MP: मंडी से अधिक रेट में 2 करोड़ की फसल खरीदी, चेक बाउंस, 2 दर्जन किसानों को चूना लगा फरार ट्रेडर्स

मध्य प्रदेश के हरदा जिले में एक कंपनी ने करीब दो दर्जन किसानों के साथ फसल का समझौता किया, लेकिन बाद में व्यापारी बिना भुगतान किए हुए फरार हो गए.

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नए कृषि कानून आने के बाद का है मामला (फाइल फोटो) नए कृषि कानून आने के बाद का है मामला (फाइल फोटो)

लोमेश कुमार गौर

  • हरदा ,
  • 30 दिसंबर 2020,
  • अपडेटेड 3:48 PM IST
  • MP के हरदा में किसानों से धोखाधड़ी
  • ट्रेडर्स ने फसल लेने के बाद नहीं चुकाई कीमत

कृषि कानून को लेकर जारी आंदोलन के बीच मध्य प्रदेश से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. मध्य प्रदेश के हरदा जिले में एक कंपनी ने करीब दो दर्जन किसानों के साथ फसल का समझौता किया, लेकिन बाद में बिना भुगतान किए हुए फरार हो गए. दो दर्जन किसानों से मूंग-चना के लिए करीब 2 करोड़ रुपये का समझौता हुआ, लेकिन कंपनी ने चूना लगा दिया. 

दरअसल, हरदा के देवास में 22 किसानों ने खोजा ट्रेडर्स से समझौता किया था. लेकिन जब भुगतान का वक्त आया तो ट्रेडर्स का पता ही नहीं लगा. जब किसानों ने ट्रेडर्स का पता लगाया तो मालूम चला कि तीन महीने के अंदर ही उन्होंने अपनी कंपनी का रजिस्ट्रेशन खत्म कर दिया है. अब इस मामले में खातेगांव पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराई गई है, जबकि प्रशासन को लिखित शिकायत दी गई है. 

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किसानों का दावा है कि आसपास के इलाकों में करीब 100-150 किसानों के साथ इस तरह की घटना हुई है. किसानों को इस मामले में शक तब हुआ जब ट्रेडर्स द्वारा दिया गया चेक ही बाउंस कर गया. खोजा ट्रेडर्स ने उन्हें मंडी रेट से 700 रुपये कुंतल अधिक दाम देने की बात कही थी.

किसानों ने पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में कहा है कि खोजा ट्रेडर्स के दो भाइयों ने अपना लाइसेंस दिखाकर हमसे फसल ले ली और पैसे देने की बात कही. लेकिन जब पैसा नहीं आया, तो उन्होंने मंडी में संपर्क किया और वहां पता लगा कि अब उनका रजिस्ट्रेशन ही नहीं है. देवास के कलेक्टर का इस विवाद पर कहना है कि पुलिस की मदद से उन्होंने ट्रेडर्स का पता लगाना शुरू कर दिया है.

रजिस्ट्रेशन और शिकायत पर विवाद है जारी
ऐसा मामला सामने आने के बाद अब कृषि कानून के दो प्रावधानों पर ध्यान जाने लगा है, जिसमें प्राइवेट मार्केट में रजिस्ट्रेशन और विवाद को सुलझाने का मसला है. नए कृषि कानूनों के तहत किसान-कंपनी का समाधान SDM करा सकता है. आंदोलन कर रहे किसान भी इन दो मुद्दों पर विरोध कर रहे हैं, जिनमें प्राइवेट ट्रेडर्स के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया मजबूत हो और कोई विवाद होने पर स्थानीय कोर्ट में जाने का रास्ता मिल सके. 

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संयुक्त कलेक्टर बोले- उचित कार्रवाई की जाएगी 

संयुक्त कलेक्टर श्यामेंद्र जायसवाल ने कहा कि नए कानून के तहत एसडीएम प्राधिकृत अधिकारी है, उनके द्वारा मामले में कार्रवाई की जाएगी.

 

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