किसान आंदोलन खत्म करने का हुआ ऐलान, 11 दिसंबर से दिल्ली बॉर्डर से वापस लौटेंगे आंदोलनकारी

Farmers Protest: एक साल से जारी किसान आंदोलन को स्थगित कर दिया गया है. संयुक्त किसान मोर्चा ने बताया कि आंदोलन को अभी खत्म नहीं किया गया है. किसान नेता बलवीर राजेवाल ने कहा कि हर महीने समीक्षा बैठक होगी और उसके बाद आगे की रणनीति पर चर्चा होगी.

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संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक खत्म हो गई है. संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक खत्म हो गई है.

पवन राठी / ऐश्वर्या पालीवाल

  • नई दिल्ली,
  • 09 दिसंबर 2021,
  • अपडेटेड 3:58 PM IST
  • सरकार के झुकने के बाद नरम पड़े किसान
  • एसकेएम ने कहा, आंदोलन खत्म नहीं, स्थगित
  • 15 जनवरी को फिर से बैठक करेगा SKM

Farmers Protest: तीनों कृषि कानूनों की वापसी और लंबित मांगों पर सरकार के प्रस्ताव के बाद अब संयुक्त किसान मोर्चा ने किसान आंदोलन को स्थगित करने का ऐलान किया है. किसान मोर्चा ने साफ किया कि आंदोलन को खत्म नहीं किया जा रहा है, इसे अभी स्थगित किया गया है. किसान नेता बलवीर राजेवाल ने कहा कि हम एक बड़ी जीत लेकर जा रहे हैं, एक अहंकारी सरकार को झुकाकर जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि ये आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है, इसे अभी स्थगित किया गया है. 15 जनवरी को संयुक्त किसान मोर्चा की फिर बैठक होगी, जिसमें समीक्षा होगी. अगर सरकार दाएं-बाएं होती है तो आंदोलन फिर शुरू करने का फैसला लिया जा सकता है.

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संयुक्त किसान मोर्चा ने बताया कि 11 दिसंबर से विजय के साथ दिल्ली बॉर्डर से किसानों का जाना शुरू हो जाएगा. किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि हम पहले 10 तारीख से ही करना चाह रहे थे, लेकिन कल जो दुर्घटना हुई है, इसलिए हमने 11 तारीख से विजय मनाने का फैसला लिया है.

किसान आंदोलन स्थगित करने का मतलब क्या? इस सवाल पर किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने बताया कि इसका मतलब है कि आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि सरकार ने कई वादे किए हैं. केस वापसी की बात कही है, मुआवजा देने की बात कही है, लेकिन अभी केस वापस तो नहीं हो गए, मुआवजा तो नहीं मिल गया. चढ़ूनी ने कहा कि सरकार अपने वादे पूरे कर दे, हम अपने वादे पूरे कर देंगे.

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आज सुबह मिली सरकार से चिट्ठी तब माने किसान

किसान नेता योगेंद्र यादव ने बताया कि 19 नवंबर को प्रधानमंत्री मोदी ने कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान किया था. हमने 21 नवंबर को अपनी 6 मांगों के साथ एक चिट्ठी लिखी थी. दो हफ्ते तक उस पर कोई जवाब नहीं आया. परसों (7 दिसंबर) सरकार की ओर से एक प्रस्ताव आया था जिसपर हमने कुछ बदलाव बताए थे. उसके बाद कल (8 दिसंबर) फिर एक प्रस्ताव आया और आज केंद्र सरकार के कृषि सचिव संजय अग्रवाल की ओर से चिट्ठी आई है, जिसके बाद हमने आंदोलन को स्थगित करने का फैसला लिया है. 

योगेंद्र यादव ने बताया, किसानों की मांगों पर सरकार ने क्या कहा?

1. MSP की गारंटी परः एमसएसपी को लेकर सरकार ने कमेटी बनाने का प्रस्ताव दिया है. इस कमेटी में संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्यों को भी शामिल किया जाएगा. इसके साथ ही MSP पर खरीद जारी रहेगी, ऐसा भी सरकार ने लिखकर दिया है.

2. केस वापसी परः यूपी, उत्तराखंड, हिमाचल, मध्य प्रदेश और हरियाणा सरकार ने इसके लिए पूर्णतः सहमति दी है कि तत्काल प्रभाव से आंदोलन संबंधित मामलों को वापस लिया जाएगा. दिल्ली समेत सभी यूटी में दर्ज मामलों को भी वापस लिया जाएगा.ब

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3. मुआवजे परः योगेंद्र यादव ने बताया कि मुआवजे के सवाल पर यूपी और हरियाणा सरकार ने सहमति दे दी है. उन्होंने बताया कि बात इतनी आगे बढ़ गई है कि कल आकर मुआवजा ले जाओ.

4. बिजली बिल परः इस पर हमें ऐतराज था. सरकार ने लिखित में दिया है कि बिजली बिल को बिना किसानों से चर्चा के संसद में पेश नहीं किया जाएगा.

5. पराली परः पराली जलाने पर पहले 5 साल की सजा और 1 करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान था, जिसे सरकार पहले ही खत्म कर चुकी है. उन्होंने बताया कि सरकार ने बताया है कि पराली जलाने पर किसानों पर आपराधिक मुकदमे नहीं चलेंगे.

6. लखीमपुर हिंसा परः यूपी के लखीमपुर में हुई हिंसा के मामले में किसानों की मांग थी कि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी को बर्खास्त किया जाए, क्योंकि उनके बेटे आशीष मिश्रा मामले में मुख्य आरोपी है. इस मांग पर कुछ नहीं हुआ है. किसान नेता शिव प्रसाद कक्का ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की कमेटी बनी है और उसकी रिपोर्ट आने के बाद कुछ होगा. 

सिंघु-कोंडली बॉर्डर से टेंट हटने शुरू

दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसानों ने भी 'घर वापसी' की तैयारी शुरू कर दी है. सिंघु-कोंडली बॉर्डर पर पिछले एक साल से डटे किसान अब लौट रहे हैं. किसानों ने बॉर्डर पर बनाए अपने टेंट को उखाड़ना शुरू कर दिया है और तिरपाल, बिस्तर को ट्रकों-ट्रैक्टरों में रखना शुरू कर दिया है. किसानों का कहना है कि सरकार ने उनकी मांगों को मान लिया है, इसलिए अब वो वापस लौट रहे हैं.

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किसानों की घर वापसी की तैयारी शुरू. (फोटो-आजतक)

वहीं, पंजाब के 32 किसान संगठनों ने घर जाने का प्रस्ताव रखा है. पंजाब के किसान 11 दिसंबर से घर वापसी शुरू करेंगे. प्रस्ताव के मुताबिक, किसान 11 दिसंबर को बॉर्डर से निकलेंगे और 13 दिसंबर को अमृतसर के हरमिंदर साहिब पहुंचेंगे. किसान संगठनों ने टोल प्लाजा को भी मुक्त करने का प्रस्ताव किया है. पिछले साल सितंबर से ही किसान संगठनों ने पंजाब के सभी टोल प्लाजा को फ्री कर दिया था. 

किसानों का कहना है कि उनकी मांग पूरी हो गई है. (फोटो-आजतक)

पिछले साल 26 नवंबर से दिल्ली की बॉर्डर पर डटे हैं किसान

सरकार ने पिछले साल सितंबर में तीन कृषि कानूनों को पास किया था. इसके खिलाफ पिछले साल 26 नवंबर से दिल्ली की सिंघु, टिकरी और गाजीपुर बॉर्डर पर किसान डटे हुए हैं. किसान तीनों कृषि कानूनों की वापसी पर अड़े हुए थे. जिसके बाद इसी साल 19 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों कृषि कानूनों की वापसी का ऐलान किया था. तीनों कृषि कानूनों की वापसी हो चुकी है. हालांकि, किसान एमएसपी पर कानून समेत कई और मांगों पर अड़े थे, जिसे लेकर भी सरकार ने नरम रुख दिखाया है.

 

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