मराठा आरक्षण का हो सकता है ऐलान, CM फडणवीस ने दिए संकेत

मराठों के आरक्षण की मांग 1980 के दशक से लंबित पड़ी है. राज्य पिछड़ा आयोग ने 25 विभिन्न मानकों पर मराठों के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक आधार पर पिछड़ा होने की जांच की. इसमें से सभी मानकों पर मराठों की स्थिति दयनीय पाई गई.

Advertisement
महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस (फोटो- aajtak.in) महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस (फोटो- aajtak.in)

राम कृष्ण

  • मुंबई,
  • 15 नवंबर 2018,
  • अपडेटेड 4:14 PM IST

महाराष्ट्र में मराठों को जल्द ही आरक्षण दिया जा सकता है. सूबे के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसके साफ संकेत दिए हैं. महाराष्ट्र पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट के बाद गुरुवार को सीएम फडणवीस ने कहा कि जो 26 तारीख को आंदोलन की योजना बना रहे हैं, उनको अब एक दिसंबर को जश्न की तैयारी करनी चाहिए. माना जा रहा है कि राज्य सरकार एक दिसंबर से पहले मराठा आरक्षण की घोषणा कर सकती है.

Advertisement

इसके साथ ही मराठों को राज्य में शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी नौकरी में आरक्षण मिलने लगेगा. इससे पहले पिछड़ा आयोग की रिपोर्ट में मराठा समुदाय को सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक आधार पर पिछड़ा माना गया था. इसके बाद ने कहा था, 'हम इस रिपोर्ट पर कैबिनेट मीटिंग में चर्चा करेंगे. हम मराठों को आरक्षण देने के लिए बिल लाएंगे और विधानसभा से कानून पारित करवाएंगे. अगर कोई इस कानून को कोर्ट में चुनौती देगा, तो ही हम यह रिपोर्ट कोर्ट में पेश करेंगे.'

बता दें कि मराठों के आरक्षण की मांग 1980 के दशक से लंबित पड़ी है. राज्य पिछड़ा आयोग ने 25 विभिन्न मानकों पर मराठों के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक आधार पर पिछड़ा होने की जांच की. इसमें से सभी मानकों पर मराठों की स्थिति दयनीय पाई गई. इस दौरान किए गए सर्वे में 43 हजार मराठा परिवारों की स्थिति जानी गई. इसके अलावा जन सुनवाइयों में मिले करीब 2 करोड़ ज्ञापनों का भी अध्ययन किया गया.

Advertisement

महाराष्ट्र सरकार को सौंपी गई अपनी रिपोर्ट में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की कि मराठों को मौजूदा अन्य पिछड़ी जातियों के 27 फीसदी कोटे को बढ़ाकर दिया जा सकता है. इसमें सरकार का ध्यान 'नागराज केस' की ओर भी खींचा गया है, जिसके हवाले से कहा गया कि राज्य सरकार आरक्षण के कोटे को बढ़ाकर 50 फीसदी से ज्यादा भी नहीं कर सकती है, जो सुप्रीम कोर्ट की तय की गई सीमा है.

आयोग के सूत्रों ने कहा, 'आयोग ने सरकार से यह नहीं कहा है कि मराठों को कितना आरक्षण दिया जाना चाहिए. कोटा फिक्स करना सरकार का विशेषाधिकार है. मालूम हो कि मराठा 16 फीसदी आरक्षण की मांग कर रहे थे. साल 2016 से लेकर इस मामले में पूरे राज्य में 58 मार्च निकाले गए. हाल ही में मराठों का उग्र विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिला था. यह मामला कोर्ट के सामने लंबित होने से सरकार ने पिछड़े आयोग को मराठा समुदाय की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति जानने की जिम्मेदारी दी थी.

के लिए मुसीबत तब और बढ़ गई थी, जब राज्य के एक ओबीसी धड़े ने कहा कि मराठा समुदाय को 27 फीसदी कोटे से अलग आरक्षण दिया जाना चाहिए. इसके अलावा औरंगाबाद जिले में काकासाहेब शिंदे ने आरक्षण की मांग को लेकर एक नहर में कूदकर जान दे दी थी. मराठा समुदाय को आरक्षण की मांग को लेकर ही राज्य में नौ लोगों ने आत्महत्या कर ली थी.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement