महाराष्ट्र में ओला, ऊबर, ई-रिक्शा के लिए नए नियम, सर्ज प्राइसिंग और सिक्योरिटी पर फोकस

महाराष्ट्र सरकार ने ऐप-आधारित एग्रीगेटर्स जैसे ओला, उबर और ई-रिक्शा के लिए ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं. इसमें सर्ज प्राइसिंग और किराए पर कंट्रोल, ड्राइवरों के काम के घंटे और ट्रेनिंग, यात्रियों की सुरक्षा, दिव्यांगों के लिए एक्सेसिबिलिटी फीचर्स और नए लाइसेंस व शुल्क शामिल हैं.

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ड्राइवरों की ट्रेनिंग होगी अनिवार्य (File Photo: ITG) ड्राइवरों की ट्रेनिंग होगी अनिवार्य (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 अक्टूबर 2025,
  • अपडेटेड 3:56 AM IST

महाराष्ट्र सरकार ने शुक्रवार को ऐप-आधारित एग्रीगेटर्स के लिए ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं. ये नियम सार्वजनिक परिवहन वाहनों के ऑपरेटर्स को नियम के मुताबिक कंट्रोल करने के मकसद से जारी किए गए हैं. इन नियमों में सर्ज प्राइसिंग को सीमित करने, किराये को कम करने पर रोक लगाने और ड्राइवरों के काम के घंटे सीमित करने जैसे प्रावधान शामिल हैं. राज्य सरकार ने 17 अक्टूबर तक इन ड्राफ्ट नियमों पर हितधारकों से आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं.

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ये नियम ओला, ऊबर और ई-रिक्शा जैसे सभी यात्री मोटर वाहन एग्रीगेटर्स पर लागू होंगे. इन ड्राफ्ट नियमों में दिव्यांग यात्रियों के लिए अनिवार्य एक्सेसिबिलिटी फीचर्स शामिल हैं. 

इसका मकसद ऐप-आधारित परिवहन सेवाओं में अधिक अनुशासन, पारदर्शिता और यात्री सुरक्षा लाना है.

सर्ज प्राइसिंग और किराया कटौती पर नई सीमा

ड्राफ्ट नियमों के मुताबिक, सर्ज प्राइसिंग क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (RTA) द्वारा तय किए गए मूल किराए के 1.5 गुना से ज्यादा नहीं हो सकती है. इसके साथ ही, कम मांग के दौरान किराए को मूल दर के 25 फीसदी से नीचे करना भी प्रतिबंधित है. मौजूदा वक्त में, नियमों के अभाव में किराये में बढ़ोतरी पर राज्य सरकार का कोई कंट्रोल नहीं है. इसके अलावा, यात्रियों से लिया जाने वाला सुविधा शुल्क मूल किराए के 5 फीसदी से ज्यादा नहीं होना चाहिए, और कुल कटौती 10 फीसदी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए.

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ड्राइवरों के लिए काम की सीमा और ट्रेनिंग

ड्राफ्ट नियमों में यह भी तय किया गया है कि ड्राइवर हर रोज अधिकतम 12 घंटे तक ही ऐप में लॉग इन रह सकेंगे, जिसके बाद 10 घंटे का अनिवार्य आराम देना होगा. ऑनबोर्डिंग से पहले, ड्राइवरों को 30 घंटे का ओरिएंटेशन और मोटिवेशन ट्रेनिंग प्रोग्राम पूरा करना होगा. पांच में से दो स्टार से कम औसत रेटिंग वाले ड्राइवरों को सुधारात्मक प्रशिक्षण लेना होगा और मंच से तब तक निलंबित रहना होगा जब तक वे ऐसा नहीं करते.

यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा पर फोकस

यात्रियों को अक्सर राइड रद्द होने की समस्या का सामना करना पड़ता है, जब ड्राइवर गंतव्य जानने के बाद यात्रा नहीं करना चाहते. इन नियमों के मुताबिक, ड्राइवर को राइड स्वीकार करने से पहले यात्री का गंतव्य नहीं दिखना चाहिए. एग्रीगेटर ऐप्स को लाइव लोकेशन शेयरिंग और ट्रिप स्टेटस ट्रैकिंग की अनुमति देनी होगी. ऐप्स को ₹5 लाख तक का यात्रा बीमा कवरेज प्रदान करना भी अनिवार्य होगा.

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नए लाइसेंस, शुल्क और सुरक्षा जमा

राज्य परिवहन प्राधिकरण (STA) या RTA से नया लाइसेंस प्राप्त करते वक्त, एग्रीगेटर्स को क्रमशः ₹10 लाख और ₹2 लाख का शुल्क देना होगा. नवीनीकरण के लिए उन्हें ₹25,000 या ₹5,000 का भुगतान करना होगा. उन्हें वाहनों की संख्या के आधार पर सिक्योरिटी जमा भी रखनी होगी: 1,000 वाहनों तक के लिए ₹10 लाख, 10,000 वाहनों तक के लिए ₹25 लाख, और 10,000 से अधिक वाहनों के लिए ₹50 लाख.

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वाहन की आयु और भाषा...

ऑटो और कैब के मामले में नौ साल से कम और बसों के मामले में आठ साल से कम पुराने वाहन ही संचालन के लिए पात्र होंगे. एग्रीगेटर ऐप्स को मराठी, हिंदी और अंग्रेजी भाषाओं में उपलब्ध होना भी जरूरी होगा. परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा कि ये नियम ड्राइवरों के शोषण को रोकने और सेवा की गुणवत्ता को बढ़ाने में मदद करेंगे.

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