साकेत हादसा: मौत सामने थी, फिर भी अंदर गईं 'पार्वती आंटी', छात्रों को बचाते-बचाते चली गई जान

दिल्ली के महरौली में हुए दर्दनाक इमारत हादसे में मलबे के नीचे दबने से 'पार्वती आंटी' की मौत हो गई. इलाके के छात्रों और ऑफिस जाने वालों के बीच वे बेहद लोकप्रिय थीं. उनके अचानक चले जाने से पूरा क्षेत्र सदमे में है, क्योंकि उनकी यह छोटी सी कैंटीन सालों से सैकड़ों लोगों के लिए एक दूसरे घर जैसी बन चुकी थी.

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पार्वती आंटी के निधन की खबर से उन्हें जानने वाले सभी लोग गहरे शोक में डूब गए हैं. (Photo: ITG) पार्वती आंटी के निधन की खबर से उन्हें जानने वाले सभी लोग गहरे शोक में डूब गए हैं. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 जून 2026,
  • अपडेटेड 11:18 PM IST

दक्षिण दिल्ली के महरौली इलाके में पांच मंजिला इमारत गिरने के हादसे में छह लोगों की दर्दनाक मौत हो गई. इस हादसे के बीच एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को भावुक कर दिया. अपनी छोटी कैंटीन चलाने वाली 'पार्वती आंटी' खुद सुरक्षित बाहर निकल आई थीं, लेकिन अंदर मौजूद छात्रों को बाहर बुलाने के लिए दोबारा कैंटीन में चली गईं. इसी दौरान इमारत का मलबा कैंटीन पर गिर पड़ा और उनकी जान चली गई.

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पार्वती आंटी मूल रूप से नेपाल की रहने वाली थीं. वह महरौली में ढही पांच मंजिला इमारत के पास टिन की छत वाली एक छोटी सी कैंटीन चलाती थीं. इलाके के तमाम छात्र व ऑफिस जाने वाले लोग उन्हें इसी नाम से बड़े प्यार से बुलाते थे. उनकी यह जगह अपने सस्ते और घर जैसे स्वादिष्ट खाने के लिए काफी मशहूर थी.

पार्वती आंटी के जीजा हरि प्रसाद ओझा ने उस खौफनाक पल को याद करते हुए बताया कि हादसे से ठीक पहले पार्वती ने 12 आलू पराठे तथा 4 कोल्ड कॉफी का एक ऑर्डर तैयार किया ही था कि अचानक पूरी जमीन तेजी से हिलने लगी. खतरा भांपकर वहां मौजूद लोग तुरंत बाहर की तरफ भागे, क्योंकि बगल की पांच मंजिला इमारत भरभराकर ढहने लगी थी, जिससे साफ था कि इसकी चपेट में यह कैंटीन भी आ जाएगी.

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कैंटीन में काम करने वाले एक कर्मचारी के मुताबिक, उस वक्त अंदर करीब 12 से 13 लोग मौजूद थे जिनमें कई छात्र भी शामिल थे. पार्वती आंटी एक बार सुरक्षित बाहर निकल आई थीं, लेकिन अंदर फंसे बच्चों को सचेत करने के लिए वे दोबारा भीतर की तरफ दौड़ीं. उन्होंने बच्चों को आवाज देकर बाहर निकालने की कोशिश ही की थी कि अचानक इमारत का भारी-भरकम मलबा उस जगह पर आ गिरा, जिसके बाद वे कभी लौटकर बाहर नहीं आ सकीं.

पूरे इलाके की चहेती थीं पार्वती आंटी

महरौली में पढ़ने वाले छात्रों और वहां काम करने वाले लोगों के लिए पार्वती आंटी की कैंटीन बिल्कुल दूसरे घर जैसी थी. यहां खासकर मेडिकल की तैयारी करने वाले बच्चे अक्सर खाना खाने पहुंचते थे. स्थानीय लोगों का कहना है कि वह सिर्फ खाना ही नहीं खिलाती थीं, बल्कि हर किसी का हालचाल भी पूछती थीं. इसी खास अपनेपन की वजह से वे पूरे इलाके में सबकी चहेती बन चुकी थीं.

रातभर चला रेस्क्यू ऑपरेशन

हादसे के बाद NDRF समेत कई टीमों ने रातभर रेस्क्यू अभियान चलाया. शुरुआत में चार-पांच लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, लेकिन पार्वती आंटी मलबे के नीचे दबी रह गईं. काफी देर बाद उन्हें बाहर निकालकर एम्स ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. रेस्क्यू के दौरान छात्र और स्थानीय लोग लगातार यही पूछते रहे कि 'पार्वती आंटी मिल गईं क्या?'

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जांच में सामने आया है कि जिस पांच मंजिला इमारत के गिरने से हादसा हुआ, वहां निर्माण कार्य चल रहा था. हालांकि, हादसे की असली वजह अभी साफ नहीं हो पाई है. मामले में एमसीडी के दो इंजीनियरों को सस्पेंड कर दिया गया है. इस दर्दनाक हादसे के बाद पुलिस और प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है. घटना के बाद से फरार चल रहे बिल्डिंग मालिक करमवीर को गिरफ्तार कर लिया गया है.

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