पद्मावती और फुकरे रिटर्न्स के लिए CBFC के अलग-अलग नियम

सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सीबीएफसी) ने पद्मावती के जुड़े विवाद में कहा था कि निर्देशक संजय लीला भंसाली को अपनी फिल्म रिलीज डेट के 68 दिन पहले सबमिट करनी चाहिए थी, लेकिन सीबीएफसी ने यह नियम फुकरे रिटर्न्स के लिए तोड़ दिया है.

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पद्मावती, फुकरे रिटर्न्स पद्मावती, फुकरे रिटर्न्स

महेन्द्र गुप्ता

  • नई दिल्ली,
  • 03 दिसंबर 2017,
  • अपडेटेड 5:05 PM IST

सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सीबीएफसी) ने पद्मावती के जुड़े विवाद में कहा था कि निर्देशक संजय लीला भंसाली को अपनी फिल्म रिलीज डेट के 68 दिन पहले सबमिट करनी चाहिए थी, लेकिन सीबीएफसी ने यह नियम फुकरे रिटर्न्स के लिए तोड़ दिया है.

फुकरे रिटर्न्स 8 दिसंबर को रिलीज हो रही है, इसे निर्देशक ने रिलीज के सिर्फ 12 दिन पहले सबमिट किया है. इस फिल्म को सर्टिफिकेट दे दिया गया है. दोनों फिल्मों के लिए अलग अलग नियम बताए जाने से सीबीएफसी की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए.

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सीबीएफसी ने यह भी कहा था पद्मावती को सर्टिफिकेट इसलिए भी जारी नहीं किया गया, क्योंकि आवेदन अधूरा था. बता दें कि 68 दिन का नियम लंबे समय से है, लेकिन इसका सख्ती के साथ पालन नहीं किया जाता है, इसे अव्यवहारिक माना जाता है. सेंसर बोर्ड के सीईओ अनुराग श्रीवास्तव का कहना है कि कई नियम है, इन्हें इसलिए दरकिनार किया जाता है, क्योंकि कई बार निर्माता बोलते हैं कि हमें कल या परसों में फिल्म रिलीज करनी है.

बता दें कि करणी सेना के विरोध के बाद पद्मावती की रिलीज टल गई है. ये एक दिसंबर को रिलीज होनी थी. वहीं ब्रिटेन के सेंसर बोर्ड ने इस फिल्म को बिना कट के पास कर दिया. नकारी के मुताबिक ब्रिटिश बोर्ड ऑफ़ फिल्म क्लासिफिकेशन (BBFC) ने दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह और शाहिद कपूर स्टारर पद्मावती को एपिक ड्रामा कैटेगरी में 12A सर्टिफिकेट दिया है. इसके मुताबिक फिल्म को 12 साल या उससे अधिक उम्र के व्याक्तियों को दिखाई जा सकती है. BBFC के नोट के मुताबिक 164 मिनट लंबी 'पद्मावती' हिंदी भाषा की एपिक ड्रामा है. जिसमें एक सुल्तान राजपूत रानी को हासिल करने के लिए आक्रमण का नेतृत्व करता है.

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भारत में फिल्म को कोई सर्टिफिकेट नहीं मिला है, लेकिन लगातार बैन को लेकर घोषणाएं हो रही हैं. बुधवार को गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने इसके प्रदर्शन पर रोक लगाने की घोषणा की. उन्होंने कहा, फैसला क्षत्रीय और दूसरे संगठनों से बातचीत के बाद लिया गया है. तय हुआ है कि जब तक आपत्तियों का समाधान नहीं होगा, क़ानून-व्यवस्था को देखते हुए गुजरात में फिल्म रिलीज नहीं की जा सकती.

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