महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद में दोनों राज्य अमित शाह की क्यों नहीं सुन रहे? :आज का दिन, 28 दिसंबर

अमित शाह के मध्यस्थता कराने के बावजूद कर्नाटक-महाराष्ट्र सीमा विवाद क्यों नहीं सुलझ रहा, कांग्रेस की ओर क्यों बढ़ा महबूबा और फारूक का झुकाव और किस आधार पर हुआ है T20 सीरीज़ के लिए इंडियन क्रिकट टीम का चयन? सुनिए 'आज का दिन' में.

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सूरज कुमार / ख़ुशबू कुमार

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  • 28 दिसंबर 2022,
  • अपडेटेड 8:41 AM IST

महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद पिछ्ले एक महीने से सुर्खियों में है. बहस की शुरुआत हुई जब कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने महाराष्ट्र के 40 गांवों पर अपना दावा किया. जवाब में महाराष्ट्र ने दावे को ख़ारिज किया. उसके बाद से बयानबाजी जारी है. मामला बढ़ा तो गृह मंत्री अमित शाह को हस्तक्षेप करना पड़ा और तय हुआ कि जब तक सुप्रीम कोर्ट का फैसला न आ जाए, दोनों राज्य इसपर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे. लगा कि मामला अब शांत होगा, लेकिन हुआ इसके ठीक उलट. कर्नाटक विधानसभा में विधेयक पारित हुआ जिसमें सरकार ने महाराष्ट्र-कर्नाटक बॉर्डर के पास बसे 865 गांव के संरक्षण की बात कही, बेलगाम, खानपुर, निप्पनी, कारवार, नंदगाड़ जैसे गांव भी शामिल हैं जो कि मराठी भाषी हैं. अब महाराष्ट्र हमेशा से मराठी माषा को लेकर काफी संवेदनशील रहा है और ये कल दिखा भी जब महाराष्ट्र विधानसभा में भी एक विधेयक पास हुआ जिसमें ये बात कही गई कि महाराष्ट्र हर हाल में बेलगांव, कारवार, निपानी शहर के साथ 865 गांव को हासिल करेगा. विपक्ष नेता उद्ध ठाकरे ने तो ये भी कह दिया है कि जब तक मामला कोर्ट में है तब तक उन गांवों को केंद्र शासित प्रदेश घोषित कर दिया जाए.

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अगर विवाद की जड़ में जाएं तो 1956 में भाषाई आधार पर राज्यों का जब पुनर्गठन हुआ तो महाराष्ट्र के कुछ नेताओं ने मराठी भाषी बेलगावी सिटी, खानपुर, निप्पनी, कारवार, नंदगाड़ को महाराष्ट्र का हिस्सा बनाने की मांग की थी.  मामले ने तूल पकड़ा तो केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश मेहर चंद महाजन के नेतृत्व में 1966 में एक आयोग का गठन किया था. अमित शाह ने दोनों राज्यों से शांति बनाए रखने को कहना था वो दिख क्यों नहीं रही? 'आज का दिन' में सुनने के लिए करें. 
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भारत जोड़ो यात्रा अगले महीने जम्मू-कश्मीर में होगी. कांग्रेस ने विपक्ष के नेताओं को यात्रा में शामिल होने का निमंत्रण दिया था. एक ओर जहां सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, आरएलडी नेता जयंत चौधरी ने व्यस्तता का हवाला देकर यात्रा में आने से मना कर दिया तो इसी बीच नेशनल कांफ्रेंस अध्यक्ष फारूख़ अब्दुल्ला और पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने यात्रा में शामिल होने की हामी भर दी है. इसके साथ ही महबूबा मुफ्ती का ये बयान आया कि राहुल गांधी बीजेपी के खिलाफ ये यात्रा कर रहे हैं इसलिए वो इसका हिस्सा ज़रूर बनेगीं. हालांकि उनके इस डिसिजन पर कई कयासबाजियां भी शुरु हो गई हैं. महबूबा मुफ्ती और फारूक अब्दुल्ला गुपकार अलायंस के हिस्से हैं. अब जम्मू-कश्मीर में परिसीमन हो चुका है, जल्द ही चुनाव का ऐलान भी हो सकता है, तो क्या ऐसे में सवाल ये है कि क्या भारत जोड़ो यात्रा में फारुक और महबूबा का शामिल होना दोनों नेताओं के सॉफ्ट कॉर्नर को दिखा रहा है कांग्रेस की ओर, क्या वो बीजेपी के खिलाफ राज्य में कांग्रेस का साथ चाह रही है? 'आज का दिन' में सुनने के लिए करें. 

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अगले साल अक्टूबर से वर्ल्ड कप शुरु होने वाला है. लिहाज़ा कौन कौन भारतीय टीम का हिस्सा हो सकता है, इसको लेकर कयासबाजी चल रही है और इसी बीच श्रीलंका के खिलाफ जनवरी में होने वाले वनडे और टी-20 सीरीज के लिए टीम अनाउंस हो गई. वनडे की कमान रोहित के पास ही रहेगी मगर टी-20 में उन्हें आराम दिया गया है जिसके बाद कप्तानी हार्दिक पांड्या के पास रहेगी. खास बात ये है कि टी-20 टीम में शिवम मावी को मौका दिया गया है जिन्होंने पिछले 5 घरेलू मुकाबलों में 19 विकेट लिए हैं. इनमें दो रणजी और तीन लिस्ट ए मैच शामिल हैं. इसके अलावा तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी की वनडे टीम में वापसी हुई है. क्या ये टीम वर्ल्ड कप को देखते हुए फाइनल की गई है? 'आज का दिन' में सुनने के लिए करें. 

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