जंतर-मंतर प्रोटेस्ट केस में अलका लांबा दोषी, 'नेकचलनी' की शर्त पर कोर्ट ने दी रिहाई

जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में महिला कांग्रेस अध्यक्ष अलका लांबा को राउज एवेन्यू कोर्ट ने दोषी ठहराते हुए राहत दी है. कोर्ट ने उन्हें एक साल तक नेकचलनी बनाए रखने की शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया है. एक लाख रुपए का जमानती बॉन्ड भरने को भी कहा गया है.

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सरकारी काम में बाधा से लेकर रास्ता रोकने तक के आरोप साबित, लेकिन कोर्ट से मिली राहत. (File Photo: ITG) सरकारी काम में बाधा से लेकर रास्ता रोकने तक के आरोप साबित, लेकिन कोर्ट से मिली राहत. (File Photo: ITG)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 06 जून 2026,
  • अपडेटेड 3:47 PM IST

पिछले साल नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के मामले में महिला कांग्रेस अध्यक्ष अलका लांबा को राउज एवेन्यू कोर्ट से राहत मिली है. हालांकि अदालत ने उन्हें दोषी करार दिया है, लेकिन सजा सुनाने के बजाय एक साल तक अच्छे व्यवहार यानी नेकचलनी की शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया है. उनको एक लाख रुपए का जमानती बॉन्ड भरने का भी निर्देश दिया गया है.

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यह मामला जुलाई 2024 में जंतर-मंतर पर आयोजित उस प्रदर्शन से जुड़ा है, जिसका नेतृत्व स्वयं अलका लांबा ने किया था. महिला कांग्रेस ने उस दौरान महिला आरक्षण कानून को लागू करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था. पुलिस के मुताबिक प्रदर्शन के दौरान निषेधाज्ञा का उल्लंघन हुआ, सरकारी कर्मचारियों को ड्यूटी करने से रोका गया. सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हुई.

राउज एवेन्यू कोर्ट ने इससे पहले 25 मई को अलका लांबा को दोषी ठहराया था. उन पर सरकारी कर्मचारियों के साथ धक्का-मुक्की करने, सरकारी कामकाज में बाधा पहुंचाने, कानूनी आदेशों की अवहेलना करने और सार्वजनिक रास्ता रोकने जैसे आरोप लगाए गए थे. अदालत ने उन्हें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 132, 221, 223(a) और 285 के तहत दोषी माना था.

दोषी ठहराए जाने के बाद अलका लांबा ने अदालत से प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट की धारा 4 के तहत राहत की मांग की थी. उन्होंने अनुरोध किया था कि उन्हें अच्छे व्यवहार के आधार पर रिहा किया जाए. उनकी ओर से अधिवक्ता एम. जेड. खान और इमरान अली ने अदालत में पक्ष रखा. इसके बाद ACJM अश्विनी पंवार ने अभियोजन पक्ष को जवाब दाखिल करने का समय दिया था.

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इस मामले को 6 जून के लिए सूचीबद्ध किया गया था. शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने अलका लांबा की अर्जी स्वीकार कर ली. कोर्ट ने माना कि दोष सिद्ध होने के बावजूद उन्हें एक अवसर दिया जा सकता है. इसी आधार पर उन्हें एक वर्ष तक नेकचलनी बनाए रखने की शर्त पर रिहा किया गया. इस अवधि में कानून उल्लंघन की स्थिति में उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है.

18 अप्रैल को कोर्ट ने दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज चार्जशीट के आधार पर अलका लांबा का बयान दर्ज किया था. इससे पहले अदालत उनके खिलाफ आरोप तय कर चुकी थी. अदालत ने चार्जशीट पर संज्ञान लेने के बाद उन्हें समन भी जारी किया था. 14 जनवरी को अदालत ने उनके खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय किए थे. उस समय अलका ने आरोपों से इनकार किया था.

इसके बाद मुकदमे का सामना करने की इच्छा जताई थी. वहीं 19 दिसंबर को कोर्ट ने कहा था कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर पहली नजर में उनके खिलाफ मामला बनता है. इस बीच अलका लांबा ने आरोप तय किए जाने के आदेश को चुनौती दी थी. उन्होंने कोर्ट में रिवीजन याचिका दाखिल की, लेकिन 6 फरवरी को स्पेशल जज दिग विनय सिंह ने याचिका खारिज कर दी.

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