गुरुग्राम एनकाउंटर: मारे गए चार बदमाशों में नाबालिग जेवलिन प्लेयर भी, घरवाले बोले- गोली पैर में क्यों नहीं मारी

गुरुग्राम के साउथ सिटी-1 एनकाउंटर मामले में एक बेहद भावुक और व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला नया मोड़ सामने आया है. मुठभेड़ में मारे गए 17 वर्षीय जेवलिन थ्रो खिलाड़ी आर्यन के पिता ने रोते हुए पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि उनका बेटा अपराधी नहीं था, वह तो महज एक मोहरा बना था और पुलिस चाहती तो उसकी जान बचा सकती थी.

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परिजनों ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल.(Photo:ITG) परिजनों ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल.(Photo:ITG)

नीरज वशिष्ठ

  • ​गुरुग्राम,
  • 10 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 11:58 PM IST

गुरुग्राम साउथ सिटी-1 इलाके में कल देर रात हुई एक मुठभेड़ (एनकाउंटर) ने न सिर्फ पुलिस और अपराधियों के बीच की जंग को उजागर किया है, बल्कि एक दुखद और दहला देने वाली सच्चाई भी सामने रखी है. इस एनकाउंटर में मारे गए चार लोगों में से दो 17 वर्षीय किशोर ऐसे थे, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था, लेकिन गलत संगत ने उन्हें मौत के मुंह में धकेल दिया.

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पुलिस तफ्तीश और परिजनों के बयानों से जो जानकारी सामने आई है, वह रोंगटे खड़े कर देने वाली है. रोहतक के भालौठ गांव का रहने वाला 22 वर्षीय बाइक मैकेनिक नितिन ने दो नाबालिगों अंकित और आर्यन को निशाना बनाया. नितिन आपराधिक गतिविधियों में लिप्त था.

17 वर्षीय आर्यन रोहतक के भालौठ गांव का रहने वाला था और जेवलिन का प्लेयर था. जबकि आर्यन 12 वीं क्लास में पढ़ता था. 

मृतक के पिता की मानें तो उनके नाबालिग बेटे को एक मौका दिया जाना चाहिए था. गोली छाती में न मार कर टांग में भी मारी जा सकती थी. आर्यन दो दिन पहले नितिन नाम के युवक के साथ घर से निकला था.

​अंकित (17): 8वीं पास था और चार बहनों का इकलौता भाई था. घर से यह कहकर निकला था कि वह हरिद्वार कांवड़ लेने जा रहा है.

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आर्यन (17): 12वीं का छात्र और जेवलिन थ्रो का उभरता खिलाड़ी था. माता-पिता का इकलौता सहारा आर्यन बाइक ठीक करवाने के बहाने घर से निकला था..

​नितिन ने इन दोनों को बहला-फुसलाकर रोहतक से संदीप उर्फ दीपा के साथ स्कॉर्पियो गाड़ी में बिठाया और गुरुग्राम ले आया, जहां वे कोटा बिसर निवासी शिवम से मिले. इन सब को एक खतरनाक मकसद के लिए इस्तेमाल किया गया.

​10 करोड़ की रंगदारी का 'खूनी प्लान'

​पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम के पीछे विदेश में बैठा गैंगस्टर दीपक नांदल था. दीपक पिछले तीन महीनों से गुरुग्राम के नामी व्यापारी विशाल बेरी से 10 करोड़ रुपये की रंगदारी मांग रहा था. विशाल बेरी को लगातार 15 से 20 धमकियां भरे फोन कॉल्स किए गए थे. देखें VIDEO:- 

​जब रंगदारी की मांग पूरी नहीं हुई, तो गैंगस्टर ने अपने सबसे भरोसेमंद गुर्गे फतेहाबाद निवासी संदीप उर्फ दीपा को विशाल बेरी के घर फायरिंग की साजिश रचने का काम सौंपा. संदीप के खिलाफ पहले से ही हत्या के प्रयास, आर्म्स एक्ट और एनडीपीएस जैसे 14 गंभीर मामले दर्ज थे. देखें VIDEO:- 

​गलत संगत ने छीनी खुशियां
​इस पूरे मामले में सबसे दुखद पहलू उन दो नाबालिगों का जीवन है, जिनका अपराधी बनने का कोई इतिहास नहीं था. बाइक मैकेनिक नितिन से जान-पहचान और विश्वास ही उनके लिए जानलेवा साबित हुआ. एक ओर जहां पिता अपने बेटे के कांवड़ यात्रा से लौटने का इंतजार कर रहे थे, तो दूसरी ओर एक खिलाड़ी का करियर और परिवार के सपने गोलियों की गूंज में खत्म हो गए.

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​पुलिस अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि गैंगस्टर ने कैसे सोशल मीडिया या स्थानीय संपर्कों के जरिए इन किशोरों का इस्तेमाल अपने नापाक मंसूबों को अंजाम देने के लिए किया. ​यह घटना अभिभावकों के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि वे अपने बच्चों की गतिविधियों और उनकी संगत पर कड़ी नजर रखें, क्योंकि अपराधी अक्सर भोले-भाले युवाओं को अपना मोहरा बनाने के लिए घात लगाए बैठे रहते हैं.

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