केरल के कोच्चि में ईडी की टीम पर हमले का एक गंभीर मामला सामने आया है. एफआईआर के अनुसार यह घटना 27 मई 2026 को उस समय हुई जब ईडी के असिस्टेंट डायरेक्टर और उनकी टीम बेकरी जंक्शन इलाके में स्थित एक घर में सर्च वारंट के तहत तलाशी कार्रवाई करने पहुंचे थे. यह घर केरल राज्य के विपक्ष के नेता और उनकी बेटी का किराए का आवास बताया गया है. एफआईआर में दर्ज जानकारी के अनुसार ईडी टीम ने सुबह करीब 7 बजकर 15 मिनट पर तलाशी शुरू की थी. यह कार्रवाई दोपहर करीब 2 बजकर 40 मिनट तक चली. तलाशी पूरी होने के बाद टीम अपने सरकारी काम को खत्म कर बाहर निकल रही थी और अपनी गाड़ियों में बैठकर परिसर से बाहर सड़क पर पहुंची थी.
एफआईआर के मुताबिक जैसे ही तीन वाहन KL22-S-8016, KL-01-DA-2969 और KL-01-DF-6096 गेट से बाहर निकले, सड़क पर पहले से मौजूद करीब 300 लोगों की भीड़ ने उन्हें घेर लिया. भीड़ के लोगों के हाथों में लाठी, पत्थर और ईंट जैसे हथियार थे. आरोप है कि भीड़ ने गालियां देते हुए इनको मार डालो जैसे नारे लगाए और तीनों वाहनों को चारों तरफ से घेर लिया. इसके बाद भीड़ ने ईडी अधिकारियों और कर्मचारियों पर हमला शुरू कर दिया. लाठियों से हमला किया गया जिससे एक अधिकारी के हाथ में चोट आई.
300 लोगों की भीड़ ने अधिकारियों और वाहनों को घेरा
एफआईआर में यह भी कहा गया है कि पत्थर फेंककर एक वाहन के चालक को गंभीर रूप से घायल किया गया. इसके अलावा ईंट और पत्थरों से हमला कर जान से मारने की कोशिश की गई. हमले के दौरान सरकारी वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया गया. घटना के समय मौके पर केरल पुलिस और सीआरपीएफ के जवान मौजूद थे. जब उन्होंने भीड़ को रोकने और स्थिति नियंत्रित करने की कोशिश की, तो उन पर भी हमला कर दिया गया. पुलिस और सीआरपीएफ के कई जवानों को लाठी और पत्थरों से चोटें आईं.
सरकारी काम में बाधा और वाहन क्षति का आरोप, FIR दर्ज
एफआईआर में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस हमले के कारण ईडी अधिकारियों और अन्य सरकारी कर्मचारियों को अपना काम पूरा करने में बाधा आई. साथ ही सरकारी कार्य में गंभीर रुकावट पैदा हुई. हमले में सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचा और कुल मिलाकर करीब तीन लाख रुपये की क्षति का अनुमान लगाया गया है. एफआईआर में भीड़ पर हत्या की कोशिश, सरकारी कार्य में बाधा, हमला और तोड़फोड़ जैसी गंभीर धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं. फिलहाल यह मामला जांच के दायरे में है और घटना को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है.
शिबिमोल / अरविंद ओझा