बुलेट ट्रेन: सूरत पहुंचे जापानी अफसर, जमीन अधिग्रहण पर किसानों से करेंगे बात

इसी साल 18 सितंबर को किसानों और जमीन मालिकों ने JICA को पत्र लिखकर कहा था कि बुलेट ट्रेन के लिए जमीन अधिग्रहण JICA के निर्देशों के विपरीत की जा रही है. किसानों का आरोप है कि जमीन अधिग्रहण के लिए केंद्र जमीन अधिग्रहण कानून 2013 के नियमों का भी सरासर उल्लंघन किया जा रहा है.

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aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 07 दिसंबर 2018,
  • अपडेटेड 7:50 AM IST

पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट बुलेट ट्रेन को पटरी पर लाने के लिए जापान ने अब सीधे भारतीय किसानों से बात करने का फैसला किया है. इसी सिलसिले में बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को फंड देने वाली संस्था जापान इंटरनेशनल को-ऑपरेशन एजेंसी (JICA) के प्रतिनिधि शुक्रवार को सूरत में प्रदर्शन कर रहे किसानों से मुलाकात करेंगे.

बता दें कि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के लिए जमीन अधिग्रहण का किसान जोरदार विरोध कर रहे हैं. शुक्रवार को JICA के अधिकारी जमीन मालिक किसानों से मिलेंगे और उनका पक्ष जानने के बाद विवाद का समाधान करने की कोशिश करेंगे.

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बता दें कि इसी साल 18 सितंबर को किसानों और जमीन मालिकों ने JICA को पत्र लिखकर कहा था कि बुलेट ट्रेन के लिए जमीन अधिग्रहण JICA के निर्देशों के विपरीत की जा रही है. किसानों का आरोप है कि जमीन अधिग्रहण के लिए केंद्र जमीन अधिग्रहण कानून 2013 के नियमों का भी सरासर उल्लंघन किया जा रहा है.

पीड़ित किसानों के पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील आनंद याज्ञनिक ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि किसानों की अपील पर JICA के मुख्य प्रतिनिधि कैटुओ मैटसुमोटो और दूसरे सदस्य सूरत में किसानों से मिलने को तैयार हो गए हैं.

बता दें कि पीएम मोदी ने बहुचर्चित बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को भारत-जापान की दोस्ती के दौर पर प्रचारित किया गया है. जापान इस प्रोजेक्ट को निर्धारित समय यानी की 2022 तक हर हाल में पूरा करना चाहता है. इस लिहाज से प्रोजेक्ट की हर बाधा को दूर करने के लिए जापानी अधिकारी बढ़-चढ़ कर पहल कर रहे हैं.

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किसानों के संगठन खेदुत समाज के प्रतिनिधि भी जापानी अधिकारियों के साथ मीटिंग में शिरकत करेंगे. शुक्रवार को JICA के अधिकारी उन जमीनों का भी दौरा करेंगे जिसका अधिग्रहण किया जाना है. 8 दिसंबर को JICA के अधिकारी अलग-अलग जिलों के किसानों और जमीन के मालिकों के साथ बैठक करेंगे.

बता दें कि 500 किलोमीटर लंबे बुलेट ट्रेन के इस प्रोजेक्ट के लिए लगभग 1400 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण गुजरात और महाराष्ट्र में किया जाना है. रिपोर्ट के मुताबिक 1400 हेक्टेयर में 1120 हेक्टेयर जमीन निजी है.

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