दिल्ली के मुख्य सचिव की याचिका पर HC का केंद्र, दिल्ली सरकार को नोटिस

दिल्ली के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश और दिल्ली सरकार के बीच गतिरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है. एक बार फिर विधानसभा समितियों के सामने पेश होने को लेकर अंशु प्रकाश ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.

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दिल्ली के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश (फाइल फोटो: पीटीआई) दिल्ली के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश (फाइल फोटो: पीटीआई)

पूनम शर्मा / विवेक पाठक

  • नई दिल्ली,
  • 14 नवंबर 2018,
  • अपडेटेड 4:00 PM IST

दिल्ली के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश ने एक बार फिर दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा फिर खटखटाया है. अंशु प्रकाश ने विधानसभा कमेटियों के सामने पेश न होने पर मिले नोटिस को कोर्ट में चुनौती दी है. अंशु प्रकाश की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाइकोर्ट ने दिल्ली सरकार, विधानसभा की 4 कमेटियों, केंद्र सरकार और एलजी को नोटिस देकर जवाब मांगा है.

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हाल ही मे अंशु प्रकाश को विधानसभा की कमेटियों की तरफ से 2 बार पेश न होने पर नोटिस दिया गया था, जबकि हाई कोर्ट पहले ही अंशु प्रकाश को इन विधानसभा की कमेटियों के सामने पेश होने पर रोक लगा चुका है. अंशु प्रकाश के वकील ने कोर्ट को कहा कि उनको लगातार परेशान करने की कोशिश की जा रही है, जबकि वह सीधे तौर पर कोर्ट के आदेशों का पालन कर रहे हैं.

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट में दिल्ली सरकार ने कहा कि जिन 11 लोगों को अंशु प्रकाश की एफआईआर में आरोपी बनाया गया है, वो इन विधानसभा कमेटियों का हिस्सा ही नहीं है, फिर अंशु प्रकाश को कमेटी के सामने पेश होने में क्या दिक्कत है?

अंशु प्रकाश के वकील ने कहा कि अखिलेश पति त्रिपाठी, चौधरी फतेह सिंह, सौरभ भारद्वाज जैसे लोग इन विधानसभा कमेटियों का हिस्सा है जिन्होंने चीफ सेक्रेटरी की शिकायत की हुई है और अगर अंशु प्रकाश खुद नहीं जा रहे है तो अपने सेक्रेटरी को जरूर भेजते हैं. लेकिन फिर ये लोग मीटिंग ही कैंसिल कर देते है और फिर अंशु प्रकाश को पेश होने के लिए नोटिस भेज देते हैं. कोर्ट ने कहा कि ये अभूतपूर्व स्थिति है. जहां एक तरफ कमेटी के मेंबर अंशु प्रकाश की शिकायत करते हैं और दूसरी तरफ उन्हें अपने सामने पेश होने का नोटिस दे रहे हैं. कोर्ट अब इस मामले में 27 नवंबर को सुनवाई करेगा.

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इससे पहले भी अंशु प्रकाश विधानसभा समितियों से मिले नोटिस को कोर्ट में चुनौती दे चुके हैं. कोर्ट ने उन्हें समितियों के सामने कुछ शर्तों के साथ पेश होने के निर्देश दिए थे, जिसमें मीटिंग के वक्त की वीडियो रिकॉर्डिंग को कोर्ट में जमा करने के आदेश दे दिए गए थे. लेकिन विधानसभा समितियों ने ये कहकर कोर्ट का निर्देश मानने से मना कर दिया कि वीडियो रिकॉर्डिंग मांगना कोर्ट के कार्यक्षेत्र से बाहर की चीज है, लिहाजा कोर्ट को रिकॉर्डिंग नहीं दी जा सकती. जिसके बाद कोर्ट ने अंशु प्रकाश के विधानसभा समितियों के सामने पेश होने के अपने आदेश को वापस ले लिया था.

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