AI समिट हंगामा: जेल से छूटे युवा कांग्रेस अध्यक्ष उदय भानु चिब, बोले- राहुल गांधी के सिपाही डरने वाले नहीं

दिल्ली की तिहाड़ जेल से इंडियन यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब और अन्य कार्यकर्ताओं की रिहाई हो गई है. इन सभी को एआई समिट के दौरान शर्टलेस प्रोटेस्ट के मामले में गिरफ्तार किया गया था.

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एआई समिट के दौरान शर्टलेस प्रोटेस्ट के मामले में गिरफ्तार इंडियन यूथ कांग्रेस चीफ उदय भानु चिब तिहाड़ जेल से रिहा. (Photo: Instagram/@IYC) एआई समिट के दौरान शर्टलेस प्रोटेस्ट के मामले में गिरफ्तार इंडियन यूथ कांग्रेस चीफ उदय भानु चिब तिहाड़ जेल से रिहा. (Photo: Instagram/@IYC)

अनमोल नाथ

  • नई​ दिल्ली,
  • 03 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 11:15 PM IST

इंडियन यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब समेत अन्य युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं की दिल्ली की तिहाड़ जेल से रिहाई हो गई है. यह रिहाई एआई समिट के दौरान हुए शर्टलेस विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में अदालत द्वारा जमानत और उसके बाद जारी किए गए रिलीज ऑर्डर के तहत मंगलवार देर रात हुई. जेल से बाहर आकर युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एक दूसरे के साथ एकजुटता दिखाई और इसे लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत बताया.

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तिहाड़ जेल से रिहाई के बाद मीडिया से बातचीत में उदय भानु चिब ने कहा कि युवा कांग्रेस डरने वाली नहीं है. उन्होंने कहा, 'हम राहुल गांधी के सिपाही हैं. किसी भी तरह के दबाव या दमन से हम पीछे हटने वाले नहीं हैं. भारत विरोधी इंडिया–यूएस अंतरिम ट्रेड डील के खिलाफ युवा कांग्रेस की लड़ाई आगे भी जारी रहेगी.' उन्होंने आरोप लगाया कि इस व्यापार समझौते से देश के किसानों और आम नागरिकों के हितों को नुकसान पहुंचेगा और युवा कांग्रेस इसका पुरजोर विरोध करती रहेगी.

यह भी पढ़ें: AI समिट हंगामा! यूथ कांग्रेस के 9 कार्यकर्ताओं को मिली जमानत, एक की बढ़ी रिमांड

अदालत से उदय भानु चिब को 28 फरवरी को जमानत मिली थी, जबकि इस मामले में अन्य 9 आरोपियों को 1 मार्च को कोर्ट ने राहत दी थी. बाद में दिल्ली पुलिस द्वारा वेरिफिकेशन रिपोर्ट दाखिल किए जाने के बाद अदालत ने तिहाड़ जेल प्रशासन को यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं की रिहाई के आदेश जारी किए. युवा कांग्रेस की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता रूपेश सिंह भदौरिया ने बताया कि जमानत के साथ कुछ सामान्य शर्तें लगाई गई हैं. इसके तहत यात्रा से पहले अदालत को सूचित करना होगा और जांच में आवश्यकता पड़ने पर सहयोग करना अनिवार्य रहेगा.

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उन्होंने कहा कि यह केवल एक संगठन की जीत नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक अधिकारों की जीत है. अधिवक्ता रूपेश सिंह भदौरिया ने इसे ऐतिहासिक दिन बताते हुए कहा कि यह उन सभी लोगों के लिए खुशी का क्षण है जो भारत के लोकतंत्र और संसदीय प्रणाली में विश्वास रखते हैं. युवा कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि यह मामला राजनीतिक प्रतिशोध का परिणाम था, लेकिन न्यायपालिका के फैसले ने एक बार फिर कानून और लोकतांत्रिक संस्थाओं में भरोसा मजबूत किया है.

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