शिवराज पर दिग्विजय का निशाना, कहा- बासमती की टैगिंग के लिए बयानबाजी के सिवा कुछ नहीं किया

दिग्विजय सिंह ने सीएम शिवराज पर निशाना साधते हुए कहा है कि आपने बासमती की टैगिंग को लेकर बयानबाजी के सिवा कुछ नहीं किया है. जबकि प्रदेश में दिसम्बर 2003 से अब तक करीब सोलह साल से प्रदेश में आप की सरकार है.

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शिवराज सरकार पर हमलावर हुए दिग्विजय (फाइल फोटो) शिवराज सरकार पर हमलावर हुए दिग्विजय (फाइल फोटो)

रवीश पाल सिंह

  • भोपाल,
  • 18 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 7:08 AM IST

  • बासमती की टैगिंग को लेकर बयानबाजी के सिवा कुछ नहीं
  • सात साल से मोदी प्रधानमंत्री, फिर भी नहीं दिला पाए मान्यता

बासमती चावल को जीआई टैग देने को लेकर मध्य प्रदेश में सियासत शुरू हो गई है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने सीएम शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधते हुए कहा है कि आपने बासमती की टैगिंग को लेकर बयानबाजी के सिवा कुछ नहीं किया है. जबकि प्रदेश में दिसम्बर 2003 से अब तक (विगत सवा साल छोड़कर) करीब सोलह साल से प्रदेश में आप की सरकार है.

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उन्होंने कहा कि समाचार पत्रों से जानकारी मिली है कि प्रदेश में बासमती धान का उत्पादन करने वाले किसानों के प्रति आप एकाएक बहुत चिंतित और विचलित हो रहे हैं. आपकी वेदना है कि प्रदेश के किसानों द्वारा पैदा की जा रही बासमती को अभी तक एपीडा संस्था (कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण) से जीआई टेग नहीं मिल पा रहा है.

दिग्विजय सिंह ने आगे कहा, 'आप प्रदेश के किसानों के इतने बड़े शुभचिंतक हैं. दिसम्बर 2003 से लेकर विगत सवा साल छोड़कर करीब सोलह साल से प्रदेश में आप की सरकार है. बासमती की टैगिंग को लेकर आपने बयानबाजी के सिवा कुछ नहीं किया. यही नहीं बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का भी सातवां साल चल रहा है. प्रधानमंत्री मोदी को आप देश के लिये ईश्वर का वरदान कहते नहीं थकते, फिर क्या कारण है कि आप अपनी ही पार्टी के नेता नरेंद्र मोदी से मध्य प्रदेश के बासमती उत्पादक किसानों को उनका हक नहीं दिला पाये.'

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उन्होंने आगे कहा कि जिस बुधनी क्षेत्र से आप विगत 30 वर्षों से जनप्रतिनिधि हैं. वहां के किसानों को भी आप साल-दर साल सिर्फ आश्वासन दे रहे हैं. प्रदेश के धान उत्पादक किसान आपके आंसुओं को अब घड़ियाली आंसू की संज्ञा दे रहे हैं. आप 14 सालों से प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं और अपने आप को किसानों का हमदर्द बताने में भी नहीं थकते हैं. अभी तक प्रदेश के किसानों द्वारा उत्पादित बासमती चावल ही नहीं शरबती गेहूं, ज्वार, बाजरा और कोदा-कुटकी को भी जीआई टैग क्यों नहीं मिल पाया है.

आखिर में दिग्विजय सिंह ने कहा, 'आपसे अनुरोध है कि प्रदेश के किसानों के हित में बासमती चावल सहित अन्य कृषि उत्पादकों की उनकी श्रेष्ठता के आधार पर जीआई टैग दिलवाए जाने हेतु आप दिल्ली चलिये और सभी सांसदों के साथ प्रधानमंत्री आवास पर धरना दीजिये. दलीय राजनीति से हटकर मैं भी आपके धरने में शामिल होने के लिये तैयार हूं. आप यदि प्रधानमंत्री के समक्ष किसानों की मांग को लेकर धरना देने तैयार हों तो कृपया तारीख से अवगत कराने का कष्ट करें.'

इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी इस मुद्दे को लेकर शिवराज सरकार को घेरा. उन्होंने कहा कि बीजेपी ने कभी भी मध्य प्रदेश के बासमती को जीआई टैग मिलने की लड़ाई को गंभीरता से नहीं लिया. कमलनाथ ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, 'बीजेपी हर मामले में झूठ बोलने और झूठ फैलाने में माहिर है. मध्य प्रदेश के बासमती चावल को जीआई टैग मिले, मैं और मेरी सरकार सदैव से इसकी पक्षधर रहे हैं और मैं आज भी इस बात का पक्षधर हूं कि यह हमें ही मिलना चाहिए. मैं सदैव प्रदेश के किसानों के साथ खड़ा हूं, उनके हितों के लिए लड़ता रहूंगा. इसमें कोई सोचने वाली बात ही नहीं है. बासमती चावल को जीआई टैग मिले, इसकी शुरुआत ऐपिडा ने नवंबर 2008 में की थी.'

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उन्होंने आगे कहा, उसके बाद 10 वर्षों तक प्रदेश में बीजेपी की सरकार रही, जिसने इस लड़ाई को ठीक ढंग से नहीं लड़ा और जिसके कारण हम इस मामले में पिछड़े. केंद्र और राज्य में बीजेपी की सरकार के दौरान ही 5 मार्च 2018 को जीआई रजिस्ट्री ने मध्य प्रदेश को बासमती उत्पादक राज्य मानने से इनकार किया. प्रदेश हित की इस लड़ाई में अपनी सरकार के दौरान 10 वर्ष पिछड़ने वाले आज हमारी 15 माह की सरकार पर झूठे आरोप लगा रहे हैं, कितना हास्यास्पद है.

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