सुरक्षित बनाए रखने के लिए एक सोचा-समझा 'सोशल इंजीनियरिंग' का मॉडल है. 

केरलम सरकार में कौन-कौन बना मंत्री
केरलम की नई सरकार में कौन-कौन मंत्री बनेगा, इसे लेकर तीन दिन तक चर्चा चली. इसके बाद मंत्रिमंडल के लिए नाम पर फाइनल मोहर लगी और सोमवार को सीएम सहित 21 मंत्रियों को शपथ दिलाई गई. सतीशन के साथ शपथ लेने वाले मंत्रियों में कांग्रेस कोटे से 11 मंत्री बनाए गए हैं. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला,के मुरलीधरन और कांग्रेस के केरलम प्रदेश अध्यक्ष सन्नी जोसेफ हैं. इसके अलावा कांग्रेस से एपी अनिल कुमार, पीसी विष्णुनाथ, टी सिद्दीकी, बिंदु कृष्णा, केए थुलसी, रोजी एम जॉन,एम लिजू और ओजे जनीश मंत्री बने हैं. 

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इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) कोटे से सतीशन सरकार में पांच मंत्री बने हैं, जिसमें पीके कुन्हालीकुट्टी,पीके बशीर, एन शमसुद्दीन, केएम शाजी और वीई अब्दुल गफूर ने मंत्री पद की शपथ ली. यूडीएफ के अन्य सहयोगी दलों से चार मंत्री बनाए गए हैं, जिसमें केरल कांग्रेस (जोसेफ) से मोंस जोसेफ, केरल कांग्रेस (जैकब) से अनूप जैकब, आएसपी से शिबू बेबी जॉन और सीएमपी से सीपी जॉन मंत्री बने हैं. 

मंत्रिमंडल में जातीय और धार्मिक समीकरण
वीडी सतीशन की अगुवाई में बनी यूडीएफ सरकार में मंत्रिमंडल के जरिए केरलम के  सामाजिक, धार्मिक और जातीय संतुलन को साधने की कवायद की गई है. सतीशन के मंत्रिमंडल में सीएम सहित 9 हिंदू समाज से मंत्री हैं. इसके अलावा 6 मुस्लिम और 5 ईसाई चेहरों को कैबिनेट में जगह दी गई है. 

हिंदू मतदाताओं और अलग-अलग जातिगत समीकरणों को साधने के लिए सवर्ण (नायर), पिछड़े (ईझावा) और अनुसूचित जाति (SC) समुदायों को इस तरह प्रतिनिधित्व दिया गया है. केरलम की सबसे प्रभावी माने जाने वाले नायर समुदाय से मुख्यमंत्री वीडी सतीशन के अलावा तीन मंत्री बनाए गए हैं. चार सवर्ण जाति से मंत्री बने हैं और चारो ही नायर समाज से हैं. 

केरल का सबसे बड़ा हिंदू पिछड़ा वर्ग, जो राजनीतिक रूप से बहुत मजबूत है. ओबीसी से दो मंत्री बनाए गए हैं, जिसमें ईझावा समाज से दो मंत्री बने हैं. इसमें बिंदु कृष्णा और एम लिजू हैं. इसके अलावा ओबीसी के ओजे जनीश को मंत्री बनाया गया है, जो विश्वकर्मा जाते से आते हैं. कैबिनेट में दो दलित चेहरे शामिल किया गया है, जिसमें अनिल कुमार और केए थुलसी हैं. 

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'मलबार' से 'त्रावणकोर' तक साधा समीकरण
केरल की राजनीति हमेशा से भौगोलिक रूप से कई हिस्सों में बंटी रही है. इस बार कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF ने उत्तर से लेकर दक्षिण केरल तक भौगोलिक संतुलन साधने की पुरजोर कोशिश की है. उत्तरी और मध्य केरल के साथ सियासी बैलैंस बनाने का दांव चला है. मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन खुद मध्य केरल (एर्नाकुलम) का प्रतिनिधित्व करते हैं.

वहीं, उत्तरी केरल (मलबार क्षेत्र), जहां UDF ने इस बार शानदार प्रदर्शन किया है, जिसके चलते मंत्रिमंडल में भारी तरजीह मिली है. केपीसीसी (KPCC) अध्यक्ष सनी जोसेफ (पेरावूर-कन्नूर) और टी. सिद्दीकी (वायनाड) को शामिल कर पार्टी ने मलबार के दुर्ग को और मजबूत किया है. दक्षिणी केरल (त्रावणकोर और कोच्चि) के दिया खास तवज्जे. दक्षिण केरल से रमेश चेन्नितला (हरिपाद), पी.सी. विष्णुनाथ और एम लिजू जैसे कद्दावर और युवा चेहरों को लाकर पार्टी ने पुराने त्रावणकोर क्षेत्र में अपनी पकड़ को री-बैलेंस किया है.

अगड़े-पिछड़े हिंदू समुदायों के साथ तालमेल
मुख्यमंत्री वीडी सतीशन खुद नायर समुदाय से आते हैं. उनके साथ कांग्रेस के सबसे अनुभवी नेताओं में से एक रमेश चेन्नितला (नायर) और के मुरलीधरन को कैबिनेट में लाकर पार्टी ने प्रभावशाली नायर समुदाय को बड़ा संदेश दिया है. वहीं, ईझावा और अन्य पिछड़े वर्गों (OBC) को मंत्रिमंडल में तीन मंत्री बनाए हैं. इस तरह से प्रतिनिधित्व देकर पार्टी ने यह सुनिश्चित किया है कि बहुसंख्यक हिंदू मतदाता उनसे न छिटके. दलित और वंचित तबके की आवाज बुलंद करने वाले दो मंत्रियों को जगह दी है.एपी अनिल कुमार और के.ए. थुलसी जैसे चेहरों को कैबिनेट में जगह दी गई है.

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मुस्लिम प्रतिनिधित्व और सहयोगी दलों का सम्मान
केरल में मुस्लिम मतदाता UDF का मजबूत आधार रहे हैं. इस समीकरण को साधने की पूरी जिम्मेदारी मुख्य रूप से इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के कंधों पर रही है. UDF सरकार में IUML को 5 कैबिनेट पद दिए गए हैं, जिसमें पी.के. कुन्हालीकुट्टी, एन शमसुद्दीन और केएम शाजी जैसे कद्दावर नाम शामिल हैं. कांग्रेस ने अपने कोटे से भी टी सिद्दीकी को मंत्री बनाकर मुस्लिम समुदाय में अपनी खुद की पैठ बनाए रखने का प्रयास किया है. कांग्रेस ने केरलम के मुस्लिम वोटों पर अपनी पकड़ बनाए रखने की कवायद है.

ईसाई समुदाय को साधे रखने की कवायद
मध्य केरल में ईसाई (क्रिश्चियन) वोट बैंक को अपने पाले में बनाए रखना कांग्रेस के लिए हमेशा से अहम रहा है. प्रदेश अध्यक्ष सनी जोसेफ और रोजी एम जॉन (अंगमाली) के जरिए कांग्रेस ने कैथोलिक और अन्य ईसाई गुटों को प्रतिनिधित्व दिया. इसके अलावा, सहयोगी दल 'केरल कांग्रेस (जोसेफ)'  के मोंस जोसेफ और 'केरल कांग्रेस (जैकब)' के अनूप जैकब को कैबिनेट में शामिल कर ईसाई बेल्ट में अपनी पकड़ को और पुख्ता किया है. कांग्रेस ने इसाई समुदाय से पांच मंत्री बनाए हैं, जो कि केरलम की राजनीतिक समीकरण में फिट बैठते हैं.

केरलम अनुभव और युवा जोश का फ्यूजन
केरलम में सतीशन के अगुवाई में बनी सरकार के मंत्रिमंडल की सबसे बड़ी खासियत है 'अनुभव और युवा पीढ़ी का संगम'. 21 सदस्यीय मंत्रिमंडल में 14 नेताओं को पहली बार मंत्री बनाया गया है और 7 नेता ऐसे हैं, जो पहले मंत्री रह चुके हैं. एक तरफ रमेश चेन्नितला, पीके कुन्हालीकुट्टी और के मुरलीधरन जैसे दिग्गज हैं जिनके पास प्रशासन का लंबा अनुभव है, तो दूसरी तरफ पीसी विष्णुनाथ, रोजी एमजॉन, एम लिजू और ओजे जनीश जैसे युवा और ऊर्जावान चेहरे हैं.

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युवा और अनुभवी नेताओं का बैलेंस दिखाता है कि कांग्रेस सिर्फ आज की सरकार चलाने के लिए नहीं,बल्कि भविष्य के लिए एक नई लीडरशिप तैयार कर रही है.इसके साथ ही विधायी संतुलन बनाने के लिए वरिष्ठ नेता तिरुवनंतूर राधाकृष्णन को विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) और शनीमोल उस्मान को उपाध्यक्ष (डिप्टी स्पीकर) की कमान सौंपी गई है. महिलाओं और युवाओं को तरजीह देने के लिए बिंदू कृष्णा और के.ए. थुलसी की एंट्री कैबिनेट में कराई गई है.

वीडी सतीशन के नेतृत्व में गठित केरल का यह नया मंत्रिमंडल इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि कांग्रेस अब चुनावी गणित और जमीनी हकीकत को बेहतर ढंग से समझने लगी है. गुटबाजी से ऊपर उठकर जाति, धर्म, क्षेत्र और उम्र के पैमानों पर जो संतुलन इस 20 सदस्यीय टीम में साधा गया है, उसने एलडीएफ (LDF) के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने और यूडीएफ के अपने पुराने किले को अभेद्य बनाने की एक ठोस नींव रख दी है. 

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