जीवित बच्चे को मृत घोषित करने वाले मैक्स हॉस्पिटल का दिल्ली सरकार ने लाइसेंस रद्द किया

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन ने बताया कि हमने मैक्स हॉस्पिटल को लापरवाही बरतने का दोषी पाया है. हॉस्पिटल की यह पहली गलती नहीं है. लिहाजा मैक्स हॉस्पिटल का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाता है.

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तस्वीरः maxhealthcare.in तस्वीरः maxhealthcare.in

रोशनी ठोकने / राम कृष्ण

  • नई दिल्ली,
  • 08 दिसंबर 2017,
  • अपडेटेड 8:28 PM IST

दिल्ली के शालीमार बाग स्थित मैक्स हॉस्पिटल के खिलाफ केजरीवाल सरकार ने कड़ी कार्रवाई की है. जीवित बच्चे को मृत घोषित करने और सील करके परिजनों को सौंपने के मामले में दिल्ली सरकार ने मैक्स हॉस्पिटल का लाइसेंस रद्द कर दिया है.

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन ने बताया कि हमने हॉस्पिटल को आपराधिक लापरवाही बरतने का दोषी पाया है. हॉस्पिटल की यह पहली गलती नहीं है. ऐसा करना उसकी आदत में शुमार हो चुका है. लिहाजा मैक्स हॉस्पिटल का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाता है. उन्होंने कहा कि नवजात शिशु की मौत मामले में लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जा सकती है.

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सत्येंद्र जैन ने कहा कि जो मरीज अस्पताल में भर्ती हैं, उनका उपचार जारी रखा जा सकता है, लेकिन नए मरीजों की भर्ती नहीं की जा सकती. उन्होंने कहा कि मरीज अगर चाहें, तो दूसरे अस्पताल में स्थानांतरित हो सकते हैं. उन्होंने बताया कि सरकार ने जिस जांच के आदेश दिए थे, उसकी अंतिम रिपोर्ट शुक्रवार को मिल गई और उसके बाद यह निर्णय लिया गया.

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि पिछले महीने उन्होंने मैक्स शालीमार अस्पताल को ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) श्रेणी के तहत मरीजों के उपचार में समस्याओं के लिए नोटिस जारी किया था. उन्होंने कहा कि इसके अस्पताल खास अवधि के लिए आवंटित अतिरिक्त बेड का उपयोग जारी रखे हुए था, जबकि उसके उपयोग की समय सीमा समाप्त हो चुकी थी.

दरअसल, 30 नवंबर को दिल्ली के शालीमार बाग स्थित MAX हॉस्पिटल ने जीवित बच्चो को मृत घोषित कर दिया था और शव को प्लास्टिक के थैले में भरकर परिजनों को दे दिया था. इसके बाद परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने FIR दर्ज नहीं की थी और मामला मेडिकल की लीगल सेल को फॉरवर्ड कर दिया था. इसके बाद परिजनों ने हॉस्पिटल में जमकर हंगामा किया. मैक्स हॉस्पिटल ने वहीं बयान जारी कर कहा है कि वह बच्चे के परिजनों से अस्पताल लगातार संपर्क में है.

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मैक्स हॉस्पिटल ने कहा है, "दोनों बच्चों का जन्म 30 नवंबर 2017 को हुआ था. डिलीवरी के वक्त बच्चों की उम्र 22 सप्ताह थी. हम इस दुर्लभ घटना से सदमे में हैं. हमने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है. जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, बच्चे को मृत घोषित करने वाले डॉक्टर को तत्काल छुट्टी पर जाने के लिए कह दिया गया है."

क्या था मामला?

30 नवंबर को मैक्स हॉस्पिटल में एक महिला ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था. इनमें एक लड़का था और दूसरी लड़की. परिवार वालों ने बताया कि डिलीवरी के साथ ही बच्ची की मौत हो गई थी. डॉक्टरों ने दूसरे जीवित बचे बच्चे का इलाज शुरू कर दिया था, लेकिन एक घंटे बाद अस्पताल ने दूसरे बच्चे को भी मृत घोषित कर दिया था.

इसके बाद अस्पताल ने दोनों बच्चों की डेड बॉडी को प्लास्टिक में पैक करके परिजनों को सौंप दिया. दोनों बच्चों की डेड बॉडी लेकर परिजन लौट रहे थे. दोनों पार्सलों को महिला के पिता ने ले रखा था. रास्ते में उन्हें एक पार्सल में हलचल महसूस हुई. उन्होंने तुरंत उस पार्सल को फाड़ा, तो अंदर बच्चा जीवित मिला. इसके बाद उसको दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई.

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फोर्टिस हॉस्पिटल में भी धांधली का मामला

मैक्स हॉस्पिटल के अलावा राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटे हरियाणा के गुरुग्राम स्थित फोर्टिस हॉस्पिटल में भी इलाज के दौरान धांधली का एक मामला सामने आया है. इसमें हॉस्पिटल ने सात साल की बच्ची के डेंगू के इलाज के लिए 15 लाख 59 हजार रुपये का बिल थमा दिया. इसमें बच्ची की मौत भी हो गई. इसके बाद मामले की जांच में हॉस्पिटल को दोषी पाया गया.

हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा कि मामले में राज्य सरकार फोर्टिस हॉस्पिटल के खिलाफ कार्रवाई करेगी. हॉस्पिटल ने लामा प्रोटोकॉल नहीं माना और बच्ची के परिजनों से हर मामले में ज्यादा फीस वसूला.

विज ने बताया कि मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को भी खत लिखकर फोर्टिस हॉस्पिटल का लाइसेंस रद्द करने को कहा गया है. उन्होंने कहा कि यह एक तरीके की हत्या है. लिहाजा मामले में हरियाणा सरकार एफआईआर दर्ज कराने जा रही है. उन्होंने कहा कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304-A के तहत मामला दर्ज कराया जाएगा. उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार ने लीगल विभाग को एफआईआर दर्ज कराने की सिफारिश भेजी है.

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