ISRO के पूर्व वैज्ञानिक नंबी नारायणन के जासूसी केस की CBI करेगी जांच

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व वैज्ञानिक नंबी नारायणन को 1994 के फर्जी जासूसी में फंसाने वाले जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ जांच सीबीआई करेगी. सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को यह फैसला सुनाया.

Advertisement
ISRO के पूर्व वैज्ञानिक नंबी नारायणन (File Photo- PTI) ISRO के पूर्व वैज्ञानिक नंबी नारायणन (File Photo- PTI)

अनीषा माथुर

  • नई दिल्ली,
  • 15 अप्रैल 2021,
  • अपडेटेड 12:30 PM IST
  • जैन कमेटी की रिपोर्ट पर SC का फैसला
  • CBI को तीन महीने में सौंपनी होगी रिपोर्ट

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व वैज्ञानिक नंबी नारायणन को 1994 के फर्जी जासूसी में फंसाने वाले जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ सीबीआई जांच का आदेश हुआ है. सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को यह फैसला सुनाया. कोर्ट ने सीबीआई को तीन महीने का समय दिया है यानी तीन महीने के अंदर सीबीआई को अपनी जांच पूरी करके रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को देनी है.

Advertisement

सुप्रीम कोर्ट ने फर्जी जासूसी केस में नंबी नारायण को फंसाने वाले जिम्मेदार अफसरों की 'चूक और कमीशन के कृत्यों' की जांच के लिए कमेटी बनाई है. सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिया कि जैन कमेटी रिपोर्ट को शुरुआती जांच रिपोर्ट मानते हुए इस मामले की जांच की जाए. रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा.

2018 में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) डी के जैन की अध्यक्षता में 14 सितंबर, 2018 को तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था और केरल सरकार को नारायणन के ‘घोर अपमान’ के लिए उन्हें 50 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया था. समिति ने हाल में अपनी रिपोर्ट सौंपी है.

फैसले पर ये बोले नंबी नारायण
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नंबी नारायण ने कहा कि सीबीआई जांच एक बड़ी सफलता है, लेकिन मेरे पास कहने को कुछ नहीं है, जब तक मैं जैन कमेटी की रिपोर्ट नहीं देख लेता, तब तक कोई टिप्पणी नहीं कर सकता हूं, रिपोर्ट में कुछ ऐसा होगा, जिसे वे (सुप्रीम कोर्ट) सार्वजनिक नहीं करना चाहते हैं.

Advertisement

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि तमिलनाडु से ताल्लुक रखने वाले एयरोस्पेस इंजीनियर नंबी नारायणन इसरो के सायरोजेनिक्स विभाग के प्रमुख थे, जब वो एक जासूसी कांड में फंसे. नवंबर 1994 में नंबी नारायणन पर आरोप लगा था कि उन्होंने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम से जुड़ी कुछ गोपनीय सूचनाएं विदेशी एजेंटों से साझा की थीं.

नंबी नारायणन को 1994 में केरल पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था. वह स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन बनाने में लगे थे. उन पर स्वदेशी तकनीक विदेशियों को बेचने का आरोप लगाया गया. बाद में CBI जांच में यह पूरा मामला झूठा निकला. 1998 में खुद के बेदाग साबित होने के बाद नारायणन ने उन्हें फंसाने वाले पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए लंबी लड़ाई लड़ी.

इस मामले को सुनते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में उन्हें 50 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया. साथ ही, उन्हें जासूसी के झूठे आरोप में फंसाने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई पर विचार के लिए पूर्व जज जस्टिस डी के जैन को नियुक्त किया. नंबी नारायण पर ही 'रॉकेट्री- द नंबी इफेक्ट' फिल्म बनाई गई है, जिसमें उनका रोल आर माधवन कर रहे हैं.

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »