दोस्त पर लगाया रेप का आरोप, फिर कोर्ट में बोली- सब सहमति से हुआ... अब खुद फंसी महिला कॉन्स्टेबल

दिल्ली की साकेत कोर्ट ने एक महिला कॉन्स्टेबल के खिलाफ मुकदमा चलाने का आदेश दिया है. महिला ने अपने साथी पुलिसकर्मी पर रेप और ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाया था, लेकिन कोर्ट के सामने उसने कथित तौर पर स्वीकार किया कि शिकायत में लगाए गए आरोप सही नहीं थे और संबंध आपसी सहमति से बने थे. अब मामले में महिला के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ेगी.

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दिल्ली की साकेट कोर्ट ने दिया आदेश. (Photo: Representational) दिल्ली की साकेट कोर्ट ने दिया आदेश. (Photo: Representational)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 08 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 12:42 PM IST

दिल्ली पुलिस की एक महिला कॉन्स्टेबल ने अपने साथी पर रेप और वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया था. अब यह आरोप झूठ साबित होने पर साकेत कोर्ट ने उसके खिलाफ मुकदमा चलाने का आदेश दिया है. कोर्ट ने पाया कि महिला ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए दोस्त को फंसाने के लिए झूठी शिकायत की थी. इसके बाद उसके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है.

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महिला सिपाही ने अपने साथी पुलिसकर्मी पर रेप का केस दर्ज कराया था. जांच और सबूतों के आधार पर कोर्ट ने पाया कि लगाए गए आरोप दुर्भावनापूर्ण और मनगढ़ंत थे. साकेत कोर्ट के सामने महिला कॉन्स्टेबल ने स्वीकार किया कि उसके आरोप झूठे थे. उसने संबंध और वीडियोग्राफी सहमति से बनाए थे. इन आरोपों को झूठा पाते हुए कोर्ट ने महिला कॉन्स्टेबल के खिलाफ केस चलाने का फैसला लिया है.

यह भी पढ़ें: कोर्ट ने पिता और बेटी पर FIR के दिए आदेश, ससुर के खिलाफ दर्ज कराया था झूठा रेप केस

इस तरह के गंभीर दुराचार और झूठी शिकायत के मामले सामने आने पर दिल्ली पुलिस के नियमों के तहत दोषी को विभागीय जांच और बर्खास्तगी का भी सामना करना पड़ सकता है. अगर विभागीय जांच में भी आरोप सही पाए जाते हैं, तो दिल्ली पुलिस के सेवा नियमों के तहत महिला कॉन्स्टेबल के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी हो सकती है. इसमें निलंबन से लेकर सेवा से बर्खास्तगी तक की कार्रवाई शामिल है. हालांकि विभागीय कार्रवाई का फैसला अलग प्रक्रिया के तहत होगा.

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पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला

इससे पहले भी ऐसा ही मामला सामने आया था, जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट ने ऐसे ही एक मामले में अपने दोस्त पर झूठे रेप के आरोप लगाने के मामले में महिला कॉन्स्टेबल और उसके एक वकील साथी को दोषी ठहराते हुए उनके खिलाफ मुकदमा चलाने का फैसला बरकरार रखा था.

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में माना कि दोनों ने मिलकर एक व्यक्ति को झूठे रेप के मामले में फंसाया था. इस मामले में कॉन्स्टेबल और वकील पर अवैध वसूली और गलत तरीके से फंसाने के आरोप साबित हुए. इस तरह के गंभीर अपराधों और पुलिस पद का दुरुपयोग करने के कारण कोर्ट ने इन पर सख्त रुख अपनाते हुए ट्रायल जारी रखने का निर्देश दिया है.

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