Ebola virus transmission: कोरोना से अधिक जानलेवा है इबोला वायरस! भारत को कितना खतरा?

कोरोना महामारी का खौफ अभी लोग भूले भी नहीं हैं कि एक बार फिर खतरनाक वायरस की चर्चा तेज हो गई है. हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इबोला वायरस कोरोना के मुकाबले कई गुना ज्यादा जानलेवा (फेटल) है, लेकिन राहत की बात यह है कि इसके फैलने की रफ्तार काफी धीमी है.

Advertisement
इबोला वायरस काफी तेजी से इंसानों में फैलता है. (Photo: ITG) इबोला वायरस काफी तेजी से इंसानों में फैलता है. (Photo: ITG)

आजतक हेल्थ डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 27 मई 2026,
  • अपडेटेड 11:30 PM IST

Ebola Virus Threat In India: दुनिया अभी कोरोना महामारी से उभरी ही थी कि एक ओर नए वायरस की चितांएं तेज हो गई हैं जिसने दुनिया भर की हेल्थ मिनिस्ट्री और ऑर्गनाइजेशंस को अलर्ट मोड पर ला दिया है. इस वायरस का नाम इबोला है जो कोरोना से भी खतरनाक बताया जा रहा है. मेडिकल साइंस के आंकड़ों के मुताबिक, इबोला वायरस में मरीजों की जान जाने का खतरा कोरोना से कई गुना अधिक है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार कोरोना का मृत्यु दर (मोर्टलिटी रेट) औसतन 1 से 2 प्रतिशत के बीच रहा है, जबकि इबोला की चपेट में आने वाले करीब 50 प्रतिशत मरीजों की मौत हो जाती है. इसी सीधे अंतर की वजह से एक्सपर्ट्स इबोला को कोरोना से कहीं ज्यादा फेटल (जानलेवा) और खतरनाक मानते हैं. अब भारत में इसको लेकर क्या तैयारियां हैं और कितना खतरा है, इस बारे में जान लीजिए.

कोरोना से कितना खतरनाक?

फरीदाबाद के एशियन हॉस्पिटल में रेस्पिरेटरी, क्रिटिकल और स्लीप मेडिसिन विभाग के डायरेक्टर और हेड डॉ. मानव मनचंदा का कहना है कि इबोला वायरस में मरीजों की जान जाने का खतरा (फेटैलिटी रेट) कोरोना से काफी ज्यादा है. हालांकि, इसके ट्रांसमिशन रेट को लेकर डॉक्टरों ने बड़ी राहत की बात कही है.

Advertisement

इबोला वायरस का ट्रांसमिशन रेट यानी एक से दूसरे इंसान में फैलने की रफ्तार कोरोना के मुकाबले बेहद धीमी है. यही कारण है कि इसके ग्लोबल पेंडेमिक (वैश्विक महामारी) बनने का रिस्क बहुत कम है. इंटरनेशनल हेल्थ गाइडलाइंस और WHO की रिपोर्ट्स भी इसकी पुष्टि करती हैं कि इबोला का दायरा आमतौर पर सीमित इलाकों तक ही सिमट कर रह जाता है.

क्यों धीमी है इबोला की रफ्तार?

डॉ. मनचंदा का कहना है, कोविड-19 और इबोला वायरस दोनों ही वायरल इन्फेक्शंस हैं लेकिन इनके फैलने के तरीके और मानव स्वास्थ्य पर होने वाले असर में जमीन-आसमान का अंतर है. कोरोना वायरस हवा में मौजूद खांसने या छींकने से निकलने वाले ड्रॉपलेट्स के जरिए फैलता है जब कि इबोला वायरस हवा से नहीं फैलता. यह केवल तभी फैल सकता है जब कोई व्यक्ति इबोला से संक्रमित मरीज के खून या बॉडी फ्लूइड्स के डायरेक्ट कांटेक्ट में आता है.

Advertisement

    वैक्सीन और एंटीबॉडी डेवलपमेंट में भारत का बड़ा कदम

    इस वायरस से निपटने के लिए भारत की क्षमताओं पर WHO की पूर्व साइंटिस्ट डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने न्यूज एजेंसी को बताया, भारत डब्ल्यूएचओ के ग्लोबल लेबोरेटरी नेटवर्क की मदद से इबोला वैक्सीन और मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज के डेवलपमेंट को काफी बढ़ावा दे सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि भारत में आईसीएमआर-एनआईवी (ICMR-NIV) पुणे जैसी टॉप संस्थाएं हैं जो इस नेटवर्क का हिस्सा हैं.

    इबोला जैसी बीमारियों से सुरक्षा के लिए पहले से वैक्सीन और थेरेपी तैयार रखना सबसे असरदार ऑपशन है. डॉ. सौम्या स्वामीनाथन के अनुसार, भारत अपनी मजबूत फार्मास्यूटिकल क्षमता और ग्लोबल नेटवर्किंग के दम पर इस दिशा में बड़ी भूमिका निभा सकता है.

    भारत को कितना खतरा?

    एक्सपर्ट्स का कहना है, देश का सर्विलांस सिस्टम अब पहले से काफी मजबूत हो चुका है. कोरोना के दौर से सीख लेते हुए भारत ने मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर और जीनोम सीक्वेंसिंग की कैपेसिटी को काफी बढ़ा लिया है. यूएस नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) के रिसर्चर्स के मुताबिक, इबोला जैसी बीमारियों को रोकने के लिए कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और आइसोलेशन सबसे असरदार ऑपशंस हैं. 

    इबोला से संक्रमित व्यक्ति बहुत जल्दी गंभीर रूप से बीमार हो जाता है इसलिए वह कोरोना के एसिम्प्टोमेटिक मरीजों की तरह छिपकर वायरस को ज्यादा लोगों में नहीं फैला पाता. एक्सपर्ट्स का कहना है कि पैनिक करने की जरूरत नहीं है, बल्कि अलर्ट रहना ही इसका सबसे बड़ा इलाज है.

    Advertisement

    क्या रखनी चाहिए सावधानियां?

    इबोला एक बेहद खतरनाक और जानलेवा वायरस है, जो संक्रमित व्यक्ति के पसीने, खून या लार जैसे शारीरिक तरल पदार्थों के सीधे संपर्क में आने से फैलता है. इससे बचाव के लिए ये सावधानियां बेहद जरूरी हैं:

    • कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान जैसे इबोला प्रभावित देशों की गैर-जरूरी यात्रा करने से पूरी तरह बचें.
    • प्रभावित क्षेत्रों से आने वाले लोगों के संपर्क में आने से बचें और नियमित रूप से साबुन-पानी या सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
    • यदि कोई व्यक्ति हाल ही में अफ्रीका से लौटा है, तो एयरपोर्ट पर थर्मल स्क्रीनिंग कराएं और अगले 21 दिनों तक बुखार या बदन दर्द जैसे लक्षणों की खुद मॉनिटरिंग करें.
    • लक्षण दिखने पर मरीज को तुरंत बाकी लोगों से अलग (Isolate) करें और स्वास्थ्य विभाग को सूचित करें.
    ---- समाप्त ----

    Read more!
    Advertisement

    RECOMMENDED

    Advertisement
    Latest News in Hindi »