भारत-नेपाल सीमा विवाद के बीच नेपाल से ताल्लुक रखने वाली एक्ट्रेस मनीषा कोईराला अपने बयानों के चलते सुर्खियों में हैं. मनीषा कोईराला के बयानों से उनके भारतीय फैंस भी काफी नाराज हैं. नेपाल के राजघराने से संबंध रखने वाली मनीषा के पिता मंत्री रह चुके हैं. उनके दादा नेपाल के प्रधानमंत्री भी रह चुके हैं. बॉलीवुड में भी कई सितारे ऐसे हैं जिनके पेरेंट्स पॉलिटिक्स में हाथ आजमा चुके हैं. आइए जानते हैं ऐसे सितारों के बारे में .
सनी देओल कुछ समय पहले अपने बेटे करण देओल को बॉलीवुड में लॉन्च कर चुके हैं और साल 2019 के आम चुनावों में बीजेपी पार्टी से सांसद का चुनाव जीत कर अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत भी कर चुके हैं. सनी देओल गुरदासपुर की उसी सीट से चुनाव जीतने में कामयाब रहे हैं जो इससे पहले विनोद खन्ना के पास थी. सनी देओल के पिता धर्मेंन्द्र भी राजनीतिक पारी खेल चुके हैं.
बलराज दत्त उर्फ सुनील दत्त ना सिर्फ एक सफल एक्टर, प्रोड्यूसर और डायरेक्टर थे बल्कि वे एक राजनेता के तौर पर भी लोगों के बीच लोकप्रिय थे. संजय दत्त के पिता सुनील दत्त साल 2004-05 में मनमोहन सिंह की यूपीए सरकार में यूथ अफेयर्स एंड स्पोर्ट्स मिनिस्टर थे. इसके अलावा सुनील दत्त की बेटी भी पूर्व सांसद रह चुकी हैं.
एक्टर रितेश देशमुख के पिता विलासराव देशमुख कांग्रेस पार्टी के महत्वपूर्ण लीडर में शुमार थे. वे दो बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. वे साल 1999 से लेकर 2003 और साल 2004 से लेकर 2008 तक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की भूमिका निभा चुके हैं. साल 2012 में किडनी और लीवर फेलियर के चलते विलासराव का निधन हो गया था.
एक्टर सिकंदर खेर की मां और एक्ट्रेस किरण खेर ने साल 2009 में बीजेपी को जॉइन किया था. वे पीएम नरेंद्र मोदी की प्रशंसक रही हैं. उन्हें साल 2014 के लोकसभा चुनाव में चंडीगढ़ से टिकट मिला था और वे इस सीट पर जीतने में कामयाब रही थीं. साल 2019 में एक बार फिर किरण खेर चंडीगढ़ से सांसद चुनी गई थीं.
अक्षय खन्ना के पिता और मशहूर एक्टर विनोद खन्ना ने साल 1997 में बीजेपी को जॉइन किया था. इसके अगले साल 1998 में वे लोकसभा चुनाव में पहली बार पंजाब के गुरुदासपुर सीट से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे. 1999 में विनोद खन्ना दोबारा से गुरुदासपुर लोकसभा सीट से चुनाव जीतने में कामयाब रहे. साल 2002 में केंद्र सरकार में उन्हें केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री बनाया. हालांकि छह माह में ही उन्हें केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री का अहम पद सौंपा गया था.
साल 2009 के लोकसभा चुनाव में विनोद खन्ना को गुरुदासपुर की सीट से कांग्रेस के कैंडिडेट से हार का मुंह देखना पड़ा लेकिन विनोद खन्ना ने इसी सीट से अपने पुराने प्रतिद्वंदी को हरा दिया था. साल 2017 में विनोद का निधन हो गया था.