'देश अलग, भेष अलग, फिर भी हम एक', गडकरी ने सुनाया ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर खामेनेई से मुलाकात का किस्सा

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने शिपिंग मिनिस्टर चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट को याद किया. उन्होंने कहा कि तब खामेनेई ने मुझसे पूछा था, 'आपको पता है कि पर्शियन भाषा कहां से आई है.'

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नितिन गडकरी ने ईरान दौरों का किया जिक्र (Photo: ITG) नितिन गडकरी ने ईरान दौरों का किया जिक्र (Photo: ITG)

योगेश पांडे

  • नागपुर,
  • 06 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 4:24 PM IST

ईरान में जारी जंग के बीच केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अयातुल्लाह अली खामेनेई के साथ हुई मुलाकात का किस्सा सुनाया है. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी ने कहा कि मैं जब अयातुल्लाह अली खामेनेई साहब से मिलने गया था, तब उन्होंने मुझसे एक प्रश्न पूछा. खामेनेई साहब ने मुझसे पूछा कि आपको पता है पर्शियन भाषा कहां से आई है?

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उन्होंने कहा कि मुझे तब ये नहीं पता था. नितिन गडकरी ने कहा कि मेरे यह बोलने के बाद कि मुझे नहीं पता, खामेनेई साहब ने बताया कि पर्शियन भाषा संस्कृत से आई है. संस्कृत ही हमारी मूल भाषा है. उन्होंने कहा कि ईरान की यूनिवर्सिटी में संस्कृत का विभाग है. नितिन गडकरी ने कहा कि अयातुल्लाह अली खामेनेई ने फिर पूछा कि हम कहां के हैं, आपको पता है. वह खुद ही बताए कि लखनऊ के पास के गांव का हमारा ओरिजिन है.

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उन्होंने कहा कि अलग भाषा, अलग भेष, फिर भी हमारा एक देश. नितिन गडकरी ने यह किस्सा सोमवार को बीजेपी के स्थापना दिवस पर नागपुर में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए सुनाया. नितिन गडकरी ने अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान की जारी जंग की भी चर्चा की और कहा कि जब शिपिंग मंत्री था, तब ईरान में चाबहार करके एक पोर्ट था. चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट के सिलसिले में सात से आठ बार ईरान गया था.

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नितिन गडकरी ने कहा कि ईरान स्पेशल फ्लाइट से जाता था. उन्होंने कहा कि तब मुझे पता चला कि जहां तक पाकिस्तान है, जहां सिंधु नदी का उद्गम हुआ, उसके भी आगे जाकर आर्य संस्कृति का उद्गम हुआ. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सिंधु नदी के उद्गम से भी आगे जाकर हमारा रिश्ता था.

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