छत्तीसगढ़ के जांजगीर चांपा में एक दुल्हन ने शादी से उस वक्त इनकार कर दिया, मंडप में दूल्हा नशे में धुत होकर पहुंचा. शादी की रस्मों के बीचे दूल्हे की हालत देखकर दुल्हन ने साफ कहा कि ऐसे व्यक्ति के साथ अपना भविष्य नहीं जोड़ सकती. बेटी के इस फैसले से सहमत होकर परिवार ने भी उसका साथ दिया और बारात बिना दुल्हन के वापस लौट गई. बाद में इस साहसिक निर्णय के लिए एसपी ऑफिस में दुल्हन और उसके परिवार का सम्मान किया गया.
ये कहानी कोसमंदा गांव की है. शादी की तैयारियां पूरी हो चुकी थीं. मेहमान मौजूद थे और विवाह की रस्में चल रही थीं. इसी दौरान दूल्हे के नशे में होने की बात सामने आई. रस्मों के बीच दूल्हा ठीक से खड़ा भी नहीं हो पा रहा था. हालत देखकर दुल्हन ने विरोध जताया और शादी से इनकार कर दिया.
दुल्हन ने कहा कि शादी जिम्मेदारी और सम्मान का प्रतीक होती है. ऐसे मौके पर नशे में पहुंचे व्यक्ति के साथ वह अपना जीवन नहीं बिताना चाहती. परिवार ने भी सामाजिक दबाव की बजाय बेटी के फैसले को सही समझा और शादी रोक दी. शादी रुकने के बाद माहौल खराब हो गया. सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति सामान्य कराई. इसके बाद बिना किसी विवाद के बारात वापस लौट गई.
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इस घटना की चर्चा पूरे इलाके में होने लगी. कई लोगों ने इसे आत्मसम्मान, जागरूकता और जीवन से जुड़े बड़े फैसलों में निर्णय लेने का उदाहरण बताया. जानकारी मिलने के बाद एसपी विजय कुमार पांडेय ने दुल्हन और उसके परिवार को ऑफिस बुलाकर सम्मानित किया.
एसपी ने कहा कि शादी जैसे अवसर पर नशा स्वीकार नहीं किया जा सकता. बेटियों को अपने भविष्य से जुड़े फैसले लेने का पूरा अधिकार है. उन्होंने कहा कि इस बेटी ने जिस साहस के साथ निर्णय लिया, वह समाज की अन्य बेटियों के लिए भी एक पॅाजिटिव मैसेज है. सम्मान और भविष्य से जुड़े फैसलों में किसी भी तरह का दबाव नहीं होना चाहिए. मंडप में लिया गया यह फैसला चर्चा का विषय बना हुआ है.
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