दिल्ली हाई कोर्ट की जज जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा इन दिनों काफी चर्चा में हैं. वजह है अरविंद केजरीवाल की एक याचिका जिसमें उन्होंने गुजारिश की थी कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा, शराब नीति मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लें. केजरीवाल की इस याचिका को जस्टिस शर्मा ने खारिज कर दिया.
केजरीवाल को शक है कि जस्टिस शर्मा की अदालत में उन्हें न्याय नहीं मिल पाएगा. केजरीवाल ने इससे पहले जस्टिस शर्मा पर आरोप लगाया कि वो आरएसएस से जुड़े संगठन के कार्यक्रम में बतौर अतिथि चार बार शामिल हुईं थीं.
अब इसी संदर्भ में एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है जिसमें जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा किसी कार्यक्रम के दौरान भाषण देती हुई नजर आ रही है. इस वीडियो को ये कहकर शेयर किया जा रहा है कि जस्टिस शर्मा खुद ये मान रही हैं कि वो जब-जब आरएसएस के कार्यक्रमों में जातीं हैं, उनका प्रमोशन हो जाता है.
एक्स पर एक व्यक्ति ने लिखा, 'दिल्ली हाईकोर्ट की जज जस्टिस स्वर्णकांता जी स्वयं स्वीकार कर रही हैं कि जब-जब वो RSS भाजपा के कार्यकर्मों में जाती हैं,उनका प्रमोशन हो जाता है. फिर भी मैडम जी निष्पक्ष हैं. फजीहत के बाद भी, अरविंद केजरीवाल जी पर लगे फर्जी आरोपों की सुनवाई खुद करना चाहती हैं, कितना दबाव होगा?' इस पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है.
आजतक फैक्ट चेक ने पाया कि ये वीडियो महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ की लॉ-फैकल्टी के एक कार्यक्रम का है ना कि आरएसएस के किसी कार्यक्रम का. ये वीडियो दो साल पुराना है.
कैसे पता की सच्चाई?
वायरल वीडियो के कीफ्रेम्स को रिवर्स सर्च करने पर हमें ‘महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ’ के लॉ-डिपार्टमेंट का एक एक्स पोस्ट मिला. 2024 के इस पोस्ट में इस कार्यक्रम से जुड़ी कुछ तस्वीरें देखी जा सकती हैं. बैनर देखकर पता चलता है कि विश्वविद्यालय ने “Relevance of New Criminal Laws in Changing India” टॉपिक पर 19 मई, 2024 को एक दिन की वर्कशॉप आयोजित की थी. इस कार्यक्रम में जस्टिस शर्मा बतौर चीफ गेस्ट शामिल हुईं थीं.
इस जानकारी के साथ सर्च करने पर हमें फेसबुक पर इस कार्यक्रम की तमाम तस्वीरें मिलीं. 19 मई, 2024 के फेसबुक पोस्ट में हमें जस्टिस शर्मा के भाषण का वीडियो भी मिला. अपने भाषण की शुरुआत में वो कहती हैं, 'मैं जब-जब बनारस आई हूं, बाबा (भगवान शिव) ने मुझे कुछ दिया है. मुझे हर बार बाबा का स्नेह और इस विश्वविद्यालय से रंजन जी और शिल्पी जी का स्नेह यहां खींचकर लाता है, तो हर बार एक नई सौगात से लाता है.'
इसके बाद वो कहती हैं, 'जब आपने मुझे पहली बार यहां आमंत्रित किया था, तब मैं केवल एक सेशन जज थी. उसके अगले साल जब आपने मुझे बुलाया, तब मैं फैमिली कोर्ट की डिस्ट्रिक्ट जज थी. उसके अगले साल मैं डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज बनी और आज जब आपने मुझे आमंत्रित किया है, तो आपने मुझे, बाबा ने मुझे हाई कोर्ट का जज बना दिया है. इसके लिए मुझे आपका धन्यवाद करना चाहिए कि आप मुझे बुलाते रहे और बाबा मुझे कुछ-न-कुछ बनाते रहें.'
इससे दो बातें साफ हो जातीं हैं. पहला तो ये कि, जस्टिस शर्मा का ये वीडियो आरएसएस से जुड़े किसी कार्यक्रम का नहीं है. बल्कि वो एक विश्वविद्यालय की लॉ-फैकल्टी में बतौर चीफ गेस्ट एक वर्कशॉप में शामिल हुईं थीं. दूसरा इसमें वो अपनी उपलब्धियों का श्रेय विश्वविद्यालय और भगवान शिव को दे रहीं थीं, न कि आरएसएस को. इस कार्यक्रम में आरएसएस से जुड़े लोगों को भी बुलाया गया था या नहीं, हम इसके बारे में कुछ नहीं कह सकते. लेकिन इतना साफ है कि सोशल मीडिया पर इस वीडियो के साथ किए जा रहे दावे गलत हैं.
हिंदुस्तान की न्यूज रिपोर्ट में भी इस ईवेंट की कवरेज देखी जा सकती है. जस्टिस शर्मा इससे पहले भी इस विश्वविद्यालय के कार्यक्रमों में शामिल हो चुकी हैं.
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ का इतिहास आजादी से भी पहले का है. इसकी स्थापना 10 फरवरी, 1921 को हुई थी. 2021 में इस विश्वविद्यालय ने 100 वर्ष पूरे कर लिए थे. भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद समेत पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री भी यहां से पढ़ाई कर चुके हैं.
अभिषेक पाठक