दिल्ली सरकार की निजी स्कूल मालिकों के साथ सांठगांठ : विजेन्द्र गुप्ता

दिल्ली के निजी स्कूलों में दाखि‍ले को लेकर नेता विपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा है  कि दिल्ली सरकार और निजी स्कूल मालिकों के बीच सांठगांठ है और यही वजह है कि निजी स्कूलों में एडमिशन फीस के रूप में इतनी बड़ी रकम अभि‍भावकों से ली जाती है.  

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विजेंद्र गुप्ता विजेंद्र गुप्ता

मणिदीप शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 05 जनवरी 2017,
  • अपडेटेड 2:20 PM IST

दिल्ली विधानसभा में नेता विपक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने दिल्ली सरकार से मांग की है कि वह नर्सरी कक्षाओं में दाखिले के लिए तत्काल एक स्पष्ट, पारदर्शी और अभिभावक हितकारी कानून बनाएं. बगैर कानून बनाए वह लाखों कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश नहीं दिला पाएगी.

गुप्ता ने केजरीवाल सरकार पर के साथ सांठ-गांठ करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि नवम्बर 2015 में दिल्ली सरकार ने बगैर कानून बनाए एक बिल लाकर स्कूलों द्वारा किए जा रहे स्क्रीनिंग प्रक्रिया पर प्रतिबंध लगा दिया था. ऐसा इसलिए किया गया था, ताकि सरकार से सस्ती दरों पर करने वाले स्कूल मालिकों को अभिभावकों से डोनेशन वसूलने का रास्ता बंद न हो.

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, स्कूलों द्वारा मनमानी फीस वसूलने का निर्णय तथा निजी स्कूलों द्वारा अपने कर्मचारियों को कम वेतन देकर उनका शोषण करने पर दिल्ली सरकार स्कूल मालिकों के ही साथ है. इसीलिए नवम्बर 2015 के बाद से आज तक सरकार ने नहीं बनाया है.

विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि जबतक सख्त कानून नहीं बनाया जाता, निजी स्कूलों के मालिक आर्थिक रूप से कमजोर तथा वंचित वर्ग के बच्चों को अपने स्कूलों में प्रवेश नहीं देंगे. मान्य कानून के अभाव में द्वारा जारी किए गए प्रशासनिक आदेशों को मानने के लिए बाध्य नहीं हैं, यह जानते हुए भी सरकार सिर्फ प्रशासनिक आदेश जारी करके निजी स्कूलों को मनमानी करने और भ्रष्टाचार करने की खुली छूट दे रही है.

इससे लाखों अभिभावकों का खुले तौर पर आर्थिक शोषण किया जा रहा है. जो अभिभावक भारी फीस और डोनेशन देने की आर्थिक हैसियत नहीं रखते हैं, उनके बच्चों का भविष्य नए शिक्षा सत्र में अंधेरे में होगा, क्योंकि उन्हें स्कूलों में प्रवेश नहीं मिल पाएगा.

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