1984 दंगा: सज्जन कुमार की जज बदलने की अपील दिल्ली HC ने की खारिज

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि इस तरह की आधारहीन याचिकाओं के कोर्ट में आने से उन मामलों में फैसले समय पर नहीं आ पाते. कोर्ट याचिकाकर्ता सज्जन कुमार और महेंद्र सिंह पर जुर्माना लगाना चाहती है, लेकिन जुर्माना इसलिए नहीं लगाया जा रहा क्योंकि इससे 1984 दंगों से जुड़े मामले में फैसला देने में और देर होगी.

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पूनम शर्मा / सुरभि गुप्ता

  • नई दिल्ली,
  • 04 नवंबर 2016,
  • अपडेटेड 4:19 PM IST

1984 सिख दंगे के मामले में आरोपी रहे कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद सज्जन कुमार की जज बदलने की दायर की गई याचिका को दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है. हाई कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने जज बदलने के लिए दो तर्क दिए हैं, वो बेबुनियाद हैं और सिर्फ केस को लंबा खींचने की कोशिश है.

हाई कोर्ट ने कहा कि इस तरह की आधारहीन याचिकाओं के कोर्ट में आने से उन मामलों में फैसले समय पर नहीं आ पाते. कोर्ट याचिकाकर्ता सज्जन कुमार और महेंद्र सिंह पर जुर्माना लगाना चाहती है, लेकिन जुर्माना इसलिए नहीं लगाया जा रहा क्योंकि इससे फैसला देने में और देर होगी. कोर्ट पक्षपात नहीं कर रहा है, लिहाजा याचिकाकर्ता के इस तरह के आरोप बेबुनियाद हैं. इस याचिका मे कोई मेरिट नहीं है, इसलिए कोर्ट याचिका को खारिज करता है.

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याचिका में सुनवाई कर रहे एक जज को बदलकर सुनवाई किसी और बेंच को ट्रांसफर करने की मांग की गई है. 24 अक्टूबर को कोर्ट ने सीबीआई, याचिकाकर्ता सज्जन कुमार और महेंद्र सिंह यादव का पक्ष सुनने के बाद मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. इससे पहले सज्जन कुमार ने हाई कोर्ट में तर्क रखा था कि जज पीएस तेजी इस मामले को निचली अदालत में सुन चुके हैं. तय नियमों और सिद्धांतों के मुताबिक उन्हें खुद ही मामले की सुनवाई से अलग हो जाना चाहिए. वह इस मामले में गहरी रुचि दिखा रहे हैं. वहीं, सीबीआइ ने सज्जन कुमार की इस करते हुए कहा था कि सज्जन कुमार सुनवाई में देरी करने के लिए इस तरह के हथकंडे अपना रहे हैं.

कड़कड़डूमा दिल्ली कैंट के राज नगर में हुए दंगों और हत्या के इस मामले में सज्जन कुमार को 2013 में बरी कर दिया था, जबकि पूर्व विधायक महेंद्र यादव को तीन साल कैद की सजा सुनाई थी. वहीं, मामले में किशन खोखर, बलवान खोखर, गिरधारी लाल, कैप्टन भागमल को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी.

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