कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. गुवाहाटी हाईकोर्ट ने असम के मुख्यमंत्री की पत्नी की शिकायत पर दर्ज एफआईआर में उन्हें अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया. अब पवन खेड़ा को आत्मसमर्पण कर अपनी रिहाई के लिए नियमित जमानत की अर्जी दाखिल करनी होगी, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट पहले ही राहत देने से इनकार कर चुका है.
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने पवन खेड़ा और अन्य पक्षकारों की दलीलें सुनने के बाद 21 अप्रैल को उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिया था.
बता दें कि पवन खेड़ा ने 5 अप्रैल को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा पर गंभीर आरोप लगाए थे. खेड़ा का दावा था कि उनके पास एक से अधिक पासपोर्ट हैं और विदेशों में संपत्तियां भी हैं, जिनका उल्लेख चुनावी हलफनामे में नहीं किया गया.
इन आरोपों को सरमा परिवार ने पूरी तरह खारिज करते हुए उन्हें झूठा बताया. इसके बाद रिनिकी भुइयां सरमा की शिकायत पर गुवाहाटी क्राइम ब्रांच में खेड़ा के खिलाफ कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया.
मामला दर्ज होने के बाद असम पुलिस की एक टीम दिल्ली स्थित खेड़ा के आवास पर पूछताछ के लिए पहुंची, लेकिन वह वहां मौजूद नहीं मिले.
पुलिस ने घर की तलाशी ली और कुछ आपत्तिजनक सामग्री मिलने का दावा किया. इस बीच, मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि बिना जांच के आरोप लगाए गए हैं, और पुलिस खेड़ा को जल्द ढूंढ निकालेगी.
वहीं, पवन खेड़ा ने एक वीडियो संदेश जारी कर पलटवार किया. उन्होंने कहा कि केवल सवाल पूछे गए थे, लेकिन सरकार जवाब देने के बजाय पुलिस का इस्तेमाल कर रही है. उन्होंने कहा वह पुलिस कार्रवाई से डरते नहीं हैं.
सृष्टि ओझा / संजय शर्मा