राजीव गांधी हत्याकांड के दोषी पेरारिवलन को राहत, SC ने दिया रिहाई का आदेश

राजीव गांधी हत्याकांड के दोषी रहे एजी पेरारिवलन को सुप्रीम कोर्ट ने रिहा करने का आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने आर्टिकल 142 का इस्तेमाल करते हुए उसकी रिहाई का आदेश दिया है.

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राजीव गांधी हत्याकांड में एजी पेरारिवलन 30 साल से जेल में बंद है. (फाइल फोटो) राजीव गांधी हत्याकांड में एजी पेरारिवलन 30 साल से जेल में बंद है. (फाइल फोटो)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 18 मई 2022,
  • अपडेटेड 1:04 PM IST
  • 30 साल से ज्यादा समय से जेल में बंद था पेरारिवलन
  • राजीव गांधी हत्याकांड में 7 दोषी पाए गए थे
  • 21 मई 1991 को हुई थी राजीव गांधी की हत्या

राजीव गांधी हत्याकांड के दोषी एजी पेरारिवलन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने एजी पेरारिवलन की रिहाई का आदेश दिया है. अदालत ने जेल में अच्छे बर्ताव के कारण उसे रिहा करने का आदेश दिया है. 

जस्टिस एल नागेश्वर की बेंच ने आर्टिकल 142 का इस्तेमाल करते हुए उसे रिहा करने का आदेश दिया है. पेरारिवलन 30 साल से ज्यादा लंबे वक्त से जेल में बंद था.

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आर्टिकल 142 सुप्रीम कोर्ट को अपने समक्ष किसी भी लंबित मामले या किसी भी मामले में इंसाफ के लिए जरूरी आदेश पारित करने का अधिकार देता है.

इससे पहले 9 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने एजी पेरारिवलन को जमानत दे दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने उसे अच्छे बर्ताव के कारण जमानत दी थी. साथ ही ये भी कहा था कि पेरारिवलन जब भी पैरोल पर बाहर आया, तब भी उसकी कोई शिकायत नहीं आई थी. 

47 साल के पेरारिवलन ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी. इसी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रही थी. याचिका में मांग की गई थी कि जब तक मल्टी डिसिप्लीनरी मॉनिटरिंग एजेंसी जांच कर रही है, तब तक उसकी उम्रकैद की सजा को रोक दिया जाए.

21 मई को हुई थी राजीव गांधी की हत्या

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21 मई 1991 को एक चुनावी रैली के दौरान तमिलनाडु में एक आत्मघाती हमले में राजीव गांधी की हत्या कर दी गई थी. इस मामले में पेरारिवलन समेत 7 लोगों को दोषी पाया गया था. टाडा अदालत और सुप्रीम कोर्ट ने पेरारिवलन को मौत की सजा सुनाई थी. 

बाद में दया याचिका की सुनवाई में देरी की वजह से पेरारिवलन की मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया गया था. इसके बाद तमिलनाडु सरकार ने उसकी उम्रकैद को भी खत्म कर रिहा करने के लिए एक रेजोल्यूशन पास किया था.

इधर, CM एमके स्टालिन ने कहा कि 32 साल से जेल में बंद पेरारिवलन को सुप्रीम कोर्ट ने रिहा कर दिया है. यह राज्य की भी बड़ी जीत है. इस फैसले ने न केवल मानवाधिकारों को बल्कि राज्य के अधिकारों को भी बरकरार रखा है. आगे उन्होंने कहा कि राज्यपाल को राज्य के मामलों में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है. राज्यपाल को राज्य के निर्णयों के लिए केंद्र से पूछने की आवश्यकता नहीं है.

टाइमलाइन से समझें 

21 मई, 1991: पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की रात 10.20 बजे श्रीपेरंबदूर (Sriperumbudur) में हत्या कर दी गई.

24 मई, 1991: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के एक विशेष जांच दल (एसआईटी) को जांच सौंपी गई.

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11 जून 1991: सीबीआई ने 19 वर्षीय एजी पेरारिवलन को गिरफ्तार किया. उस पर टाडा के तहत मामला दर्ज किया गया था.

28 जनवरी 1998: टाडा कोर्ट ने नलिनी और पेरारीवलन समेत 26 आरोपियों को मौत की सजा सुनाई.

11 मई, 1999: सुप्रीम कोर्ट ने मुरुगन, संथान, पेरारिवलन और नलिनी सहित चार की मौत की सजा को बरकरार रखा. तीन अन्य को उम्रकैद की सजा दी और 19 अन्य मौत के दोषियों को मुक्त किया. टाडा प्रावधानों को भी मामले से हटा दिया गया.

अप्रैल 2000: तमिलनाडु के तत्कालीन राज्यपाल ने राज्य कैबिनेट की सिफारिश के आधार पर नलिनी की मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया.

2001: संथान, मुरुगन और पेरारिवलन सहित तीन मौत के दोषियों ने भारत के राष्ट्रपति को अपनी दया याचिका सौंपी.

11 अगस्त 2011: तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने 11 साल बाद उनकी दया याचिका खारिज की.

अगस्त 2011: मौत के तीन दोषियों को 9 सितंबर, 2011 को फांसी दी जानी थी. मद्रास हाई कोर्ट ने फांसी के आदेश पर रोक लगा दी. तत्कालीन मुख्यमंत्री जयललिता ने एक प्रस्ताव भी पारित किया, जिसमें मौत की सजा को कम करने की मांग की गई थी.

2015: पेरारिवलन ने तमिलनाडु के राज्यपाल को दया याचिका सौंपी और संविधान के अनुच्छेद-161 के तहत रिहाई की मांग की. बाद में, राज्यपाल से कोई जवाब नहीं मिलने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया.

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अगस्त 2017: तमिलनाडु सरकार ने पेरारिवलन को पैरोल दी.

9 सितंबर, 2018: तत्कालीन मुख्यमंत्री पलानीस्वामी की अध्यक्षता में तमिलनाडु मंत्रिमंडल ने सभी सात दोषियों को रिहा करने की सिफारिश की.

9 मार्च, 2022: सुप्रीम कोर्ट ने पेरारिवलन को जमानत दी.

11 मई 2022: सुप्रीम कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रखा.

18 मई 2022: 31 साल बाद पेरारिवलन के रिहाई का आदेश हुआ.

(इनपुट- Kanu Sarda)

 

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