सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष बोले- फ्री में किसानों का केस लड़ने को तैयार

किसानों की संघर्ष समिति के सदस्यों की बैठक के बाद सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष और एडवोकेट दुष्यंत दवे ने शुक्रवार को कहा, 'यदि वे (किसान) किसी भी मामले को हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लड़ना चाहते हैं तो मैं उनके लिए मुफ्त में केस लड़ने को तैयार हूं. मैं किसानों के साथ खड़ा हूं.'

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SCBA के अध्यक्ष और एडवोकेट दुष्यंत दवे (ANI) SCBA के अध्यक्ष और एडवोकेट दुष्यंत दवे (ANI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 05 दिसंबर 2020,
  • अपडेटेड 8:40 AM IST
  • मैं किसानों के साथ खड़ा हूंः SCBA के अध्यक्ष दुष्यंत दवे
  • किसानों और सरकार के बीच पांचवें दौर की बातचीत आज
  • किसान संगठन आज देशभर में पीएम मोदी का पुतला जलाएंगे

कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलनरत हैं और सरकार के साथ पांचवें दौर की बातचीत से पहले किसानों ने बड़ा ऐलान किया कि आज शनिवार को किसान संगठन प्रधानमंत्री का पुतला फूंकेंगे. साथ ही 8 दिसंबर को भारत बंद का आह्वान भी किया है. इस बीच सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा कि वे किसानों के लिए मुफ्त में केस लड़ने को तैयार हैं.

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किसानों की संघर्ष समिति के सदस्यों की बैठक के बाद सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष और एडवोकेट दुष्यंत दवे ने शुक्रवार को कहा, 'यदि वे (किसान) किसी भी मामले को हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लड़ना चाहते हैं तो मैं उनके लिए मुफ्त में केस लड़ने को तैयार हूं. मैं किसानों के साथ खड़ा हूं.'

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष के इस प्रस्ताव का एडवोकेट एचएस फूलका ने कहा कि हम दुष्यंत दवे के शुक्रगुजार हैं कि उन्होंने किसानों की कानूनी रूप से मदद करने की पेशकश की. सरकार को सोचना चाहिए कि जब देश के वरिष्ठ वकील ही कह रहे हैं कि ये कानून किसानों के हित में नहीं हैं तो सरकार को इस बारे में सोचना चाहिए. 

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इस बीच भारतीय किसान यूनियन (BKU-Lakhowal) के महासचिव, एचएस लखोवाल ने शुक्रवार को कहा कि शनिवार को देशभर में पीएम नरेंद्र मोदी के पुतले जलाए जाएंगे. हमने 8 दिसंबर को भारत बंद का आह्वान भी किया है.  

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दिल्ली सिंधु बॉर्डर पर डेरा डाले अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हन्नान मोल्लाह ने कहा कि केंद्र का कोई भी संशोधन स्वीकार नहीं किया जाएगा. इसे सिर्फ पंजाब आंदोलन बोलना सरकार की साजिश है, मगर आज किसानों ने दिखाया कि ये आंदोलन पूरे भारत में हो रहा है और आगे भी होगा. इसलिए हमने फैसला लिया है कि अगर सरकार कोई संशोधन रखेगी तो हम संशोधन स्वीकार नहीं करेंगे.

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