'एक पीढ़ी यहां रहना नहीं चाहती', छात्रों के पलायन पर केरल विधानसभा में विपक्ष ने जमकर किया हंगामा

कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ ने छात्रों के पलायन की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताई. हंगामे के बीच सत्र समाप्त हुआ और विपक्ष स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा के प्रस्ताव को अस्वीकार किए जाने के बाद विधानसभा से बाहर चले गए. वहीं शिक्षामंत्री ने आरोपों का खंडन किया.

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केरल विधानसभा में विपक्ष और सरकार के बीच हंगामा हुआ (फाइल फोटो) केरल विधानसभा में विपक्ष और सरकार के बीच हंगामा हुआ (फाइल फोटो)

शिबिमोल

  • तिरुवनंतपुरम,
  • 11 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 3:59 PM IST

केरल विधानसभा में गुरुवार को उच्च शिक्षा के लिए बड़ी संख्या में छात्रों के पलायन को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच तीखी बहस हुई. कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ ने छात्रों के पलायन की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताई. हंगामे के बीच सत्र समाप्त हुआ और विपक्ष स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा के प्रस्ताव को अस्वीकार किए जाने के बाद विधानसभा से बाहर चले गए.

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चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक मैथ्यू कुझलनादन ने इस मामले पर चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव पेश किया. मैथ्यू कुझलनादन ने कहा कि हर साल पलायन करने वाले छात्रों की संख्या बढ़ रही है और यह सच्चाई हमारे सामने है. 

उन्होंने कहा, 'ईश्वर के अपने देश में एक पीढ़ी यहां रहना नहीं चाहती. किशोरों की मानसिकता है कि कोई भी देश मेरे राज्य से बेहतर है. इसे नकारने का कोई मतलब नहीं है. इसके पीछे सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक कारण हैं. हम उन्हें स्वतंत्र वातावरण प्रदान करने में सक्षम नहीं हैं, क्योंकि वे उदार और सुसंस्कृत वातावरण में रहना चाहते हैं.'

मैथ्यू ने कहा कि केरल में शहरी बेरोजगारी दर देश में सबसे अधिक है. 

उच्च शिक्षा मंत्री आर बिंदू ने एक जवाब में कहा कि उच्च शिक्षा के लिए छात्रों का राज्य से बाहर जाना कोई अपराध नहीं है. उन्होंने कहा, "यह वैश्वीकरण का समय है. यह कोई नई बात नहीं है. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, नेहरू और अंबेडकर ने देश के बाहर पढ़ाई की थी. हम विदेशों से भी छात्रों को आकर्षित करके केरल को वैश्विक केंद्र बनाने का प्रयास कर रहे हैं. केरल में उच्च शिक्षा के लिए सुविधाओं की कोई कमी नहीं है."

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विपक्ष के नेता वीडी सतीशन ने उच्च शिक्षा मंत्री की आलोचना की और कहा कि उन्होंने एक महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दे को महत्वहीन बना दिया है. उन्होंने बताया कि केरल में दस विश्वविद्यालय कुलपति के बिना चल रहे हैं और कई कॉलेजों में प्रिंसिपल की कमी है. सतीशन ने दावा किया कि कई डिग्री और स्नातकोत्तर सीटें खाली हैं. उन्होंने पिछली पिनाराई विजयन सरकार पर घटिया स्व-वित्तपोषित कॉलेजों को मंजूरी देने का आरोप लगाया, जिसके कारण उन्हें बंद करना पड़ा.

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