मणिपुर में क्यों उठ रही 'अलग प्रशासन' की मांग? BJP के 7 विधायक भी सपोर्ट में आए तो CM ने साफ किया रुख

सीएम एन बीरेन सिंह ने कहा कि कुछ गलतफहमियों, निहित स्वार्थों की कार्रवाइयों और देश को अस्थिर करने की विदेशी साजिश के कारण राज्य में कीमती जान-माल का नुकसान हुआ है. उन्होंने सभी से हिंसा रोकने और राज्य में पहले की तरह शांति और तरक्की को वापस लाने का आग्रह किया.

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मणिपुर में कुकी समुदाय के विधायकों ने अलग प्रशासन की मांग की है (फाइल फोटो) मणिपुर में कुकी समुदाय के विधायकों ने अलग प्रशासन की मांग की है (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • इम्फाल ,
  • 18 अगस्त 2023,
  • अपडेटेड 6:17 PM IST

मणिपुर पिछले 100 से ज्यादा दिन से हिंसा की चपेट में है. अब यहां अलग प्रशासन की मांग उठने लगी है. पिछले दिनों कुकी विधायकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूर्वोत्तर राज्य के कुकी बहुल पहाड़ी इलाकों के लिए एक अलग प्रशानस यानी मुख्य सचिव और डीजीपी की मांग की थी. इसे लेकर मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने भी अपना रुख साफ कर दिया है. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर कोई खुलकर बोल सकता है, सभी इसके हकदार हैं. 

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बता दें कि बीजेपी के 7 विधायकों सहित 10 कुकी विधायकों ने पिछले बुधवार को पीएम मोदी को एक ज्ञापन सौंपा था. इसमें अनुरोध किया गया था कि राज्य के पांच पहाड़ी जिलों में "कुशल प्रशासन" सुनिश्चित करने के लिए अलग से "मुख्य सचिव और डीजीपी के समकक्ष पद" स्थापित किए जाएं. जिन पांच जिलों के लिए उन्होंने यह मांग उठाई है, वे चुराचांदपुर, कांगपोकपी, चंदेल, टेंग्नौपाल और फेरज़ावल हैं.

सद्भावना दिवस के अवसर पर एक कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने कहा कि  लोकतंत्र में हर किसी को स्वतंत्र रूप से बोलने का अधिकार है. इस समारोह में कई विधायक मौजूद थे. सीएम एन बीरेन सिंह ने कहा था कि कुछ गलतफहमियों, निहित स्वार्थों की कार्रवाइयों और देश को अस्थिर करने की विदेशी साजिश के कारण राज्य में कीमती जान-माल का नुकसान हुआ है. उन्होंने सभी से हिंसा रोकने और राज्य में पहले की तरह शांति और तरक्की को वापस लाने का आग्रह किया.

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विधायकों का दावा- अधिकारी काम करने में असमर्थ

कुकी विधायकों ने अपने ज्ञापन में दावा किया कि जनजातियों से संबंधित IAS, MCS, IPS और MPS अधिकारी काम करने और अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में असमर्थ हैं. इसके साथ ही कुकी विधायकों ने राज्य में तीन महीने से चले आ रहे जातीय संघर्ष के कारण अपने घर और आजीविका खो चुके समुदाय के लोगों के पुनर्वास के लिए प्रधानमंत्री राहत कोष से 500 करोड़ रुपये की भी मांग की है. इससे पहले 10 विधायकों ने पीएम मोदी से मणिपुर के आदिवासी इलाकों के लिए अलग प्रशासन बनाने का आग्रह किया था.

इंफाल क्यों नहीं जाना चाहते कुकी अधिकारी?

बता दें कि केंद्र सरकार मणिपुर में कुकी समुदाय की मांग के आधार पर अलग प्रशासन स्थापित करने के मूड में नहीं है. वहीं, सत्तारूढ़ बीजेपी के 7 विधायकों सहित 10 विधायकों ने कुकी बहुल 5 जिलों के लिए मुख्य सचिव (सीएस) और डीजीपी के समान पदों के सृजन की मांग की है, क्योंकि उनकी जनजाति का कोई भी सरकारी अधिकारी इंफाल वापस नहीं जाना चाहता है, उन्होंने कहा कि वह मौत की घाटी के रूप में तब्दील हो चुका है.

किन जिलों के लिए अलग प्रशासन की मांग?

कुकी समुदाय के विधायकों ने सुझाव दिया कि 5 पहाड़ी जिलों - चुराचांदपुर, कांगपोकपी, चंदेल, तेंगनौपाल और फेरज़ावल के कुशल प्रशासन के लिए वरिष्ठ स्तर के पद सृजित किए जाने चाहिए.

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क्या है नागा विधायकों का कहना?

इसी बीच एनएससीएन (I-M) ने मणिपुर के 8 नागा विधायकों की आलोचना की, जिन्होंने 32 मैतेई विधायकों के साथ मिलकर पीएम मोदी को पत्र लिखा था और कहा था कि उनके ज्ञापन का नागा लोगों की राजनीतिक आकांक्षाओं से कोई लेना-देना नहीं है. हिंसा प्रभावित मणिपुर के 40 विधायकों ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर कुकी उग्रवादी समूहों के साथ युद्धविराम समझौते को वापस लेने और राज्य में NRC लागू करने की मांग की. साथ ही ये भी कहा कि कुकी समूहों की ओर से की गई "अलग प्रशासन" की मांग पूरी तरह से अस्वीकार्य है. 

 

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