तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय की सरकार ने 13 मई 2026 को विधानसभा में अपना बहुमत साबित किया था. इस दौरान, AIADMK के 25 विधायकों ने पार्टी लाइन से आगे जाकर TVK सरकार के समर्थन में वोट दे दिया था. इसके बाद, अब विधायकों पर संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत उनकी योग्यता पर सवाल खड़े हो गए हैं.
कानूनी जानकारों का कहना है कि AIADMK महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ही पार्टी के अधिकृत व्हिप तय करने का अधिकार रखते हैं. सुप्रीम कोर्ट के सुभाष देसाई बनाम महाराष्ट्र राज्य मामले का भी हवाला दिया जा रहा है.
इस फैसले में कहा गया था कि व्हिप नियुक्त करने का अधिकार राजनीतिक दल के पास होता है, विधायक दल के पास नहीं.
कुछ विधायकों को मंत्री पद का ऑफर
मुख्यमंत्री विजय इन विधायकों में से कुछ को मंत्री बनाने पर विचार कर रहे हैं. संविधान के अनुच्छेद 164(1-B) के मुताबिक, जब तक कोई विधायक आधिकारिक रूप से अयोग्य घोषित नहीं होता, तब तक उसे मंत्री बनने से नहीं रोका जा सकता. यानी स्पीकर का फैसला आने से पहले ये विधायक मंत्री बन सकते हैं.
हालांकि, इस मुद्दे पर राजनीतिक और कानूनी बहस तेज हो गई है. कई जानकारों का कहना है कि यह कदम तकनीकी रूप से सही हो सकता है, लेकिन संवैधानिक नैतिकता और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ माना जाएगा.
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VCK सांसद की 'चेतावनी'
इस मामले में VCK सांसद रविकुमार ने भी मुख्यमंत्री विजय और TVK सरकार को चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि बागी विधायकों को मंत्री बनाना राजनीतिक नियमों के खिलाफ होगा. रविकुमार का कहना है कि इन विधायकों को पहले अपनी विधानसभा सीट से इस्तीफा देना चाहिए, फिर आधिकारिक रूप से TVK में शामिल होकर उपचुनाव लड़ना चाहिए. उनका मानना है कि जनता से दोबारा जनादेश लेना ही सबसे सही और साफ रास्ता होगा.
नागार्जुन