दिल्ली शराब घोटाला: केजरीवाल-सिसोदिया की रिहाई के आदेश पर रोक लगाने से HC का इनकार

दिल्ली शराब घोटाला मामले को आज हाई कोर्ट में सुनवाई हुई. पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सहित 23 आरोपियों को राउज एवेन्यू कोर्ट ने बरी कर दिया था. जिसके बाद सीबीआई ने इस फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी.

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CBI ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी थी. (Photo: PTI) CBI ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी थी. (Photo: PTI)

अनीषा माथुर / संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 09 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 2:45 PM IST

दिल्ली शराब घोटाला मामले में हाई कोर्ट ने निचली अदालत के डिस्चार्ज ऑर्डर पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सहित सभी 23 आरोपियों को कोर्ट ने आरोप मुक्त कर दिया गया था. इसके बाद सीबीआई ने दिल्ली हाई कोर्ट में निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी थी.

सोमवार को हुई सुनवाई के में सीबीआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता अदालत में पेश हुए. उन्होंने अदालत को बताया कि दिल्ली शराब घोटाला मामले की वैज्ञानिक तरीके से जांच की गई. उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली की आबकारी नीति में जानबूझकर हेरफेर किया गया था.

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सीबीआई ने ये भी दावा किया कि दिल्ली शराब घोटाले के जरिए रिश्वत की रकम को हवाला लेनदेन के जरिए ट्रांसफर किया गया था.

'राजधानी के इतिहास के सबसे बड़े घोटाले...'

मेहता ने कहा, 'ये देश की राजधानी के इतिहास के सबसे बड़े घोटालों में से एक है, मैं इसे एक राष्ट्रीय शर्म कहूंगा. कुछ खास व्यापारियों को फायदा पहुंचाने के लिए जानबूझकर एक ऐसी नीति तैयार की गई, जिसमें हेरफेर मुमकिन था.'

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सीबीआई ने दिए ये तर्क

एसजी तुषार मेहता ने गवाहों के बयानों के बारे में बात करते हुए कहा कि सीआरपीसी की धारा 161 और 164 के बयानों में गुणवत्ता का फर्क होता है. धारा 164 के तहत गवाह को मजिस्ट्रेट के सामने ले जाया जाता है. वहां मजिस्ट्रेट पूछते हैं कि उन पर कोई दबाव तो नहीं है.

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उन्होंने कहा, 'हमारे पास धारा 164 के तहत दर्ज ऐसे गवाहों के बयान हैं, जो विस्तार से बताते हैं कि कैसे साजिश रची गई, कैसे पैसा एक हाथ से दूसरे हाथ में गया और कैसे रिश्वत दी गई.'

हाई कोर्ट का डिस्चार्ज ऑर्डर पर रोक लगाने से इनकार

दिल्ली हाई कोर्ट ने फिलहाल निचली अदालत के डिस्चार्ज ऑर्डर पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. हालांकि, कोर्ट ने निचली अदालत के सीबीआई और उसके अधिकारियों के खिलाफ की गई तीखी टिप्पणियों पर रोक लगा दी है. 

16 मार्च को होगी अगली सुनवाई

कोर्ट ने इस मामले में सभी 23 पक्षों को नोटिस जारी कर हफ्ते भर में अपना रुख स्पष्ट करने को कहा है. हाई कोर्ट ने सीबीआई की अपील को स्वीकार करते हुए सभी आरोपियों से जवाब मांगा है. मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी.

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ईडी की कार्यवाही टाली

तुषार मेहता ने अदालत से अपील की कि इस फैसले का असर ईडी की जांच पर नहीं पड़ना चाहिए, क्योंकि इससे मनी लॉन्ड्रिंग का मामला भी प्रभावित हो सकता है. इस पर संज्ञान लेते हुए हाई कोर्ट ने निर्देश दिया है कि निचली अदालत में चल रही ईडी मामले की कार्यवाही को तब तक के लिए टाल दिया जाए, जब तक कि सीबीआई की इस याचिका पर फैसला नहीं हो जाता.

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