नीति आयोग की बैठक में नहीं आए नीतीश, जदयू नेता केसी त्यागी ने बतायी वजह

यह पहली बार नहीं है कि सीएम नीति आयोग की बैठक में शामिल नहीं हो रहे हैं. वह इसके पहले भी गवर्निंग काउंसिल की बैठक में शामिल नहीं हुए थे और बिहार का प्रतिनिधित्व तत्कालीन डिप्टी सीएम ने किया था. इस बार भी दोनों उपमुख्यमंत्री बैठक में शामिल हुए.

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बिहार के सीएम नीतीश कुमार नीति आयोग गवर्निंग काउंसिल की बैठक में नहीं पहुंचे. (ANI Photo) बिहार के सीएम नीतीश कुमार नीति आयोग गवर्निंग काउंसिल की बैठक में नहीं पहुंचे. (ANI Photo)

रोहित कुमार सिंह / अमित भारद्वाज / आलोक कुमार जायसवाल

  • नई दिल्ली,
  • 27 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 2:06 PM IST

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शनिवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई नीति आयोग गवर्निंग काउंसिल की 9वीं बैठक में शामिल नहीं हुए. अधिकारियों ने बताया कि इस बैठक में बिहार का प्रतिनिधित्व उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा ने किया. इस महत्वपूर्ण बैठक में नीतीश कुमार की अनुपस्थिति का कारण तुरंत पता नहीं चल सका है.

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यह पहली बार नहीं है कि सीएम नीति आयोग की बैठक में शामिल नहीं हो रहे हैं. वह इसके पहले भी गवर्निंग काउंसिल की बैठक में शामिल नहीं हुए थे और बिहार का प्रतिनिधित्व तत्कालीन डिप्टी सीएम ने किया था. इस बार भी दोनों उपमुख्यमंत्री बैठक में शामिल हुए. इसके अलावा, बिहार से चार केंद्रीय मंत्री नीति आयोग के सदस्य हैं और वे सभी बैठक में उपस्थित रहे. जेडीयू महासचिव केसी त्यागी ने इस मुद्दे पर कहा, 'मुख्यमंत्री व्यक्तिगत कारणों से बैठक में शामिल नहीं हो सके. इसके पीछे कोई राजनीतिक कारण नहीं है. हम तो बजट और नीति आयोग की बैठक से उत्साहित हैं.

नीतीश कुमार के नीति आयोग की बैठक में शामिल न होने पर भाजपा सांसद और केंद्रीय मंत्री संजय सेठ ने कहा, 'हमें जानकारी नहीं है कि नीतीश कुमार क्यों नहीं आए. एनडीए की मुठ्ठी बंद है. एनडीए मजबूत है.' बता दें कि नीति आयोग की नौवीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक में भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के उद्देश्य से 'विकसित भारत@2047' दस्तावेज पर चर्चा की गई. नीति आयोग की सर्वोच्च संस्था गवर्निंग काउंसिल में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल और कई केंद्रीय मंत्री शामिल हैं.

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ममता बनर्जी ने लगाया माइक बंद करने का आरोप

विपक्षी दलों में से सिर्फ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ही बैठक में शामिल हुईं. वह बीच में ही मीटिंग छोड़कर बाहर निकल गईं और केंद्र पर अपने राज्य के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया. उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, 'मैंने बैठक का बहिष्कार किया है. चंद्रबाबू नायडू को बोलने के लिए 20 मिनट दिए गए, असम, गोवा, छत्तीसगढ़ के सीएम ने 10-12 मिनट तक बात की. मुझे सिर्फ पांच बाद ही रोक दिया गया. यह गलत है. विपक्ष की ओर से, सिर्फ मैं यहां प्रतिनिधित्व कर रही थी, और इस बैठक में इसलिए भाग ले रही थी क्योंकि को-ऑपरेटिव फेडरलिज्म को मजबूत करने में मेरी अधिक रुचि है. नीति आयोग के पास कोई वित्तीय शक्तियां नहीं हैं, यह कैसे काम करेगा? इसे वित्तीय ताकत दें या योजना आयोग को वापस लाएं. मैंने अपना विरोध दर्ज कराया और मैं बाहर आ गई.'

केंद्र सरकार के सूत्र बोले- ममता के आरोप निराधार

केंद्र सरकार के सूत्रों ने ममता बनर्जी के आरोपों का खंडन किया है. सूत्रों ने कहा, 'यह दावा कि नीति आयोग की 9वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री का माइक्रोफोन बंद कर दिया गया था, सही नहीं है. क्लॉक ने केवल यह दिखाया कि उनके बोलने का समय समाप्त हो गया है. यहां तक ​​कि इसे चिह्नित करने के लिए अलार्म भी नहीं बजाया गया. अल्फाबेटिकली उनकी बारी दोपहर के भोजन के बाद आती. पश्चिम बंगाल सरकार के आधिकारिक अनुरोध पर उन्हें 7वें स्पीकर के रूप में शामिल किया गया, क्योंकि उन्हें जल्दी लौटना था.'

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