शोपियां एनकाउंटर पर उठे थे सवाल, अब सेना करा रही कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी

सेना की ओर से कहा गया है कि हम आतंक के खिलाफ ऑपरेशन में नैतिक आचरण के लिए प्रतिबद्ध हैं. ऐसे मामलों में जब भी संदेह जताया जाता है, कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप उसकी जांच कराई जाती है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर (पीटीआई) प्रतीकात्मक तस्वीर (पीटीआई)

शुजा उल हक

  • श्रीनगर,
  • 18 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 6:31 PM IST

  • 18 जुलाई को मुठभेड़ में मारे गए थे 3 आतंकी
  • सेना बोली- नैतिक आचरण के लिए प्रतिबद्ध हैं

जम्मू-कश्मीर के शोपियां में सेना ने मुठभेड़ में तीन आतंकियों को मार गिराने का दावा किया था. 18 जुलाई को हुई इस मुठभेड़ पर लोगों ने सवाल उठाए थे. तीन परिवार के लोग सामने आए और यह दावा किया कि जिन्हें आतंकी बता मुठभेड़ में मारने का दावा किया जा रहा है, वे उनके परिजन थे. वे आतंकी नहीं, निर्दोष नागरिक थे. मुठभेड़ पर सवाल उठे तो सेना ने उच्च स्तरीय कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी (सीओआई) शुरू करा दिया है.

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सेना की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक 11 अगस्त को शोपियां के अमशीपुरा में हुई मुठभेड़ की सीओआई कराने का निर्णय लिया गया. जांच जारी है. प्रमुख गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं. जांच की प्रगति पर भी बारीकी से नजर रखी जा रही है. सेना से मिली जानकारी के मुताबिक अतिरिक्त गवाहों को सीओआई से पहले हटाने के लिए कहा गया है. जम्मू-कश्मीर पुलिस के सहयोग से मारे गए तीनों को निर्दोष नागरिक और अपना परिजन बताने वाले लोगों के डीएनए सैंपल मिलान के लिए भेजे जा चुके हैं.

सेना की ओर से कहा गया है कि हम आतंक के खिलाफ ऑपरेशन में नैतिक आचरण के लिए प्रतिबद्ध हैं. ऐसे मामलों में जब भी संदेह जताया जाता है, कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप उसकी जांच कराई जाती है. सेना की ओर से यह भी कहा गया है कि जांच जारी रहने तक कानूनी प्रक्रिया को प्रभावित किए बिना समय-समय पर जानकारी साझा की जाती रहेगी.

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बता दें कि सेना ने तीन आतंकियों को मार गिराया था. इनके शव दफना भी दफना दिए गए थे, लेकिन मुठभेड़ पर सवाल उठे तो तीनों शव कब्र से निकाले गए और डीएनए परीक्षण के लिए नमूने भेजे गए. बता दें कि सुरक्षाबल जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ अभियान चला रही है.

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