कर्नाटक में चावल पर कांग्रेस और बीजेपी में क्यों छिड़ा विवाद, क्या है नियम... जानें सबकुछ 

कांग्रेस ने केंद्र पर आरोप लगाया कि कर्नाटक सरकार की अन्ना भाग्य योजना के लिए चावल देने से इनकार कर दिया. इसको लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं ने राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में भारी बारिश के बीच विरोध प्रदर्शन किया. इसके अलावा बीजेपी ने लोगों को पांच किलो अतिरिक्त चावल नहीं मिलने पर कांग्रेस के खिलाफ प्रदर्शन किया.

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कर्नाटक में चावल को लेकर विवाद (फाइल फोटो) कर्नाटक में चावल को लेकर विवाद (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 21 जून 2023,
  • अपडेटेड 12:50 PM IST

कर्नाटक में चावल को लेकर मंगलवार को राजनीति गरमा गई. यहां दोनों दलों ने राज्य के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन किए. एक ओर कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ चावल की आपूर्ति से इनकार करने के खिलाफ प्रदर्शन किया तो वहीं बीजेपी ने कहा कि सिद्धारमैया सरकार अपने वादों को पूरा नहीं कर पा रही है.  

कांग्रेस ने केंद्र पर आरोप लगाया कि कर्नाटक सरकार की अन्ना भाग्य योजना के लिए चावल देने से इनकार कर दिया. इसको लेकर केंद्र के खिलाफ राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में भारी बारिश के बीच विरोध प्रदर्शन किया. 

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दूसरी ओर बीपीएल परिवार के प्रत्येक सदस्य को 10 किलो चावल देने में नाकाम रहने पर बीजेपी ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया. विरोध प्रदर्शन करते हुए पूर्व सीएम बसवराज बोम्मई समेत कई बीजेपी नेताओं को हिरासत में लिया गया.  

एक सभा को संबोधित करते हुए डिप्टी सीएम और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने कहा कि एनडीए सरकार अन्ना भाग्य योजना को बाधित करने की कोशिश कर रही है, लेकिन राज्य सरकार अपने चुनावी वादे को पूरा करेगी. उन्होंने केंद्र पर गरीब विरोधी होने का आरोप लगाया और कहा कि बीजेपी कमजोर तबके को चावल उपलब्ध कराने की योजना में बाधा पैदा कर रही है.  

बता दें कि कांग्रेस ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के परिवारों को चावल की मात्रा पांच किलो से बढ़ाकर 10 किलो प्रति व्यक्ति करने का वादा किया है. हालांकि, राज्य अब तक बीपीएल परिवारों के प्रत्येक सदस्य को केवल पांच किलो चावल ही उपलब्ध करा पाया है, जिसकी आपूर्ति केंद्र द्वारा की जा रही है.  

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केंद्र ने 5 किलो अतिरिक्त चावल से किया इनकार

केंद्र ने कहा कि वह अतिरिक्त पांच किलो प्रदान नहीं कर सकता है. हालांकि कर्नाटक ने कहा कि वह इसे भारतीय खाद्य निगम, केंद्रीय भंडारण निगम और नेफेड जैसे केंद्रीय संस्थानों से खरीदने के लिए तैयार है. हाल ही में केंद्र सरकार ने ओपन मार्केट सेल स्कीम (OMSS) के तहत केंद्रीय पूल से राज्य सरकारों को चावल और गेहूं की बिक्री बंद कर दी. 

FCI ने जारी किया नया आदेश 

भारतीय खाद्य निगम (FCI) द्वारा जारी एक आदेश के अनुसार, राज्य सरकारों के लिए OMSS (घरेलू) के तहत गेहूं और चावल की बिक्री बंद कर दी जाती है. हालांकि, OMSS के तहत चावल की बिक्री पूर्वोत्तर राज्यों, पहाड़ी राज्यों और कानून और व्यवस्था की स्थिति का सामना कर रहे राज्यों, प्राकृतिक आपदाओं के लिए 3,400 रुपये प्रति क्विंटल की मौजूदा दर पर जारी रहेगी. 

एफसीआई ने ये कदम मानसून की धीमी प्रगति, चावल और गेहूं की बढ़ती कीमतों के बीच उठाया है. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक साल में मंडी स्तर पर चावल की कीमतों में 10 फीसदी तक और पिछले एक महीने में 8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. 

सिद्धारमैया ने क्या कहा? 

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के अनुसार, राज्य को 2.28 लाख मीट्रिक टन चावल की जरूरत है. उन्होंने आरोप लगाया कि एफसीआई ने 12 जून को आवश्यक मात्रा में चावल उपलब्ध कराने पर सहमति जताई थी, लेकिन दो दिन बाद वह मुकर गया. विरोध प्रदर्शन के बाद मीडिया से बात करते हुए सीएम ने कहा कि केंद्र द्वारा कर्नाटक को अतिरिक्त चावल की आपूर्ति करने से इनकार करना संदेह पैदा करता है कि क्या उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए चिंता है. 

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चावल के लिए भुगतान को तैयार: CM 

सिद्धारमैया ने कहा कि हम चावल के लिए भुगतान करेंगे. हम बीपीएल परिवार को प्रति व्यक्ति पांच किलो अतिरिक्त चावल की आपूर्ति का खर्च उठाएंगे. वहीं पंजाब से चावल खरीदने को लेकर सीएम ने कहा कि पंजाब बहुत दूर है और ट्रांसपोर्टेशन खर्च अधिक होगा.  

 

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