Explainer: राजीव गांधी फाउंडेशन का लाइसेंस रद्द करने के पीछे सरकार ने क्या आधार बताया, किन क्षेत्रों के कामों पर असर होगा?

राजीव गांधी फाउंडेशन पर साल 2020 में विदेशी फंडिंग का आरोप लगा था, जिसके बाद गृह मंत्रालय ने एक जांच कमेटी बनाई और उसकी रिपोर्ट के आधार पर अब फाउंडेशन का लाइसेंस रद्द करने का फैसला लिया गया है. फाउंडेशन की एक सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2005-06 में फाउंडेशन को पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की सरकार और चीनी दूतावास से दो अलग-अलग दानदाताओं से दान मिला. 

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राजीव गांधी फाउंडेशन पर MHA की कार्रवाई राजीव गांधी फाउंडेशन पर MHA की कार्रवाई

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 25 अक्टूबर 2022,
  • अपडेटेड 1:52 PM IST

Rajiv Gandhi Foundation Registration Cancelled: केंद्र सरकार ने बीते रविवार यानी 23 अक्टूबर को गांधी परिवार से जुड़े एक गैर सरकारी संगठन पर बड़ी कार्रवाई की. जिसमें गृह मंत्रालय ने राजीव गांधी फाउंडेशन (RGF) का FCRA लाइसेंस रद्द कर दिया. गृह मंत्रालय ने ये कार्रवाई फॉरेन कन्ट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट (Foreign Contribution (Regulation) Act) के तहत की. जिसमें संगठन पर विदेशी फंडिंग कानून के कथित उल्लंघन का आरोप है.

गृह मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक, जुलाई 2020 मे MHA ने मंत्रालय के अंदर जांच कमेटी बनाई थी, उसकी रिपोर्ट के आधार पर ये फैसला लिया गया. इस जांच कमेटी में MHA, ईडी, सीबीआई और इनकम टैक्स के अधिकारी शामिल थे. ऐसे में माना जा रहा है कि यह फाउंडेशन जिन जिन क्षेत्रों में काम कर रहा था, उन सभी क्षेत्रों पर रद्द का असर देखने को मिल सकता है. 

इन क्षेत्रों में किया फाउंडेशन ने काम?

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फाउंडेशन की ऑफिश‍ियल वेबसाइट rgfindia.org पर दी गई जानकारी के अनुसार 1991 से 2009 तक फाउंडेशन ने स्वास्थ्य, साक्षरता, स्वास्थ्य, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, महिला और बाल विकास, निःशक्तजनों को सहायता, पंचायती राज संस्थाओं, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, और पुस्तकालयों समेत कई मुद्दों पर काम किया है. फाउंडेशन पर कार्रवाई को लेकर हाल ही में अपने एक बयान में कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा था कि भारत के लोग जानते हैं कि राजीव गांधी फाउंडेशन 1991 में राजीव गांधी की दुखद हत्या के बाद स्थापित किया गया था, जो निम्नलिखित विचारों के लिए खड़े थे:   

(1) सद्भावना, सभी भारतीयों और अन्य राष्ट्रों के साथ, 
(2) आईटी और दूरसंचार सहित विज्ञान और प्रौद्योगिकी का उपयोग करके भारत का समावेशी और सतत विकास, 
(3) पंचायत, जिला और नगरपालिका स्तरों पर महिलाओं और युवाओं और स्थानीय स्वशासन का सशक्तिकरण, 
(4) प्राकृतिक आपदाओं, बाढ़, सूखा, हिंसा और विकलांग लोगों से प्रभावित लोगों को राहत. 

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कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि आरजीएफ अपनी स्थापना के समय से ही भारत के विभिन्न हिस्सों में विकास कार्यक्रमों के माध्यम से इन विचारों को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहा है. इन ट्रस्टों के कार्यक्रमों से बच्चों, युवाओं, महिलाओं और विकलांगों सहित लाखों लोग लाभान्वित हुए हैं. ऐसे में साफ़ है कि फाउंडेशन को रद्द किये जाने के बाद ऐसे सभी क्षेत्रों पर असर पड़ सकता है, जहां फाउंडेशन की टीम काम कर रही है. 

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने साधा बीजेपी पर निशाना

हालांकि अपने इस बयान के अलावा जयराम रमेश ने केंद्र की कार्रवाई को जनता का ध्यान भटकाने के लिए उठाया गया कदम बताया. उन्होंने कहा कि यह जनता से जुड़े मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए की गई कार्रवाई है. जयराम रमेश ने कहा कि बढ़ती महंगाई, बढ़ती बेरोजगारी और डॉलर के मुकाबले गिरते रुपये की वजह से अर्थव्यवस्था गहरे संकट में है. भारत जोड़ो यात्रा को जनता से अच्छी प्रतिक्रिया मिली है. ऐसे में ये सब साजिशन किया जा रहा है.

विवादों के घेरे में RGF

यह पहली बार नहीं है जब राजीव गांधी फाउंडेशन विवादों के घेरे में है. बल्कि इससे पहले भी इस पर सवाल भी उठते रहे हैं और आरोप भी लगते रहे हैं. जून 2020 में बीजेपी ने फाउंडेशन पर विदेशी फंडिंग का आरोप लगाया था. तत्कालीन कानून मंत्री और बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद ने दावा किया था कि चीन ने राजीव गांधी फाउंडेशन के लिए फंडिंग की है. एक कानून है जिसके तहत कोई भी पार्टी बिना सरकार की अनुमति के विदेश से पैसा नहीं ले सकती. कांग्रेस स्पष्ट करे कि इस डोनेशन के लिए क्या सरकार से मंजूरी ली गई थी?

उन्होंने दावा किया था कि राजीव गांधी फाउंडेशन के लिए 2005-06 की डोनर की सूची है. इसमें चीन के एम्बेसी ने डोनेट किया- ऐसा साफ लिखा है. ऐसा क्यों हुआ? क्या जरूरत पड़ी? इसमें कई उद्योगपतियों, पीएसयू का भी नाम है. क्या ये काफी नहीं था कि चीन एम्बेसी से भी रिश्वत लेनी पड़ी. उन्होंने दावा किया कि चीन से फाउंडेशन को 90 लाख की फंडिंग की गई. बता दें कि फाउंडेशन की एक सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2005-06 में फाउंडेशन को पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की सरकार और चीनी दूतावास से दो अलग-अलग दानदाताओं से दान मिला. 

बताते चलें कि पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी RGF की अध्यक्ष हैं. जबकि अन्य ट्रस्टियों में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम और राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा शामिल हैं.


 

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