'मुआवजे के लिए कोई दबाव नहीं...', AI171 प्लेन क्रैश पर विजय रूपाणी की बेटी के दावे पर एयरलाइन का जवाब

पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की बेटी ने टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन को पत्र लिखकर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने पूछा कि विमान क्रैश की जांच पूरी होने से पहले पीड़ित परिवारों से फुल एंड फाइनल सेटलमेंट दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराने की कोशिश क्यों की जा रही है. इस पर एयर इंडिया की तरफ से सफाई आई है.

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राधिका मिश्रा ने अपने पत्र में चार मांगें की हैं (File Photo: PTI) राधिका मिश्रा ने अपने पत्र में चार मांगें की हैं (File Photo: PTI)

अमित भारद्वाज

  • नई दिल्ली,
  • 10 जून 2026,
  • अपडेटेड 5:03 PM IST

एयर इंडिया के विमान AI-171 हादसे को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की बेटी राधिका मिश्रा ने टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन को एक भावुक पत्र लिखा है. इस पत्र में उन्होंने हादसे के शिकार हुए परिवारों की तरफ से पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करते हुए टाटा समूह की मुआवजा नीति पर गंभीर सवाल उठाए हैं. इस मामले में अब एयर इंडिया ने भी अपनी सफाई पेश की है.

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दरअसल, राधिका मिश्रा ने अपने पत्र में लिखा था कि वे यह चिट्ठी किसी गुस्से में नहीं, बल्कि गहरे दुख और उन परिवारों की चिंता में लिख रही हैं, जिनकी जिंदगी एआई-171 त्रासदी के बाद हमेशा के लिए बदल गई. 

उन्होंने टाटा संस के चेयरमैन से सीधे तौर पर पूछा, 'आधिकारिक जांच रिपोर्ट आने और हादसे से जुड़े तथ्यों के पूरी तरह सामने आने से पहले ही पीड़ित परिवारों से फुल एंड फाइनल सेटलमेंट डॉक्यूमेंट्स पर साइन करने के लिए क्यों कहा जा रहा है? सच सामने आने से पहले ही अंतिम रिलीज दस्तावेज हासिल करने की यह कोशिश क्यों हो रही है?'

अपने पत्र में उन्होंने टाटा संस और एयर इंडिया से चार प्रमुख मांगें भी रखीं-

1. सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाए कि क्या परिवार भविष्य के कानूनी अधिकारों का त्याग किए बिना सहायता प्राप्त कर सकते हैं.

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2. सभी जांच पूरी होने से पहले व्यापक ब्रॉड रिलीज एंड इंडेम्निटी प्रावधानों के इस्तेमाल पर दोबारा विचार किया जाए.

3. यह सुनिश्चित हो कि किसी भी परिवार को तत्काल वित्तीय सहायता और सच्चाई की तलाश में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर या दबाव में न महसूस करना पड़े.

4. जब तक त्रासदी से जुड़े सारे तथ्य सामने नहीं आ जाते, तब तक कानूनी अंतिम रूप के बजाय करुणा और जवाबदेही को प्राथमिकता दी जाए.

पत्र का एयर इंडिया ने दिया जवाब

'आजतक' के हाथ लगी जानकारी के मुताबिक, एयर इंडिया ने इन आरोपों और चिंताओं पर अपना पक्ष रखा है. कंपनी ने कहा कि एआई-171 त्रासदी से प्रभावित परिवारों के दुख को वह पूरी तरह समझती है और किसी भी परिवार या व्यक्ति पर मुआवजे का प्रस्ताव स्वीकार करने के लिए कोई समय-सीमा या दबाव नहीं डाला जा रहा है.

एयर इंडिया के मुताबिक, परिवार चाहें तो जांच रिपोर्ट आने तक इंतजार कर सकते हैं और कुछ परिवारों ने ऐसा करने का विकल्प चुना भी है. कंपनी ने स्पष्ट किया कि दुर्घटना की जांच स्वतंत्र एजेंसी एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) कर रही है और एयर इंडिया को यह जानकारी नहीं है कि रिपोर्ट कब जारी होगी.

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कंपनी ने बताया कि अक्टूबर 2025 में अंतरिम मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया काफी हद तक पूरी होने के बाद अंतिम मुआवजे की प्रक्रिया शुरू की गई थी और तभी परिवारों को क्लेम फॉर्म भेजे गए थे. तब से केवल उन्हीं परिवारों के साथ बातचीत जारी है जिन्होंने कंपनी से संवाद करना चाहा.

RDI दस्तावेज पर भी दिया ये जवाब

मुआवजे के लिए साइन कराए जा रहे रसीद, डिस्चार्ज और क्षतिपूर्ति (RDI) दस्तावेज की भाषा पर राधिका मिश्रा की आशंकाओं को समझते हुए एयर इंडिया ने कहा कि यह भाषा अंतरराष्ट्रीय और भारतीय एयरलाइंस द्वारा ऐसे मामलों में अपनाए जाने वाले सामान्य तौर-तरीकों जैसी ही है.

कंपनी ने दावा किया कि उसका किसी तीसरे पक्ष को कानूनी जिम्मेदारी से बचाने का कोई इरादा नहीं है. यह प्रावधान केवल इसलिए रखा गया है ताकि अंतिम मुआवजा समझौते वास्तव में अंतिम रहें और भविष्य में एयर इंडिया के खिलाफ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष दावे न किए जाएं.

एयर इंडिया ने दोहराया कि जो परिवार जांच रिपोर्ट का इंतजार करना चाहते हैं, वे ऐसा करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं और जो परिवार अंतिम मुआवजा स्वीकार करना चाहते हैं, उन्हें भी यह विकल्प उपलब्ध है. वहीं, टाटा समूह द्वारा स्थापित एआई-171 मेमोरियल एंड वेलफेयर ट्रस्ट के जरिए हादसे में अपनों को खोने वाले लगभग सभी परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये की अनुग्रह सहायता राशि भी दी जा चुकी है.

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