जोकीहाट JDU बनाम RJD नहीं, नीतीश बनाम तेजस्वी की लड़ाई

तेजस्वी यादव के लिए जोकीहाट में जीत का मतलब होगा पार्टी में ना केवल उनका कद बढ़ना बल्कि यह संदेश भी जाएगा कि तेजस्वी यादव नीतीश कुमार को टक्कर दे सकते हैं, जिसका फायदा उन्हें 2019 लोकसभा चुनाव में मिल सकता है.

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वोट डालने पहुंचे लोग वोट डालने पहुंचे लोग

सना जैदी / रोहित कुमार सिंह

  • पटना,
  • 28 मई 2018,
  • अपडेटेड 10:37 AM IST

जोकीहाट विधानसभा उपचुनाव के लिए सोमवार सुबह 7 बजे वोटिंग शुरू हो गई है. सुबह से ही वोट डालने के लिए  मतदान केंद्रों पर लोगों की लंबी लाइनें देखने को मिल रही हैं. इसकी खास वजह यह है कि जोकीहाट में 70 फ़ीसदी से ज्यादा मुस्लिम आबादी है और रमजान का महीना होने की वजह से मतदाता सुबह-सुबह ही अपने मत के अधिकार का प्रयोग कर लेना चाहते हैं.

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के राजनीतिक मायने की बात करें तो यह सीट 2005 से लगातार चार बार जदयू के पास रहा है. ऐसे में जोकीहाट चुनाव जीतना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए नाक का सवाल बना हुआ है.

जदयू ने इस बार जोकीहाट से मुर्शीद आलम को टिकट दिया है, लेकिन उनके ऊपर बलात्कार, हत्या और लूट के कई आरोपों ने उनके खिलाफ इलाके में माहौल बनाया है जिसका फायदा आरजेडी उठाना चाह रही है.

जदयू से यह सीट छीनने के लिए ने इस बार आरजेडी सांसद तस्लीमुद्दीन के छोटे बेटे शाहनवाज आलम को टिकट दिया है. पार्टी की उम्मीद है कि 70 फिसदी मुस्लिम मतदाताओं का फायदा उन्हें मिलेगा और साथ ही तस्लीमुद्दीन के नाम पर उन्हें सहानभूति वोट भी मिलेंगे.

जदयू बनाम आरजेडी से ज्यादा यह लड़ाई अब यादव की हो गई है. जोकीहाट जीतना नीतीश के लिए जितना जरूरी है उतना ही जरूरी तेजस्वी यादव के लिए भी जरूरी है.

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जोकीहाट पर नीतीश कुमार की हार इस बात को और ज्यादा बल देगी कि मुस्लिम मतदाता जो एक वक्त में नीतीश कुमार के साथ हो गए थे अब उनके खिलाफ हैं. इसकी मुख्य वजह यह है कि मुस्लिम मतदाताओं में इस बात को लेकर बेहद नाराजगी है कि नीतीश ने पिछले साल आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को धोखा देकर भाजपा के साथ सरकार बना ली. वहीं दूसरी तरफ जोकीहाट में जीत एक बार फिर से इस बात को साबित करेगी कि मुस्लिम मतदाता उनके भाजपा के साथ जाने के बावजूद भी साथ है.

तेजस्वी यादव के लिए जोकीहाट में जीत का मतलब होगा पार्टी में ना केवल उनका कद बढ़ना बल्कि यह संदेश भी जाएगा कि तेजस्वी यादव नीतीश कुमार को टक्कर दे सकते हैं, जिसका फायदा उन्हें 2019 लोकसभा चुनाव में मिल सकता है.

चुनावी जीत तेजस्वी यादव को नीतीश कुमार के समकक्ष लाकर खड़ा कर देगी. चुनावी जीत से यह भी साबित होगा कि तेजस्वी यादव अपने दम पर जदयू के सीट को छीन सकते हैं.

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