ज्ञानवापी मामले में कार्बन डेटिंग की नहीं जरूरत, ASI के पास और भी तकनीक मौजूद

ASI के वकील मनोज सिंह ने कहा कि शिवलिंगनुमा आकृति की कार्बन डेटिंग से जांच कराने पर उस आकृति को नुकसान पहुंच सकता है. एएसआई के पास अन्य कई तकनीक हैं जिनसे सुरक्षित तरीके से वो इसकी जांच कर रिपोर्ट दे सकते हैं. इसके लिए उन्हें कम से कम तीन महीनों की मोहलत दी जाए.

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शिवलिंग नुमा आकृति की कार्बन डेटिंग की बजाय कारगर तकनीकों से हो जांच- ASI शिवलिंग नुमा आकृति की कार्बन डेटिंग की बजाय कारगर तकनीकों से हो जांच- ASI

संजय शर्मा

  • इलाहाबाद,
  • 21 नवंबर 2022,
  • अपडेटेड 6:35 PM IST

वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद से जुड़े विवाद मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के सामने एक और दलील रखी गई. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) का कहना है कि ज्ञानवापी परिसर से मिले शिवलिंग नुमा आकृति की कार्बन डेटिंग की बजाय अन्य सुरक्षित और कारगर तकनीकों के जरिए जांच कराई जाए.

ASI के वकील मनोज सिंह ने कहा कि शिवलिंगनुमा आकृति की कार्बन डेटिंग से जांच कराने पर उस आकृति को नुकसान पहुंच सकता है. एएसआई के पास अन्य कई तकनीक हैं जिनसे सुरक्षित तरीके से वो इसकी जांच कर रिपोर्ट दे सकते हैं. इसके लिए उन्हें कम से कम तीन महीनों की मोहलत दी जाए.

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'..और भी तरीके मौजूद'

एएसआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कथित शिवलिंग की प्राचीनता की पड़ताल के लिए कार्बन डेटिंग की प्रक्रिया से होने वाले नुकसान को टाला जा सकता है. क्योंकि आधुनिक विज्ञान में अन्य सुरक्षित और सटीक प्रौद्योगिकी हमारे पास भी है. बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 6 नवंबर को एएसआई को नोटिस भेजकर इस बाबत जांच कर रिपोर्ट देने को कहा था.

कारगर नहीं है कार्बन डेटिंग!

इससे पहले सुनवाई के दौरान एएसआई के वकील मनोज सिंह ने कोर्ट में कहा था कि वैसे भी कार्बन डेटिंग तकनीक निर्जीव पदार्थों की उम्र जानने के लिए उपयुक्त नहीं है. वो तो पेड़ पौधों जैसे सजीव या कभी सजीव रहे पदार्थों के लिए है.

'शिवलिंग' की उम्र जांचने की कोशिश

लेकिन याचिकाकर्ता के वकील विष्णु शंकर जैन की दलील थी कि बिना 'शिवलिंग' को नुकसान पहुंचाए वैज्ञानिक तौर पर उसकी उम्र की पड़ताल हो जानी चाहिए. इसके लिए अदालत कार्बन डेटिंग या किसी अन्य उपयुक्त तकनीक के जरिए इसका पता लगाने का आदेश दे सकती है.

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बता दें कि 14 अक्टूबर को अदालत ने कहा था कि यदि कार्बन डेटिंग तकनीक का प्रयोग करने पर या ग्राउंड पेनिनट्रेटिंग रडार का प्रयोग करने पर उक्त कथित शिवलिंग को क्षति पहुंचती है तो यह सुप्रीम कोर्ट के 17 मई के आदेश का उल्लंघन होगा इसके अतिरिक्त ऐसा होने पर आम जनता की धार्मिक भावनाओं को भी चोट पहुंच सकती है. अदालत ने कहा कि भारतीय पुरातत्व को सर्वे का निर्देश दिया जाना उचित नहीं होगा और ऐसा आदेश देने से इस वाद में निहित प्रश्नों के न्यायपूर्ण समाधान की कोई संभावना प्रतीत नहीं होती है. इसलिए इस प्रार्थना प्रत्र को खारिज किया जाता है. इसके साथ ही तब ही यह स्पष्ट हो गया था कि ज्ञानवापी में मिले 'शिवलिंग' की कार्बन डेटिंग नहीं होगी. तब सवाल उठा था कि कार्बन डेटिंग केस में दोनों पक्षों के पास क्या विकल्प है. ऐसे में आज ASI ने विकल्प सुझाए हैं.

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