राकेश टिकैत का ऐलान- अब गुजरात में मजबूत करेंगे आंदोलन, चरखा चलाकर कंपनियों को भगाएंगे

भारतीय किसान यूनियन के राकेश टिकैत का कहना है कि जल्द वो गुजरात का दौरा करेंगे और किसान आंदोलन को मजबूत करने का काम करेंगे. दिल्ली की सीमाओं के अलावा अब अलग-अलग राज्यों में किसान महापंचायत का आयोजन किया जा रहा है.

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चरखा चलाते किसान नेता राकेश टिकैत (PTI) चरखा चलाते किसान नेता राकेश टिकैत (PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 फरवरी 2021,
  • अपडेटेड 9:37 AM IST
  • कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन अब भी जारी
  • राकेश टिकैत बोले- गुजरात में किसानों को जोड़ेंगे

कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसान आंदोलन की अगुवाई अब किसान नेता राकेश टिकैत करते दिख रहे हैं. भारतीय किसान यूनियन के राकेश टिकैत लंबे वक्त से सुर्खियों में हैं, और अब उन्होंने ऐलान किया है कि कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने के लिए वो गुजरात का भी दौरा करेंगे.

राकेश टिकैत ने रविवार को कहा कि गुजरात, महाराष्ट्र से कई किसान लगातार दिल्ली बॉर्डर पर जारी आंदोलन का हिस्सा बने हुए हैं. ऐसे में अब वो इन राज्यों में जाकर किसान आंदोलन को मजबूत करने की कोशिश करेंगे. 

नए कृषि कानूनों की आलोचना करते हुए राकेश टिकैत बोले कि नए कानूनों से किसानों का भला नहीं होने वाला है, आज जो दूध गांव में 20-22 रुपये प्रति लीटर मिलता है, वही शहरों में 50 रुपये लीटर तक बिकता है. इसी तरह अगर खेती प्राइवेट कंपनियों के हाथ में आएंगी, तो फसलों के दाम भी इसी तरह तय होंगे.

गुजरात से आए किसानों ने रविवार को राकेश टिकैत को चरखा सौंपा. राकेश टिकैत ने कहा कि चरखा चलाकर गांधीजी ने अंग्रेजों को बाहर भेजा, हम भी चरखा चलाकर कंपनियों को बाहर भेजेंगे. हम गुजरात में जाकर किसानों को इकट्ठा करने का काम करेंगे.

बता दें कि दिल्ली की सीमाओं पर जारी किसानों के आंदोलन को करीब 3 महीने हो गए हैं. बीते कुछ दिनों से अब देश के अलग-अलग हिस्सों में किसान महापंचायतों का आयोजन किया जा रहा है. यूपी, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब के बाद अब ये गूंज बंगाल तक भी पहुंच गई है. साथ ही अब राकेश टिकैत ने गुजरात, महाराष्ट्र में भी ऐसी ही सभाओं की बात कही है.

गौरतलब है कि भारत सरकार और किसान संगठनों के बीच अभी तक 11 दौर की चर्चा हुई है. सरकार ने इन कानूनों को कुछ वक्त तक टालने की बात कही है, लेकिन किसान कानूनों को रद्द करने की मांग पर अड़े हैं. यही कारण है कि अभी कुछ वक्त से दोनों पक्षों में बातचीत रुकी हुई है. 

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