प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन और चांसलर जावेद अहमद सिद्दीकी के खिलाफ एक चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें बड़े पैमाने पर नियामकीय धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और सरकारी एजेंसियों को गुमराह करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं. ईडी का कहना है कि यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े मेडिकल कॉलेज को वर्षों तक फर्जी अनुपालन के सहारे चलाया गया, जबकि पूरे सिस्टम पर सिद्दीकी का सीधा और सेंट्रलाइज्ड नियंत्रण था.
चार्जशीट में दावा किया गया है कि नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के नियमों को पूरा दिखाने के लिए दर्जनों डॉक्टरों को केवल "ऑन-पेपर" नियुक्त किया गया. ये डॉक्टर न तो कैंपस में नियमित रूप से मौजूद थे और न ही पढ़ाने या इलाज से जुड़े थे. कुछ डॉक्टरों ने जांच के दौरान स्वीकार किया कि वे घर से काम कर रहे थे, जिसे ईडी ने एक नियमित और अवैध व्यवस्था बताया. इन सभी नियुक्तियों को मानव संसाधन विभाग की सिफारिश के बाद जावेद सिद्दीकी की मंजूरी से किया गया.
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सबसे गंभीर आरोप रेड फोर्ट ब्लास्ट केस के मुख्य आरोपी उमर-उन-नबी की नियुक्ति को लेकर है. ईडी का कहना है कि बिना किसी पुलिस वेरिफिकेशन और बैकग्राउंड चेक के उसे यूनिवर्सिटी में नौकरी दी गई. इसी तरह कई अन्य लोगों की भी बिना जांच के नियुक्ति की गई, जिन पर अंतिम मुहर सिद्दीकी ने लगाई.
इंसपेक्शन के दौरान फर्जी मरीज रखने का आरोप!
जांच में यह भी सामने आया कि इंसपेक्शन के दौरान फर्जी मरीजों की व्यवस्था की जाती थी ताकि अस्पताल में मरीजों की संख्या ज्यादा दिखाई जा सके. आईटी हेड फर्दीन बेग ने बयान में स्वीकार किया कि ASHA वर्कर्स के जरिए मरीज लाए जाते थे और उन्हें नकद भुगतान किया जाता था. इन भुगतानों का रिकॉर्ड रखा जाता था और उच्च स्तर पर मंजूरी दी जाती थी.
ईडी ने यह भी आरोप लगाया कि निरीक्षण से पहले CCTV, इंटरनेट, सफाई और अन्य व्यवस्थाएं केवल दिखावे के लिए तैयार की जाती थीं. इसके अलावा नवंबर 2025 में NAAC के शो-कॉज नोटिस के बाद यूनिवर्सिटी की वेबसाइट में हेरफेर कर UGC मान्यता से जुड़े भ्रामक दावे हटाए या बदले गए.
छात्रों को भी किया गया गुमराह!
चार्जशीट के अनुसार, छात्रों को भी यूनिवर्सिटी की नियामकीय स्थिति को लेकर गुमराह किया गया. फर्जी दस्तावेजों के आधार पर छात्रों से फीस वसूली गई. साथ ही WhatsApp चैट्स और दस्तावेजों के जरिए यह खुलासा हुआ कि करीब 70 डॉक्टरों को फर्जी नियुक्तियों के लिए भुगतान किया गया.
13 करोड़ रुपये विदेश भेजने का आरोप
ईडी ने कुल 13.10 करोड़ रुपये के विदेशी लेनदेन का भी पता लगाया है, जो सिद्दीकी या उनके परिवार से जुड़े लोगों के जरिए विदेश भेजे गए. ईडी का कहना है कि यह एक सुनियोजित साजिश थी, जिसका मकसद नियामकों, छात्रों और सरकारी एजेंसियों को धोखा देकर पैसे विदेश भेजना था.
श्रेया चटर्जी