सावरकर मानहानि मामला: पुणे अदालत ने राहुल गांधी को जारी किया समन, 23 अक्टूबर को होगी सुनवाई

पिछले वर्ष, सावरकर के भतीजे सात्यकि सावरकर ने पुणे की अदालत में इस संबंध में राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी. पिछले महीने, यह मामला न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (FMFC) अदालत से सांसदों और विधायकों के विशेष न्यायालय में स्थानांतरित किया गया था.

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राहुल गांधी को पुणे कोर्ट ने भेजा नोटिस राहुल गांधी को पुणे कोर्ट ने भेजा नोटिस

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 05 अक्टूबर 2024,
  • अपडेटेड 11:52 AM IST

पुणे की एक विशेष अदालत ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को विनायक दामोदर सावरकर के भतीजे द्वारा दायर की गई एक आपराधिक मानहानि मामले में समन जारी किया है. इस मामले में आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी ने हिंदुत्व विचारक सावरकर के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की है. अदालत ने शुक्रवार को गांधी को समन जारी करते हुए 23 अक्टूबर को अदालत में पेश होने के लिए कहा है.

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पिछले वर्ष, सावरकर के भतीजे सात्यकि सावरकर ने पुणे की अदालत में इस संबंध में राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी. पिछले महीने, यह मामला न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (FMFC) अदालत से सांसदों और विधायकों के विशेष न्यायालय में स्थानांतरित किया गया था.

सात्यकि सावरकर के वकील संग्राम कोल्हटकर ने पीटीआई को बताया कि सांसदों और विधायकों के विशेष न्यायालय ने, जो संयुक्त सिविल जज और न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) अमोल शिंदे की अध्यक्षता में है, राहुल गांधी के खिलाफ समन जारी किया है. अदालत ने कहा है कि उनकी मौजूदगी जरूरी है ताकि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 500 (मानहानि) के तहत एक आरोप का जवाब दिया जा सके, और उन्हें 23 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना है. 

सात्यकि सावरकर ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि राहुल गांधी ने मार्च 2023 में लंदन में दिए गए एक भाषण में दावा किया था कि विनायक सावरकर ने एक पुस्तक में लिखा था कि उन्होंने और उनके पांच-छह दोस्तों ने एक मुस्लिम व्यक्ति की पिटाई की थी और सावरकर को इससे खुशी हुई थी. सात्यकि सावरकर ने कहा कि ऐसी कोई घटना कभी हुई ही नहीं और सावरकर ने ऐसी कोई बात कहीं भी नहीं लिखी. उन्होंने गांधी के आरोप को "कल्पित, झूठा और दुर्भावनापूर्ण" बताया.

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अदालत ने पुलिस से आरोपों की जांच करने और रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा था. विश्रांबाग पुलिस स्टेशन ने इस मामले की जांच की और कहा कि शिकायत में प्रारंभिक सत्यता है.

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