RSS चीफ मोहन भागवत ने आरएसएस के शताब्दी समारोह कार्यक्रम में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह स्थान श्रद्धा का माना जाता है जहाँ चुनाव नहीं होते. लोग उस आसन के प्रति अपनी श्रद्धा रखते हैं न कि व्यक्ति के लिए. नियुक्ति ऐसे होती है कि निवृत्ति कभी भी हो सकती है, लेकिन जीवन भर कार्य से निवृत्ति नहीं होती.