पंजाब: AAP की चुनाव तैयारियों में 'ब्रेकर' न बन जाए सांसदों का पाला बदल, रणनीति बनाने वाले ही हुए बागी

आम आदमी पार्टी के कद्दावर नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने शुक्रवार को AAP से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया. चड्ढा अकेले नहीं गए, ब ल्कि उनके साथ 5 अन्य सांसदों ने भी बीजेपी का हाथ थाम लिया है. सांसदों की इस बगावत ने पंजाब की सियासत में भूचाल ला दिया है.

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राघव चड्ढा ने थामा बीजेपी का दामन. (Photo: X/@NitinNabin) राघव चड्ढा ने थामा बीजेपी का दामन. (Photo: X/@NitinNabin)

असीम बस्सी / कमलजीत संधू

  • चंडीगढ़,
  • 25 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 1:11 AM IST

पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच आम आदमी पार्टी (AAP) को तगड़ा झटका लगा है, जिससे पार्टी ताश के पत्तों की तरह बिखरती नजर आ रही है. पार्टी के प्रमुख चेहरे और पंजाब AAP के पोस्टर बॉय रहे राघव चड्ढा ने न केवल AAP छोड़ दी है, बल्कि BJP का दामन थाम लिया है. साथ ही दावा किया कि पार्टी के 6 अन्य राज्यसभा सांसद भी उनके साथ हैं.

ये घटना पार्टी के लिए सिर्फ संसद में नहीं, बल्कि पंजाब की राजनीति में भी बड़ा नुकसान साबित हो सकती है. जहां 2027 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. AAP की राज्यसभा में ताकत 10 से घटकर मात्र 3 रह गई है, जिससे BJP/NDA की स्थिति और मजबूत हो गई है.

दरअसल, 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में AAP ने 92 सीटें हासिल कर सरकार बनाई थी. इसके बाद उसने पंजाब से 7 सांसदों को राज्यसभा भेजा, जिसमें राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, संजीव अरोड़ा, संत बलबीर सिंह सीचेवाल, संदीप पाठक और विक्रमजीत साहनी शामिल थे.

हालांकि, संजीव अरोरा ने पिछले साल इस्तीफा दे दिया था और पंजाब में कैबिनेट मंत्री बन गए थे और उनकी जगह एक अन्य उद्योगपति राजिंदर गुप्ता को राज्यसभा भेजा गया था.

अब जब संत बलबीर सिंह सीचेवाल को छोड़कर AAP के सभी सांसद पाला बदल चुके हैं तो इससे 2027 के चुनावों से पहले आम आदमी की छवि को काफी नुकसान पहुंचा है.

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'विधायकों में न मचे भगदड़'

राजनीतिक विशेषज्ञ प्रोफेसर कुलदीप सिंह (सेवानिवृत्त राजनीति विज्ञान प्रोफेसर) ने कहा इंडिया टुडे से बात करते हुए कहा, 'ये पार्टी के लिए एक बड़ा झटका है और पंजाब में इसका व्यापक प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि ये इतिहास का सबसे बड़ा विभाजन है. AAP की सरकार केवल पंजाब में है और पंजाब से उसके छह सांसदों के दल बदलने के बाद, AAP को कई सवालों के जवाब देने होंगे.'

उन्होंने आगे कहा कि इससे पंजाब में पार्टी कार्यकर्ताओं के मनोबल पर असर पड़ेगा और अब पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने कार्यकर्ताओं को एकजुट रखना और ये सुनिश्चित करना है कि विधायकों में भी सांसदों की तरह भगदड़ न मचे.

सीएम मान ने साधा निशाना

उधर, सांसदों के पाला बदलने पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उन्हें 'गद्दार' कहा है. मान ने कहा कि इन लोगों का पंजाब में कोई जनाधार या वोट बैंक नहीं है, इसलिए इनके जाने से पार्टी पर कोई असर नहीं पड़ेगा. उन्होंने इसे बीजेपी की साजिश करार देते हुए कहा कि चूंकि भाजपा का पंजाब में कोई समर्थन नहीं है, इसलिए वो इस तरह के हथकंडे अपनाकर सत्ता हथियाना चाहते हैं.

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कांग्रेस और SAD की AAP को नसीहत

इस संकट पर पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने AAP पर तंज कसा है. उन्होंने कहा, 'AAP को सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि उनके आधे विधायक BJP में शामिल हो सकते हैं, अब केवल सांसदों ने ही पार्टी छोड़ी है... पार्टी के पास कोई विचारधारा नहीं है...ये स्वाभाविक था... इन सांसदों का पंजाब में कोई महत्व नहीं है.'

SAD नेता बिक्रम मजीठिया ने कहा, 'ये सांसद तो चले गए, अब भगवंत मान भी BJP में जाएंगे. वो पहले से ही BJP से हाथ मिला चुके हैं. भगवंत मान को सदन में बहुमत साबित करना चाहिए.'

इन सांसदों ने बदला पाला

आपको बता दें कि बीजेपी में शामिल होने वाले सांसदों में पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह भी शामिल हैं जो राजनीति में सक्रिय नहीं थे. व्यवसायी अशोक मित्तल (LPU के मालिक), जिन पर हाल ही में ED के छापे पड़े थे, उन्होंने भी चड्ढा का साथ चुना. इनके साथ ही उद्योगपति राजिंदर गुप्ता और समाजसेवी विक्रमजीत साहनी ने भी पार्टी छोड़ दी है. राघव चड्ढा का जाना सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह पंजाब में सरकार बनने के बाद फैसलों में अहम भूमिका निभाते थे. हालांकि, अरविंद केजरीवाल के जेल जाने के बाद पार्टी से उनकी दूरी और बढ़ गई और उन्हें पंजाब से पूरी तरह किनारे कर दिया गया.

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