दिल्ली की खराब होती हवा से निपटने के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की मदद ली जाएगी। दिल्ली सरकार जल्द ही एक AI आधारित निर्णय सहायता प्रणाली (DSS) शुरू करने जा रही है, जो शहर में प्रदूषण बढ़ने से 48 से 72 घंटे पहले उसका अनुमान लगा सकेगा. इससे संबंधित विभागों को पहले से तैयारी करने और समय रहते कदम उठाने का मौका मिलेगा. यह प्रणाली अगले पांच वर्षों में विकसित किए जाने वाले एक बड़े एयर क्वालिटी मैनेजमेंट सिस्टम का प्रमुख हिस्सा होगी. अधिकारियों के अनुसार, यह सिस्टम प्रदूषण के आंकड़ों, मौसम संबंधी जानकारी और AI तकनीक का उपयोग करके प्रदूषण के स्तर का पूर्वानुमान तैयार करेगा.
नई व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि सरकारी एजेंसियां प्रदूषण बढ़ने के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय पहले से सक्रिय हो सकें. AI आधारित DSS प्रदूषण के संभावित स्तर का अनुमान लगाकर संबंधित विभागों को अलर्ट जारी करेगा और आवश्यक सलाह भी देगा. अधिकारियों का कहना है कि इससे प्रदूषण नियंत्रण के फैसले अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी हो सकेंगे. सिस्टम यह भी बताएगा कि किस इलाके में प्रदूषण बढ़ने की संभावना है और उसके पीछे प्रमुख कारण क्या हैं.
शहर के प्रदूषण हॉटस्पॉट की होगी पहचान
यह नई तकनीक दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में प्रदूषण के हॉटस्पॉट की पहचान करने में मदद करेगी. इसके जरिए यह समझा जा सकेगा कि प्रदूषण किस क्षेत्र से ज्यादा निकल रहा है और कौन से इलाके सबसे अधिक प्रभावित हैं. सिस्टम स्थानीय स्तर पर उत्सर्जन स्रोतों का विश्लेषण करेगा और विभागों को वैज्ञानिक आधार पर कार्रवाई की सलाह देगा. इससे प्रदूषण नियंत्रण उपायों को अधिक लक्ष्य आधारित बनाया जा सकेगा.
IIT कानपुर के साथ हुआ समझौताइस परियोजना के लिए दिल्ली के पर्यावरण विभाग और ऐरावत अनुसंधान फाउंडेशन के बीच समझौता हुआ है. ऐरावत अनुसंधान फाउंडेशन, IIT कानपुर में स्थापित भारत सरकार के AI सतत नगरीय विकास हेतु उत्कृष्टता केंद्र के अंतर्गत कार्यरत एक गैर-लाभकारी संस्था है. दोनों पक्षों के बीच हुआ यह समझौता पांच वर्षों तक प्रभावी रहेगा. आवश्यकता पड़ने पर इसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है.
बढ़ेगा एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग नेटवर्क
परियोजना के तहत दिल्ली में कम लागत वाले अधिक सेंसर लगाए जाएंगे. साथ ही मोबाइल मॉनिटरिंग लैब और सैटेलाइट डेटा का भी उपयोग किया जाएगा. अधिकारियों का मानना है कि इससे शहर के अलग-अलग इलाकों की हवा की गुणवत्ता की अधिक सटीक जानकारी मिल सकेगी. वर्तमान व्यवस्था की तुलना में यह नेटवर्क कहीं अधिक विस्तृत और प्रभावी होगा. नई प्रणाली यह समझने में भी मदद करेगी कि दिल्ली के भीतर कितना प्रदूषण पैदा हो रहा है और कितना प्रदूषण पड़ोसी राज्यों से आ रहा है.
इसके लिए एयरशेड मैपिंग और प्रदूषण की आवाजाही का विश्लेषण किया जाएगा. इससे विभागों को प्रदूषण के वास्तविक स्रोतों की पहचान कर उचित कार्रवाई करने में सहायता मिलेगी. दिल्ली सरकार का कहना है कि यह परियोजना केवल निगरानी तक सीमित नहीं रहेगी. इसका उद्देश्य वायु गुणवत्ता प्रबंधन को अधिक पारदर्शी बनाना, जवाबदेही बढ़ाना और लोगों की शिकायतों के निपटारे की व्यवस्था को भी मजबूत करना है.
इसके अलावा विभिन्न विभागों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP), समन्वय तंत्र और प्रतिक्रिया प्रोटोकॉल भी तैयार किए जाएंगे. नई तकनीक का उपयोग करने के लिए विभिन्न विभागों के अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा. उन्हें AI प्लेटफॉर्म से मिलने वाले डेटा को समझने और उसका उपयोग करने की जानकारी दी जाएगी.
शिकायतों के निपटारे और जवाबदेही पर भी रहेगा फोकस
इसके लिए तकनीकी दस्तावेज, गाइडलाइन और प्रशिक्षण सामग्री भी तैयार की जाएगी ताकि विभाग इस प्रणाली का प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकें. अधिकारियों के मुताबिक, इस समझौते के तहत फिलहाल दिल्ली सरकार पर कोई तत्काल वित्तीय बोझ नहीं आएगा. भविष्य में यदि किसी विशेष परियोजना के लिए धन की आवश्यकता होगी तो उसके लिए अलग से प्रस्ताव तैयार कर मंजूरी ली जाएगी.
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