मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर को लेकर हाईकोर्ट ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाया. हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने अपने आदेश में भोजशाला परिसर को हिंदू मंदिर माना. अदालत ने एएसआई की 98 दिन चले सर्वेक्षण की रिपोर्ट को सही मानते हुए भोजशाला परिसर को हिंदू मंदिर के तौर पर मान्यता दी.
फैसले में कहा गया कि विवादित परिसर का धार्मिक चरित्र देवी वाग्देवी सरस्वती के मंदिर और संस्कृत अध्ययन केंद्र भोजशाला के रूप में स्थापित होता है. वहीं, हाईकोर्ट के फैसले के बाद देश की राजनीति और धार्मिक विमर्श एक बार फिर गरमा गया है. कई नेताओं ने इस फैसले का स्वागत भी किया है.
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किया फैसले का स्वागत
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अदालत के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि 'मैं प्रदेश की जनता को बधाई देता हूं.' उन्होंने अपील की कि सभी लोग इस फैसले को उसकी मूल भावना के साथ स्वीकार करें और शांति व स्थायी समाधान की दिशा में आगे बढ़ें.
इसके साथ ही, बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि कोर्ट के फैसले का पालन किया जाएगा.
कांग्रेस नेता ने कहा 'फैसले का किया जाएगा अध्ययन'
हाईकोर्ट के फैसले को लेकर इंदौर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि फैसले का अध्ययन किया जाएगा और आगे की कार्रवाई नियमों व प्रचलनों के अनुसार ही की जाएगी.
दिग्विजय सिंह ने बताया, जामिया मस्जिद, बनारस और अन्य तीन मामले पहले से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती के रूप में लंबित हैं. भोजशाला एएसआई प्रोटेक्टेड साइट है, ऐसे में वहां पूजा-अनुष्ठान की अनुमति का अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट ही करेगा.
उन्होंने बताया कि एएसआई की रिपोर्ट में कई दावों का उल्लेख नहीं, इसलिए पूरे फैसले की गहराई से जांच जरूरी है. दिग्विजय सिंह ने कहा, कानून व संविधान के दायरे में रहकर ही सभी निर्णय होना चाहिए, अंतिम निर्णय सर्वोच्च न्यायालय का होगा.
वहीं, कांग्रेस नेता आरिफ मसूद ने कहा कि हम इस फैसले से सहमत नहीं हैं, क्योंकि यह एएसआई की उस रिपोर्ट पर आधारित है, जिस पर हमें पहले से ही संदेह था और जिसके खिलाफ याचिकाकर्ताओं ने पहले ही आपत्तियां दर्ज कराई थीं. आरिफ मसूद ने कहा कि हमने सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला किया है.
असदुद्दीन ओवैसी ने बताई बाबरी जैसी समानताएं
कोर्ट के फैसले को लेकर, AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने प्रतिक्रिया भी सामने आई है. ओवैसी ने कहा कि इस आदेश में बाबरी मस्जिद मामले के फैसले जैसी समानताएं नजर आती हैं. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि उन्हें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट इसे ठीक करेगा और इस आदेश को रद्द किया जाएगा.
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