कांग्रेस नेता अलका लांबा की बढ़ी मुश्किलें, 22 महीने पुराने मामले में दोषी करार

अलका लांबा को दिल्ली की अदालत ने 2024 के जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में दोषी करार दिया है. अदालत ने कहा कि अलका लांबा ने सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी नहीं निभाई. उन्हें सरकारी कार्य में बाधा, पुलिस पर हमला और सार्वजनिक मार्ग अवरुद्ध करने सहित कई धाराओं में दोषी ठहराया गया है.

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कोर्ट के फैसले पर अलका लांबा ने कहा कि मैं डरने वाली नहीं हूं (File Photo- PTI) कोर्ट के फैसले पर अलका लांबा ने कहा कि मैं डरने वाली नहीं हूं (File Photo- PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 26 मई 2026,
  • अपडेटेड 12:25 AM IST

दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को महिला कांग्रेस अध्यक्ष अलका लांबा को 2024 में जंतर-मंतर पर एक विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट और सरकारी काम में बाधा डालने के मामले में दोषी करार दिया है. अदालत ने कहा कि एक जिम्मेदार नागरिक होने के बावजूद लांबा ने निषेधाज्ञा की अनदेखी की और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने में विफल रहीं.

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यह मामला 29 जुलाई 2024 को जंतर-मंतर पर महिला आरक्षण के समर्थन में आयोजित प्रदर्शन से जुड़ा है. अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार की अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि उस समय इलाके में बीएनएसएस की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू थी. इसके बावजूद अलका लांबा ने अपने समर्थकों के साथ संसद की ओर मार्च किया, पुलिस बैरिकेड तोड़े और नारेबाजी की.

अभियोजन के अनुसार प्रदर्शनकारियों ने संसद का घेराव करने की कोशिश की, पुलिसकर्मियों को धक्का दिया और फ्री चर्च के पास सार्वजनिक मार्ग को अवरुद्ध कर दिया. अदालत में पेश पुलिस गवाहों ने बयान दिया कि अलका लांबा लगातार प्रदर्शनकारियों को संसद की ओर बढ़ने के लिए उकसा रही थीं और घेराव का आह्वान कर रही थीं.

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक अदालत ने अपने फैसले में कहा कि पुलिस ने लाउडस्पीकर के जरिए कई बार धारा 163 लागू होने की घोषणा की थी, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी को नजरअंदाज करते हुए बैरिकेड पार किए और सुरक्षाकर्मियों को धक्का दिया. अदालत ने माना कि अलका लांबा का उद्देश्य प्रदर्शन को निर्धारित सीमा और समय से आगे बढ़ाना था.

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फैसले में कहा गया कि अलका लांबा और अन्य प्रदर्शनकारियों की कार्रवाई से पुलिसकर्मियों को अपने कर्तव्य निभाने में बाधा पहुंची और आम जनता को भी परेशानी हुई. अदालत ने कहा कि आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं.

मामले में पुलिस द्वारा रिकॉर्ड किए गए वीडियो फुटेज को इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के रूप में पेश किया गया. जांच में यह भी सामने आया कि प्रदर्शन की अनुमति महिला कांग्रेस के पदाधिकारियों द्वारा मांगी गई थी.

4 जून को कोर्ट में तय होगी सजा

अदालत ने अलका लांबा को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी करार दिया है, जिनमें सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी से रोकने के लिए हमला करना, पुलिस कार्रवाई में बाधा डालना, सरकारी आदेश की अवहेलना करना और सार्वजनिक मार्ग अवरुद्ध करना शामिल है. अदालत ने सजा पर बहस के लिए अगली सुनवाई 4 जून तय की है. इस मामले में उन्हें अधिकतम दो साल तक की सजा हो सकती है.

कोर्ट के फैसले पर क्या बोलीं अलका

राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले पर अलका लांबा ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि मुझे ऐसा ही होने की उम्मीद थी. यह जुलाई 2024 का मामला है, जब मॉनसून सत्र चल रहा था और महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर मैं और मेरी सभी बहनें अपने संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही थीं. हम महिलाओं के लिए आरक्षण और सुरक्षा लागू करने की मांग कर रहे थे.

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उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान ही मामले में दबाव में आकर पुलिस ने मेरे खिलाफ FIR और चार्जशीट दायर की. आज पता चला कि मुझे दोषी पाया गया है कि मेरा अपराध था कि मैंने महिलाओं की आवाज कैसे उठाई. मैं डरने वाली नहीं हूं. यह महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ा मामला है. महिलाओं की सुरक्षा को लेकर पूरे देश में अफरा-तफरी मची हुई है और लोग मदद के लिए गुहार लगा रहे हैं. अगर हम इसके लिए लड़ते हैं, तो हमें ही दोषी ठहरा दिया जाता है.

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