'डर से लोग भागवत का भाषण सुनने पहुंचे...', राज ठाकरे का RSS चीफ पर तीखा हमला

राज ठाकरे ने RSS के शताब्दी समारोह को लेकर दावा किया कि लोग भागवत के भाषण सुनने नहीं गए थे, बल्कि सत्ता के डर से कार्यक्रम में शामिल हुए थे. ठाकरे ने इस दौरान भागवत के भाषाई पहचान वाले बयान का भी जवाब दिया.

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राज ठाकरे ने मोहन भागवत के कार्यक्रम पर कई सवाल उठाए हैं. (Photo: PTI) राज ठाकरे ने मोहन भागवत के कार्यक्रम पर कई सवाल उठाए हैं. (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 10 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:51 PM IST

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत पर तीखा हमला बोला है. मुंबई में संघ के शताब्दी समारोह में राजनीति से लेकर बॉलीवुड जगत की दिग्गज हस्तियां शामिल हुई थीं. राज ठाकरे ने दावा किया है कि लोग आरएसएस के डर से इस कार्यक्रम में शामिल हुए थे.

राज ठाकरे ने आरएसएस प्रमुख को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें इस गलतफहमी में नहीं रहना चाहिए कि लोग उनके भाषण सुनने आए थे. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर लोग उन्हें सुनना चाहते, तो लोग इससे पहले इन सभाओं में शामिल क्यों नहीं होते थे? उन्होंने भागवत के भाषा अधिकारों के आंदोलन को 'बीमारी' बताने वाले बयान पर भी पलटवार किया.

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एमएनएस प्रमुख ने भागवत के भाषणों को 'उबाऊ उपदेश' करार दिया. उन्होंने कहा कि लोग उनके कार्यक्रम में सिर्फ सत्ता के डर से शामिल हुए. 

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भाषाई गौरव को बताया सम्मान

राज ठाकरे ने कहा कि भाषाई गौरव कोई बीमारी नहीं है. उन्होंने इसे कर्नाटक, तमिलनाडु, बंगाल और गुजरात जैसे राज्यों में अपनी पहचान के लिए सम्मान बताया. ठाकरे ने भागवत को सलाह दी कि वो भारत के भाषाई राज्य पुनर्गठन का इतिहास पढ़े, ताकि वो समझ सकें कि क्षेत्रीय पहचानों को आधिकारिक मान्यता क्यों दी गई थी.

RSS के 'गैर-राजनीतिक' होने के दावे पर तंज

राज ठाकरे ने आरएसएस के 'गैर-राजनीतिक' होने के दावे पर भी तंज किया. उन्होंने पूछा कि भागवत केंद्र सरकार के हिंदी थोपने की कोशिशों पर क्यों खामोश हैं? ठाकरे ने गोमांस के निर्यात में बढ़ोतरी और गुजरात से उत्तर भारतीय प्रवासियों को निकाले जाने जैसे मुद्दों पर भी सवाल किए.

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राज ठाकरे ने इस दौरान बताया कि उनकी पार्टी संकट के समय हिंदुओं के साथ खड़ी रही है. लेकिन 'मराठी पहचान' उनकी पहली प्राथमिकता है. उन्होंने कहा कि भाषाई गौरव महाराष्ट्र की रगों में है और जब भी इसकी संस्कृति को ठेस पहुंचेगी, राज्य इसका कड़ा विरोध करता रहेगा.

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